Book Title: Charge kare Zindage
Author(s): Chandraprabhsagar
Publisher: Jityasha Foundation

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Page 28
________________ पुलिंदा खोलने की बजाय मुस्कुराते हुए उनके घर आने पर ख़ुशी जाहिर कीजिए। उन्हें अपनी बात तहज़ीब से कहें और वह भी तब जब वे आराम कर चुके हों। अपने घर को तोडिए मत, टूटे हुए दिलों का आपस में जोड़िए । कुलवधु और गृहलक्ष्मी बनकर परस्पर प्रेम और संप बढ़ाने की प्रेरणा दें और सास-ससुर की सेवा को अपने माता-पिता का सम्मान समझें। अपने पति को धन कमाने की प्रेरणा दीजिए, पर बेईमान बनने की नहीं। बेईमानी करके वे आपके लिए हीरों की चूड़ियाँ तो बना देंगे, पर कहीं ऐसा न हो कि उनके हाथों में लोहे की हथकड़ियाँ आ जाएँ। यदि आपके मित्र कृष्ण जैसे हों, तो सौभाग्य ! वे सुदामा के काम आएँगे, पर यदि मंथरा जैसे हों तो आज ही उनसे Jain Educationa International For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org

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