Book Title: Agam 31 Chulika 01 Nandi Sutra Nandi Terapanth
Author(s): Tulsi Acharya, Mahapragna Acharya
Publisher: Jain Vishva Bharati
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पाचवां प्रकरण द्वादशांग विवरण
मूल पाठ
संस्कृत छाया
हिन्दी अनुवाद
७४. से कितं अंगबाहिरं? अंगबाहिरं अथ कि तद् अंगबाह्यम् ?
दुविहं पण्णत्तं, तं जहा-आवस्सयं । अंगबाह्यं द्विविधं प्रज्ञप्तं, तद्यथा-- च, आवस्सयवइरित्तं च ।। आवश्यकञ्च, आवश्यकव्यति
रिक्तञ्च ।
७४. वह अंगबाह्य क्या है ?
अंगबाह्य दो प्रकार का प्रज्ञप्त है, जैसेआवश्यक और आवश्यकव्यतिरिक्त ।
७५. से कि तं आवस्सयं? आवस्सय ___ अथ किं तद् आवश्यकम् ?
छव्विहं पण्णतं, तं जहा- आवश्यकं षड्विधं प्रज्ञप्तं, तद्यथा--- सामाइयं, चउवीसत्थओ, वंदणयं, सामायिकं, चतुविशस्तवः, वन्दनकं, पडिक्कमणं, काउस्सग्गो, पच्च- प्रतिक्रमणं, कायोत्सर्गः प्रत्याख्यानम् । क्खाणं । सेत्तं आवस्सयं ॥ तदेतद् आवश्यकम् ।
७५. वह आवश्यक क्या है ?
आवश्यक छह प्रकार का प्रज्ञप्त है, जैसे१. सामायिक २. चतुर्विशस्तव ३. वन्दना ४. प्रतिक्रमण ५. कायोत्सर्ग ६. प्रत्याख्यान ।' वह आवश्यक है।
७६. से कि तं आवस्सयवइरित्त ? अथ किं तद् आवश्यकव्यति- ७६. वह आवश्यकव्यतिरिक्त क्या है ?
आवस्सयवइरित्तं दुविहं पण्णत्तं, तं रिक्तम् ? आवश्यकव्यतिरिक्तं आवश्यकव्यतिरिक्त दो प्रकार का प्रज्ञप्त है, जहा-कालियं च, उक्कालियं द्विविधं प्रज्ञप्तं, तद्यथा-कालिकञ्च,
जैसे-कालिक और उत्कालिक । च॥
उत्कालिकञ्च।
७७.से कि तं उक्कालियं ? अथ किं तद् उत्कालिकम् ?
उक्कालियं अणेगविहं पण्णत्तं, तं उत्कालिकम् अनेकविधं प्रज्ञप्तं, तद्यथा जहा-१. दसवेयालियं २. कप्पि- __-१. दशवकालिकं २. कल्पिकायाकप्पियं ३. चुल्लकप्पसुर्य ४. कल्पिकं ३.क्षुल्लकल्पश्रुतं ४.महाकल्पमहाकप्पसुयं ५. ओवाइयं ६. श्रतम ५. औपपातिकं ६. राजप्रसेनिक रायपसेणि (णइ) यं ७. जीवा- ७. जीवाभिगमः (जीवाजीवाभिगमः?) भिगमो (जीवाजीवाभिगमे ?) ८. प्रज्ञापना ९. महाप्रज्ञापना ८. पण्णवणा ९. महापण्णवणा १०. प्रमादाप्रमादं ११. नन्दी १०. पमायप्पमायं ११. नंदी १२. १२. अनुयोगद्वाराणि १३. देवेन्द्रअणुओगदाराइं १३. देविदत्थओ स्तवः १४. तन्दुलवैचारिकं १५. चन्द्र१४. तंदुलवेयालियं १५. चंदग- कवेध्यक: १६. सूरप्रज्ञप्तिः १७.पौरुषीविज्झयं १६. सूरपण्णत्ती १७. मंडलं १८. मंडलप्रवेशः १९. विद्यापोरिसिमंडलं १८. मंडलपवेसो चरणविनिश्चयः २०. गणिविद्या १६. विज्जाचरणविणिच्छओ २०. २१. ध्यानविभक्तिः २२. मरणगणिविज्जा २१. झाणविभत्ती विभक्तिः २३. आत्मविशोधिः २२. मरणविभत्ती २३. आयवि- २४. वीतरागश्रुतं २५. संलेखनाश्रुतं सोही २४. वीयरागसुयं २५. २६. विहारकल्पः २७. धरणविधिः संलेहणासुयं २६. विहारकप्पो २८. आतुरप्रत्याख्यानं २९. महा२७. चरणविही २८. आउरपच्च- प्रत्याख्यानम् । तदेतद् उत्कालिकम् ।
७७. वह उत्कालिक क्या है ?
उत्कालिक अनेक प्रकार का प्रज्ञप्त है, जैसे१. दशवकालिक २. कल्पिकाकल्पिक ३. क्षुल्लककल्पश्रुत ४. महाकल्पश्रुत ५. औपपातिक ६. राजप्रसेनिक ७. जीवाभिगम (जीवाजीवाभिगम ?) ८. प्रज्ञापना ९. महाप्रज्ञापना १०. प्रमादाप्रमाद ११. नन्दी १२. अनुयोगद्वार १३. देवेन्द्रस्तव १४. तन्दुलवैचारिक १५. चंद्रकवेध्यक १६. सूर्यप्रज्ञप्ति १७. पौरुषीमण्डल १८. मण्डलप्रवेश १९. विद्याचरणविनिश्चय २०. गणिविद्या २१. ध्यानविभक्ति २२. मरणविभिक्त २३. आत्मविशोधि २४. वीतरागश्रुत २५. संलेखनाश्रुत २६. विहारकल्प २७. चरणविधि २८. आतुरप्रत्याख्यान २९. महाप्रत्याख्यान । वह उत्कालिक है।
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