Book Title: Sacchaye Prakirnak Dashake
Author(s): Agamoday Samiti,
Publisher: Agamoday Samiti
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दसए १० मरणसमाही
॥१०॥
है| परीसहसहा विसयसुहपमोइया अप्पा ॥ १६५ ॥ १४०० ॥ इंदियमुहसाउलओ घोरपरीसहपराइयपरज्झोपरिकर्मण
अकयपरिकम्म कीवो मुज्झइ आराहणाकाले ॥ १६६ ॥१४०१॥ बाहंति इंदियाइं पुट्विं दुन्नियमियप्पयाराई आवश्यता अकयपरिकम्मकीवं मरणे सुअसंपउत्तंपि ॥ १६७॥ १४०२॥ आगममयप्पभाविय इंदियमुहलोलुयापइदृस्स । जइवि मरणे समाही हज न सा होइ बहुयाणं ॥ १६८ ॥ १४०३ ॥ असमत्तसुओऽवि मुणी पुचिं सुकयपरिकम्मपरिहत्थो। संजमनियमपइन्नं सुहमत्तहिओ समण्णेइ ॥ १६९॥ १४०४ ॥ न चयंति किंचि काउं पुविं सुकयपरिकम्मजोगस्स । खोहं परीसहचमू धिईबलपराइया मरणे ॥ १७० ॥ १४०५ ॥ तो तेऽवि पुचचरणा जयणाए जोगसंगहविहीहिं । तो ते करिति दसणचरित्तसइ भावणाहेउं ॥१७१ ॥१४०६ ॥ जा* पुवभाविया किर होइ सुई चरणदसणे बहुहा । सा होइ बीयभूया कयपरिकम्मस्स मरणम्मि ॥१७२॥१४०७॥ परीपहसहाः विषयसुखप्रमो(नो)दितात्मानः॥१६५।। इन्द्रियसुखसाताकुलो घोरपरीपहपराजितः अपराद्धः(परायत्तः) । अकृतपरिकर्मा क्लीवो 8 मुह्यति आराधनाकाले ॥१६६।। वाधन्ते इन्द्रियाणि पूर्व दुर्नियमितप्रचाराणि । अकृतपरिकर्माणं वीर्य मरणे स्व(श्रुत)प्रसंयुक्तमपि ॥१६॥ आगममयाभावितस्य इन्द्रियमुखलोलताप्रतिष्ठस्य । यद्यपि मरणे समाधिर्भवेन न सा भवति बहुकानां ॥ १६८ ॥ असमानश्रुतोऽपि मुनिः पूर्व सुकृतपरिकर्मनिपुणः । संयमनियमप्रतिज्ञां सुखमात्महितः समन्वेति ॥ १६९ ॥ न शक्नोति किंचित् कर्नु पूर्व सुकृतपरिकर्मयोगस्य । क्षोभं परीषहचमूः धृतिवलपराजिता मरणे ॥ १७० ॥ ततस्तेऽपि पूर्वचरणा(भवन्ति)यतनया योगसंग्रहविधिभिः । ततस्तेऽपि भाव- २०७॥ नाहेतोर्दर्शनचारित्रस्मृतिं कुर्वन्ति ॥ १७१ ॥ या पूर्व भाविता किल भवति श्रुतिश्वरणे दर्शने च बहुधा । सा भवति वीजभूता कृतपरिक
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