Book Title: Parvtithi Prakash Timir Bhaskar
Author(s): Trailokya
Publisher: Motichand Dipchand Thania

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Page 9
________________ पृष्ठ ६५ ६५ 9. ८७ पंक्ति ५ १५६ १५७ १५९ ६ १४ २१ "" १३ ૭ १०२ × १०५ १०६ ૧૦૮ ૧૨ 118 ११९ १२० " ૧૫૧ 14 १४२ १९ ૧૪૬ ૧૫૦ १५० १५१ १५५ १५५ " १३ १९ २ १९ ૨૨ 11 ४ ૧ ૧૧ १७ ૨૦ ८ ૧૦ १२ अशुद्ध एसा तुम हीको हौं प्रतिक पाठका ता कि ही नेभी कदी से श्रथमा 'यण' का त्रयोदशीका दगीना " एकदिन तकका शरीफ अपरा कानो में डालकर या यहां काणा जाती तिथिका तपा वह བྷཱ शुद्ध ऐसा व (समुद्र से उप ) हा समुद्रसे उत्पक्ष Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat तुम ही को ही प्रतिका पाठ ताकि नेभी कदीम से प्रथमा 'यण' को त्रयोदशीको दागीना , एकदिन पूजन तकका शरीक परा कानो में अंगुली डालकर था है वहां काळा जाता तिथि के तया यह पाकीस www.umaragyanbhandar.com

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