Book Title: Charge kare Zindage
Author(s): Chandraprabhsagar
Publisher: Jityasha Foundation

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Page 37
________________ मांसाहारी को शाकाहारी बनाना अड़सठ तीर्थों की यात्रा कर आने के समान है । ■ हाथ में लिखी भाग्यरेखा नीलम और मोती पहनने से नहीं बदलती। रोज़ाना कुछ-न-कुछ दान देने की प्रवृति हो, तो यह ख़ुद ही सँवर जाती है । • जब जो काम करने के भाव उठें, उसे शुरू करने का वही सबसे अच्छा मुहूर्त है। इस समय अमृत सिद्धि योग है, ढिलाई छोड़िए और काम शुरू कर दीजिए । बिजली तो हर किसी के भीतर होती है, ज़रूरत है सिर्फ़ उसे चार्ज करने की । दुनिया तो गेंद की तरह है खेलने वाला हो तो इस दुनिया को जिंदगी भर खेला जा सकता है। हम अपनी इच्छाशक्ति का हॉर्लिक्स दुगुना करें, खेलने की ताक़त खुद-ब-ख़ुद बढ़ जाएगी। Jain Educationa International For Personal and Private Use Only 36 www.jainelibrary.org

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