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क्या माँगें प्रभु से?
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• परमपिता परमेश्वर का यश और उसकी आभा सर्वत्र व्याप्त
है। उसे केवल मंदिर-मस्जिद तक ही मत देखिए। - माता-पिता, गुरुजन, किलकारी भरता बच्चा और घर आया
अतिथि - भगवान की ही अभिव्यक्तियाँ हैं। आप इनसे प्यार कीजिए, इन्हें सम्मान दीजिए और जो कुछ आपके पास है इनके साथ मिल-बाँटकर उसका उपभोग करने का
आनन्द लीजिए। • प्रभु को इस बात से कोई प्रयोजन नहीं है कि आप उसे किस पंथ और पथ से पाना चाहते हैं, प्रभु को सिर्फ इस बात से सरोकार है कि आप उसे कितना पाना चाहते हैं। 96
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