Book Title: Uvangsuttani Part 04 - Ovayiam Raipaseniyam Jivajivabhigame
Author(s): Tulsi Acharya, Mahapragna Acharya
Publisher: Jain Vishva Bharati

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Page 722
________________ तियाह-तिसालग तियाह [ यह ] जी ३८६,११८,११६ तिरिक्ख [ तिर्यच् ] जी० ११५१, १२३, २०२५,६४, १२२; ६।१ तिरिक्ख जोणि [ तिर्यग्योनि ] ओ०७४ १, ३ जी० २१२,३,६,१०,२१ से २४,४६,६८,६६, ७२,१४२, १४५, १४६, १४६, १५१ तिरिक्खजोणिणी [ तिर्यग्योनिकी ] ओ० ७१. जी० ६ १, ४, ६, १२, ६।२०६,२१२,२१८.२२२ तिरिक्खजोणिय [ तिर्यग्योनिक ] अं० ७१,७३, १५६. जी० ११५१,५४, ५५५६. ६१, ६१, ६७, ८,१०१ से १०३, ११६,११७,११६,१२५; २१७५,७६, ८२, ८३,८८,६६,६६, १०१ से १०५, १०७ से १११,११३, ११६, १२२, ११८, १२६, १३८,१३६,१३८,१४२, १४५, १४६, १४६, १५१; ३ १,१२१,१३० से १४७, १५५, १५६,१६१ से १६३,१६६,११३२, ११३४, ११३७,११३८; ६/३, ८, १० से १२; ७११, ५, ६, १०, १५, १६, २० से २३; ६।१५६,२०६, २११, २१७, २२०, २२१, _२२५,२२६,२३१,२३२,२३५, २३६,२४३, से _२४५,२५०,२५१,२५३,२५५, २६७,२७०, २७१, २७६,२८०,२८६, २८७, २८६,२६३ तिरिक्ख जोणियत्त [ तिर्यग्योनिकत्व ] ओ० ७३. जो० ३ ११३४ ११११; तिरियक्खेवण | तिर्यक्क्षेपण ] ओ० १८० तिरियलोय [ तिर्यग्लोक ] जी० ३ २५६ तिरियवाय [तिर्यग्दात ] जी० ११८१ तिरोड [ किरीट ] ओ० ५१ तिरुव [ त्रिरूप ] जी० २।१५१ तिल [ तिल ] जी० १।७२; ३।६२१ तिलकरयण [ तिलकरत्न ] जी० ३।३०७ तिलग [ तिलक ] जी० ३।५६३,६३१ तिलगरयण [ तिलकरत्न ] रा० १३०,१३७. जी० ३।३०० Jain Education International तिलपप्पाडिया [तिलपर्पटिका ] जी० १।७२।३ तिलय [ तिलक ] ओ० ६ से ११. रा० ६६,७०. जी० ११७२; ३।३८८ से ३६०,५८३,७७५/२ तिलागणि [ तिलाग्नि] जी० ३।११८ तिवs [ त्रिपदी ] रा० २८१ तिवति [ त्रिपदी ] जी० ३।४४७ ६४५ तिल [ त्रिवलि ] ओ० १५. रा० ६७२. जी० ३।५६७ तिवासपरियाय [त्रिवर्षपर्याय ] ओ० २३ तिविध [ त्रिविध ] जी० २।१०४,१०६, १५१ ; ३।३८, १४८, १४९,१५३, १६४,२१५, ८३६; ५।५७ ६ ११२ तिरिय [तर्यच् ] ओ० ४४, ४६. रा० १०,१२,५६, १२६,१३२,२७६. जी० १/४५, ७६८७,६६, १०१,१३६; ३।१२६२, २५७, ३०२, ३५१, ४४५,६३८,७०१,७१०, ७३६, ७४७, ७६१,७६४, ७६८,७६६,८१४,८३८।१२,६४०, ६४४,१००६, तिव्वोभास | तीव्रावभास ] ओ० ४. रा० १७०, १५८ ७०३. जी० ३।२७३ तिविह् [त्रिविध] ओ० ३३,३७,६९,७०,७८. रा० ७६. जी० १११०, १२, ७५,६६, ११७, ११६,१२६,१३३,१३६, २१ से ३,८,११, ७५ से ७७,६६,१५१; ३।३७,७८, १३७, १६१.१०७१ ६२३,३२,६७,६६, ७५, ८८, ६५,१०१, १०६,१६४,२०२ तिव्व [ तीव्र ] ओ० ४,४६, ६६. रा० १७०, ७०३, ७६५. जी० ३०११०,२७३,६०८,६११ तिब्वच्छाय [ तीव्रच्छाय ] ओ० ४. रा० १७०, ७०३ जी० ३।२७३ तिसत्तक्खुत्तो [त्रिसप्तकृत्वस् ] ओ० १७०. जी० ३१८६ तिसर [त्रिसर ] ओ० ५२, ६३. रा० ६८७ से ६८६ तिसरय [रिक ] ओ०१०८, १३१ तिसालग त्रिशालक ] जी० ३२५६४ For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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