Book Title: Uttaradhyayan Sutram
Author(s): R D Wadekar, N V Vaidya
Publisher: Fergussion College
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नमिपस्वज्जा
[-१:५१ एयमढे निसामित्ता हेऊकारणचोइओ। तओ नर्मि रायरिसिं देविन्दो इणमब्बवी ॥ ३७॥ जइत्ता विउले जन्ने भोइत्ता समणमाहणे। दच्चा भोच्चा य जिट्ठा य तओ गच्छसि खत्तिया ॥ ३८॥ एयमढें निसामित्ता हेऊकारणचोइओ। तओ नमी रायरिसी देविन्दं इणमब्बवी ॥३९॥ जो सहस्सं सहस्साणं मासे मासे गवं दए । तस्सावि संजमो सेओ अदिन्तस्स वि किंचण ॥४०॥ एयमढे निसामित्ता हेऊकारणचोइओ। तओ नाम रायरिसिं देविन्दो इणमब्बवी ॥४१॥ घोरासमं चइत्ताणं अचं पत्थेसि आसमं। इहेव पोसहरओ भवाहि मणुयाहिवा ॥४२॥ एयम, निसामित्ता हेऊकारणचोइओ। तओ नमी रायरिसी देविन्दं इणमब्बवी ॥४३॥ मासे मासे तु जो बालो कुसग्गेण तु मुंजए। न सो सुक्खायधम्मस्स कलं अग्घइ सोलसिं ॥४॥ एयम निसामित्ता हेऊकारणचोहओ। तओ नर्मि रायरिसिं देविन्दो इणमब्बवी ॥४५॥ हिरण्णं सुवण्णं मणिमुत्तं कंसं दूसं च वाहणं । कोसं वड्डावात्ताणं तओ गच्छसि खत्तिया ॥४६॥ एयमटुं निसामित्ता हेऊकारणचोइओ।
तओ नमी रायरिसी देविन्दं इणमब्बवी॥४७॥ सुवण्णरुप्पस्स उ पव्वया भवे सिया हु केलाससमा असंखया। नरस्स लुद्धस्स न तेहिं किंचि इच्छा उ आगाससमा अणन्तिया ॥४८॥
पुढवी साली जवा चेव हिरणं पसुभिस्सह। पडिपुण्णं नालमेगस्स इइ विज्जा तवं चरे॥४९॥ एयमदं निसामित्ता हेऊकारणचोइओ। तओ नामि रायरिसिं देविन्दो इणमब्बवी ॥५० ।। अच्छेरयमन्भुदए भोए चयसि पत्थिवा। असन्ते कामे पत्थेसि संकप्पेण विहम्मसि ॥५१॥

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