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• चौराहे पर बैठे किसी नेत्रहीन व्यक्ति ने आदमी की भाषा
और व्यवहार के आधार पर ही यह निर्णय दिया था कि कौन व्यक्ति सैनिक है, कौन सेनापति और कौन राजा। अपनी भाषा और प्रस्तुति को इतना शालीन बनाइए कि सड़क चलता कोई नेत्रहीन भी आपको प्रेम से राजन् कह सके। चेहरे को रंग देना कुदरत का काम है, पर जीवन को सही ढंग देना हमारा स्वयं का दायित्व है। पत्नी यदि साँवली हो, पर स्वभाव और व्यवहार से दिल को जीतने वाली हो तो स्वर्ग का सुकून उस साँवलेपन के सान्निध्य में भी मिल सकता है। बाकी गोरा तो चूना भी होता है, पर यदि वह दिल को चीरता है तो उस गोरेपन को कब तक झेला जा सकेगा। - हमें औरों के साथ इतनी शिष्टता और सभ्यता से पेश आना
चाहिए कि हमारा व्यवहार ही हमारी लोकप्रियता का राज़
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