Book Title: Jayanti Charitram
Author(s): Malayprabhsuri, Vijayakumudsuri
Publisher: Manivijay Ganivar Granthmala
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________________ // 247 // 15CROCCACANCE जियवेश // 52 // दोबच्चे परिणीए पियरेहि पराभवंमि अत्थत्थी / देण पराभूओ पराभवं ही अहमकासं // 53 // एसो लिचाणक्यस्य लोहप्पिसाओ भएहि कोहमाणमोहेहिं / जीवक्खयकारणेहिं सहिओ धमेहिं जेयवो // 54 // तेहिं पुणोऽहं महिओ रहिओ शुद्धलेश्या करुणारसेण जीवाणं / खयहेउं चिय घिद्धी दुबुद्धी चेव संजाओ // 55 // सावयकुलंमि जम्मे धम्मो जिणरायदेसिओ हियए / चतुःशरणहा हारिओ मए कह विविहारंभप्पबन्धेहि // 56 // जिणधम्मे कप्पडुमचिन्तामणिकामधेणुसारिच्छे / लद्धेवि मए भवदुह- करणं च। दोगच्चनिमित्तमायरियं // 57 // पंचमहत्वयमारं जे जीवा हुंति वोढुमसमत्था / सावयधम्ममि निरया अप्पारम्भा इमे धमा // 58 / / अजवि न किंपि नटुं सम्मं सम्मत्तमूलगिहिधम्मं / अंगीकरेमि वारसविहं अहं विविहमेएहिं // 59 // अरहन्ता महसरणं / अरहन्ता मज्झ देवया इण्डिं / अरिहन्तकित्तणेणं चएमहं पावगं सवं // 60 // कम्ममलविप्पमुक्काणं सिद्धाणं तहय सरणमावो / तेसिं चेव समक्ख चएमि पावसमारम्भं // 61 // आयरियाइयाणं मुणीण तवचरणकरणनिरयाणं / गच्छामि अहं सरणं काऊण पाववोसिरणं // 62 // धम्मो जिणिन्दमणिओ छजीवनिकायवच्छलो सरणं / पडिवनोऽहं सम्मं तिविहं तिविहेण | जाजीवं / / 63 // एयंमि अणाइए भवंमि विविहाइपावट्ठाणाई / मूढेहिं विहियाई सवाई ताई गरिहामि // 64 // जिणधम्ममि | प्पवन्ने कयाइ कीरन्ति जाणि सुकडाणि / ताई अणुमोएमो समयविहीए पवत्ताई // 65 // इच्चाइ भावणाए दिवोसहिपियसहीए लीलाए / उद्धरियसबसल्लो चाणक्को मोहपडिमल्लो // 66 // एवं धम्मज्झाणे सारयपसरन्तचन्दकिरणोहे / तस्स मणो पइसमयं है। सरं व परिनिम्मलं होइ // 67 // कम्मवणहववाहो पसरइ देहमि तस्स जह दाहो / तह वह सयंसाहो सिववहुसुहसंगमोम्माहो // 68 // तेलोकमत्थयत्या सिद्धा अइरामरा महासत्ता / केवलनाणमणतं पत्ता असरीरिणो धन्ना // 69 // गन्माइयं दुक्खं / 247 // SAGARCASSAUGA45

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