Book Title: Jayanti Charitram
Author(s): Malayprabhsuri, Vijayakumudsuri
Publisher: Manivijay Ganivar Granthmala
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________________ // 235 // HDCALOCALCCARANSACRECTION परमत्थो / // 32 // सिरि भदत्तचक्की चित्तचमुक्कारयं तत्तो / जम्पइ महुरगिराए बन्धवविनाणहिट्ठमणो // 33 // पुत्वभव- चक्रिणा चन्धुविरहो हुयासणो नेहविउणियपयावो / मुच्छावेसनिबन्धणमिह मह जाओ तदा तस्स // 34 // आरामट्ठियमुणिणो | स्वपूर्वभवा पूरइ सो अन्नहा कह सिलोग ? / तो अम्हं पुत्वभवे निसुणह तुम्हे कहिजन्ते // 35 // अम्हे माहणजाया नियदासीए भवंमि दर्शिताः पढममि / पुत्ता न खमा ठाउं नेहेणऽननविरहेण // 36 // जोवणपत्ता पत्ता रयणीए छित्तरक्खणनिमित्तं / एक्को डको अहिणा प्रधान बीउवि य तं गवेसन्तो॥ 37 // कालिञ्जरे गिरिन्दे हरिणीए गम्भसंभवा अम्हे / अन्नोन्नपेमपरवसहियया हरिणा भवे लोकानाम् / बीए // 38 // अइनेहपडिबद्धा तारूने जमलचारिणो दोवि / वाहेणेगसरेणं समग चिय पाविया मरणं // 39 // अट्टज्झाणपरायणहियया मरिऊण दोवि समकालं / एगाए हंसीए हंसा जाया नईकूले / / 40 // तत्थवि पेमाणुगया सुसंगया एगया दुरंतेण / पारद्धिएण पासप्पओगओ पाविया निहणं // 41 // वाणारसीनयरीए उदयं पत्तेण नीयगोत्तेण / चंडालदारगत्तं पत्ता रूवाइगुणजुत्ता // 42 // अह तत्थ नमुहमन्ती निवग्गमहिसीगमणेण सकलंको / रन्ना निग्गहहेउं समप्पिओ अम्ह जणयस्स // 43 // पिउणावि एस वुत्तो अभयं वियरेमि तुज्झ पाणाण / पच्छन्नं मह पुत्ता कलासु कुसला जइ करेसि तं // 44 // जीवन्तो चिय जीवो भद्दसयाई लहइ जियलोए। इइ चिन्तिऊण मन्ती पडिवजइ अम्ह पिउवयणं // 45 // लेहाइया कलाओ तेणऽम्हे भूमिमन्दिरहिएण / अचिरेण सिक्खविया पिउणा किजन्तसम्माणे // 46 / / किन्तु सचिवो चलिन्दियनिन्दियचरिओ बहुं पिउवयरिओ / मयरद्धयसरविद्धो मुद्धो गिद्धोऽम्ह जणणीए // 47 // अहवा-वसइ जहिं चेव खलो पोसिजन्तो वि नेहदाणेण / तं चेव आलयं दीवउ व अचिरेण मइलेइ / / 48 // बत्तन्ते वुत्तन्ते विनाए कोहपरवसो R235 // 98515AMCHORECASCANCIEOCOM

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