Book Title: Khartargaccha Sahitya Kosh
Author(s): Vinaysagar
Publisher: Prakrit Bharti Academy
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७४४९. विनयसागर महो० / जिनमणिसागरसूरि,खरतरगच्छ का इतिहास-प्रथम खण्ड, सम्पादन,
इतिहास, हिन्दी, सन् १९५६, मु., जिनदत्तसूरि अष्टम शताब्दी समारोह समिति, अजमेर ७४५०. विनयसागर महो० / जिनमणिसागरसूरि, खरतरगच्छ का बृहद् इतिहास, लेखन,
इतिहास, हिन्दी, सन् २००४, मु., प्राकृत भारती अकादमी, एम.एस.पी.एस.जी.चेरिटेबल
ट्रस्ट, जयपुर ७४५१. विनयसागर महो० / जिनमणिसागरसूरि, खरतरगच्छ दीक्षा नन्दी सूची, इतिहास, हिन्दी,
श्री भंवरलालजी नाहटा के साथ सम्पादन, सन् १९९०, मु., प्राकृत भारती अकादमी, जयपुर ७४५२. विनयसागर महो० / जिनमणिसागरसूरि, खरतरगच्छ-पट्टावली संग्रहः, सम्पादन, इतिहास,
संस्कृत, सन् २०००, मु., प्राकृत भारती अकादमी, जयपुर ७४५३. विनयसागर महो० / जिनमणिसागरसूरि, खरतरगच्छ प्रतिष्ठा लेख संग्रह, सम्पादन,
अभिलेख, संस्कृत, सन् २००५, मु., प्राकृत भारती अकादमी, एम०एस०पी०एस०जी०चेरिटेबल
ट्रस्ट, जयपुर ७४५४. विनयसागर महो० / जिनमणिसागरसूरि, खरतरगच्छ-बृहद् गुर्वावली, सम्पादन, इतिहास,
संस्कृत, सन् २०००, मु., प्राकृत भारती अकादमी, जयपुर ७४५५. विनयसागर महो० / जिनमणिसागरसूरि, खरतरगच्छ साहित्य कोश, सम्पादन, साहित्य
सूची, हिन्दी, सन् २००६, मु., प्राकृत भारती अकादमी, जयपुर, एम.एस.पी.एस.जी. चेरिटेबल
ट्रस्ट, जयपुर ७४५६. विनयसागर महो० / जिनमणिसागरसूरि, खरतरगच्छ साहित्य सूची, सम्पादन, साहित्य
सूची, हिन्दी, सन् १९६९, मु., मणिधारी जिनचन्द्रसूरि अष्टम शताब्दी समारोह, दिल्ली ७४५७. विनयसागर महो० / जिनमणिसागरसूरि, गणधरवाद, सम्पादन, हिन्दी, सन् १९८२, मु.,
प्राकृत भारती अकादमी, जयपुर ७४५८. विनयसागर महो० / जिनमणिसागरसूरि, गौतमरास : परिशीलन, अनुवाद-सम्पादन, रास,
'हिन्दी, सन् .१९८७, मु., प्राकृत भारती अकादमी, जयपुर ७४५९. विनयसागर महो० / जिनमणिसागरसूरि, चतुर्विंशति जिन स्तुतिः, सम्पादन, स्तोत्र, संस्कृत,
सन् १९४८, मु., सुमति सदन, कोटा ७४६०. विनयसागर महो० / जिनमणिसागरसूरि, चतुर्विंशति जिन स्तोत्राणि, सम्पादन, संस्कृत,
सन् १९७९, मु., आर्य जयकल्याण केन्द्र, बम्बई ७४६१. विनयसागर महो० / जिनमणिसागरसूरि, चतुर्विंशति जिनेन्द्र स्तवनानि, सम्पादन, संस्कृत,
सन् १९४८, मु., सुमतिसदन, कोटा ७४६२. विनयसागर महो० / जिनमणिसागरसूरि, जिनवल्लभसूरि ग्रन्थावली, सम्पादन, ग्रन्थ संग्रह,
प्राकृत-संस्कृत, सन् २००४, मु., प्राकृत भारती अकादमी, एम.एस.पी.एस.जी.चेरिटेबल ट्रस्ट, जयपुर
खरतरगच्छ साहित्य कोश
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