Book Title: Uttaradhyayan Sutram
Author(s): R D Wadekar, N V Vaidya
Publisher: Fergussion College

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Page 124
________________ १११ जीवा जीवविभत्ती अन्धिया पोत्तिया चेव मच्छिया मसगा तहा । भमरे कीडपयेंगे य टिंकुणे कुंकुणे तहा ॥ १४६ ॥ कुक्कुडे भिंगिरीडी य नन्दावत्ते य विंछिए । टोले भिंगारी य विरली अच्छिवेहए ॥ १४७ ॥ अच्छिले माह अच्छिरोडए विचित्ते चित्तपत्तए । ओहिंजलिया जलकारी य नीया तन्तवयाइया ॥ १४८ ॥ इय चउरिन्दिया एए ऽणेगहा एवमायओ । लोगेगदेसे ते सव्वे न सव्वत्थ वियाहिया ॥ १४९ ॥ संत पप्पऽणाईया अपज्जवसिया विय । ठि पडुच्च साईया सपज्जवसिया विय ॥ १५० ॥ [ - ३६.१६ छच्चेव य मासा उ उक्कोसेण वियाहिया । चउरिन्दिय - आउठिई अन्तोमुहुत्तं जहन्निया ॥ १५१ ॥ संखिज्जकालमुक्कोसं अन्तो मुहुत्तं जहन्नयं । चउरिन्दिय - कायठिई तं कार्यं तु अमुचओ ॥ १५२ ॥ अणन्तकालमुक्कोसं अन्तो मुहुत्तं जहन्नयं । चाउरिन्दियजीवाणं अन्तरेयं वियाहियं ॥ १५३ ॥ एएसिं वण्णओ चैव गन्धओ रसफासओ । संठाणदेसओ वावि विहाणाई सहस्ससो ॥ १५४ ॥ पंचिन्दिया उ जे जीवा चउव्विहा ते वियाहिया । नेरइयतिरिक्खा य मणुया देवा य आहिया ॥ १५५ ॥ नेरइया सत्तविहा पुढवीसु सत्तसू भवे । रयणाभसक्कराभा वालुयाभा य आहिया ॥ १५६ ॥ पंकाभा धूमाभा तमा तमतमा तहा । इइ नेरइया एए सत्तहा परिकित्तिया ॥ १५७ ॥ लोगस्स एगदेसम्मि ते सव्वे उ वियाहिया । एत्तो कालविभागं तु वोच्छं तेसिं चउव्विहं ॥ १५८ ॥ संत पप्पडणाईया अपज्जवसिया वि य ।. ठि पडुन्छ साईया सपज्जवसिया विय ॥ १५९ ॥ सागरोवममेगं तु उक्कोसेण वियाहिया । पढमाए जहन्नेणं दसवाससहस्सिया ॥ १६० ॥

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