Book Title: Nandanvan Kalpataru 2006 00 SrNo 17
Author(s): Kirtitrai
Publisher: Jain Granth Prakashan Samiti
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- बालगीतम्
राजेशकुमार मिश्रः
अध्यापक:-राजकीयइण्टर कॉलिज . नागराजाधारः (बमुण्ड) पत्रालयः-कखवाड़ी, वाया-चम्बा (टिहरीगढवाल:) उत्तराञ्चलम् - २४९१४५
(१)
SIL बालो रोदिति माता चुम्बति,
पिता लालयति नित्यम् ।। स काष्ठघोटकं शीघ्रमारोहति,
ताडयति तुरगमिव भृत्यम् ॥१॥
(२) खादति बालो रोटिकां मुखे, प्राङ्गणे चलन् पतति । पुनरुत्तिष्ठति चलति पुनः सः,
पुनः स्वकक्षं प्रविशति ॥२॥
अजिरे पतितरोटिकां काकः, दृष्ट्वा वृक्षादवतरति । चञ्चौ कृत्वा तां रोटिकाम्,
वृक्षं प्रति स उत्पतति ।।३।।
(४)
गृहीतरोटिकं काकं पश्यन्, बालो रोदिति वारं वारम् । श्रुत्वा रोदनमजिरे माता,
परिचुम्बति तमपारम् ॥४॥
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