Book Title: Sambodh Prakaranam
Author(s): Haribhadrasuri, 
Publisher: Jain Granth Prakashak Sabha

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Page 47
________________ REC ACCOUSE SASRUSSEL वैवाय १० असंबर १० संकिलेस १०-दसगं हासाइ छक्क६ मुझित्ता । जिणसासणपवत्तो छत्तीसगुणो हवइ सूरी (१६) ॥ १११ ॥ सामायारी दसहा कहेइ १० दसगं समाहिठाणाणं १० । उझियकसापसालस १६ एवं छत्तीसगुणकलिओ (१७)॥११२॥ चउरो समाहिठाणा इकिको चउर १६ सोहिअसणस्स। दसगे १० दसपडिसेवा १०-वजिओ टुति छत्तीसं (१८)॥११३॥ मुणिधम्म १० विगय १० वेया-पच्चं १० दसगं सया परिवहइ। वज्जिय छअकप्पो ६ एवं छत्तीसगुणतो (१९)॥११४॥ रुइदसग १० च दुसिल्का २ सदिठिवायंग १२ तह उबंगाणि १२। । बारस बारस छत्तीस एवं सूरीण गुण संखा (२०) ॥ ११५ ॥ इक्कारस गिहिपडिमा११ बार व्यय १२ तेर किरियठाणाणि १३ जाणंतो बज्जतो छत्तीसगुणो य आपरिओ(२१)।।११६॥ दसविहपायच्छित्तं १० उपभोगा बार १२ चउदउवगरणा १४ विहिणा पडिवज्जमाणो छत्तीसगुणोहररी (२२)॥११७॥ भावण १२ तव १२ मुणिपडिमा १२ बारस मेया भवंति तिगुणिज्जा। एवं छत्तीसगुणो गुरुबुद्धीए पणमियबों(२३)॥११८॥ अंडाइअट्ठसुहमाणि ८ गुणटाणाणि तहेव चउदस य १४। पडिरूवाइ चऊदस १४ सूरिगुणा हुँति छत्तीसं (२४)॥११९॥ गारव ३ सल्लाण ३ तियं पन्नरस सन्ना य १५ जोय पन्नरस १५॥ एवं छत्तीसगुणा आयरियो जो सया मुणइ(२५)॥१२०॥5 सोलस उग्गमदोसा १६ सोलस उप्पायणाइ जे दोसा १६। दव्वाभिग्गह चउक्कं ४ एवं छत्तीस सूरिगुणा (२६)॥१२१॥ सोलस वयणा १६संजम-सत्तरस मेया १७विराहणा तिनि। एवं छत्तीस गुणा-लंकिअतणु होइ आयरिओ (२७)॥१२२॥ अठारस पुरिसंमि चरणअजुग्गाण १८ देइ नो चरणं । पावठाणाणि अहार १८ वज्जणो होइ उत्तीसं (२८)॥१२३॥ E CIES Jain Education International For Private & Personal use only www.jainelibrary.org

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