Book Title: Nandanvan Kalpataru 2016 05 SrNo 35
Author(s): Kirtitrai
Publisher: Jain Granth Prakashan Samiti
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॥ श्रीगौतमस्वामिचरित्रम् ।। - स्व. आ. विजयधर्मधुरन्धसूरिः
[भुजङ्गप्रयातवृत्तम् ] यदीयं पवित्रं चरित्रं सुचित्रं,
लवित्रं महाविघ्न-वल्ली-विताने । समस्त-प्रशस्त-प्रभाव-प्रभूतं,
नमो गौतमस्वामिने मङ्गलाय ||१|| जनिर्यस्य जाता वसोर्विप्रगेहे,
पृथिव्या जनन्या अनन्यात्मदेहे । प्रसन्नं कृतं नाम यस्येन्द्रभूति
__ नमो गौतमस्वामिने मुडलाय ||२|| पठित्वाऽखिलं वेदवेदाङ्गशास्त्र,
प्रचण्डं क्रियाकाण्डमभ्यस्य सर्वम् । महाकर्म-काण्डीति यः ख्यातिमाप्तो.
नमो गौतमस्वामिने मङ्गलाय ।।३।। विना त्वां न कश्चित् परो विश्ववेत्ता,
न वादी न वक्ता न शास्ता प्रमाता | अभूधस्य मानं तथातथ्यमुच्चै
नमो गौतमस्वामिने मङ्गलाय ॥४॥ त्रिलोक्यां समस्यां समस्तार्थवेदी
प्रमत्त-प्रवादीभसन्मान-भेदी । अनन्योऽहमेवेति मत्तोऽभवद्यो,
नमो गौतमस्वामिने मङ्गलाय ॥५॥ समेता नभः-शून्य-बाणप्रमाणा (५00)
विशिष्टार्थमाज्ञातुमाचार्यकल्पाः । यदीयान्तिकं शिष्य-भावं गृहीत्वा,
नमो गौतमस्वामिने मङ्गलाय ||६||

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