Book Title: Nandanvan Kalpataru 2014 04 SrNo 32
Author(s): Kirtitrai
Publisher: Jain Granth Prakashan Samiti
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श्रीआदिजिनस्तुत्यष्टकम्
आ.अजितयशःसूरि*
विद्यादिमण्डनमुनीशकृतप्रतिष्ठं कर्माख्यश्रेष्ठिरचितं शुभबिम्बज्येष्ठम् । उच्छ्वाससप्तकप्रसिद्धप्रभावपुष्टं सौभाग्यवारिनिधिमादिजिनं नुवे तम् ॥ १ ॥ वेलायते लवणिमा ननु देहरेखा वर्तायते च नयने शफरायमाने । यरिंमश्च भव्यजनभावनदीप्रयागाः सौभाग्यवारिनिधिमादिजिनं नुवे तम् ॥२॥
* आ.श्रीविजयलब्धिसूरिसमुदायवर्ती ।
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