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बच्चों के लिए क्या करें ?
■ दादा-दादी और नाना-नानी एक ऐसे सघन वृक्ष की तरह हैं जिसकी छाँव तले बच्चे आनन्दित, संस्कारशील और आशावादी होते हैं ।
■ दादा अनुभवों के ख़ज़ाने हैं जिनके साथ रजाई में बैठकर रोज़ नई-नई कहानियाँ सुनने को मिलती हैं। दादी बच्चों को सबसे ज़्यादा लाड़-प्यार करती है । नानी बच्चों की सबसे. प्रिय मित्र होती है जो कि उसकी हर बात सुनती है। जबकि नाना वे हैं जो कहा करते हैं, 'आजकल दुबला होता जा रहा है । चल, जूस पी ले। '
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