Book Title: Agam Sudha Sindhu Part 08
Author(s): Jinendravijay Gani
Publisher: Harshpushpamrut Jain Granthmala

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Page 95
________________ ] [दागनुवाति अष्टमी विमान पासायपगइवेइयारम्मा / वेरुलिय-थूभियागा रयणामय-दामलंकारा / / 264 // संखंक-सन्निकासा सव्वे दगरयतुसार-सिरिवराणा / नव य सए उबिद्धा पासाया तेसु कप्पेसु // 265 // बावीसं जोयणसयाइं पुढवीण तासिं होइ बाहुल्लं / गेविजविमाणेसु रयणविचित्ता उ सा पुढवी // 266 // तत्थ विमाणा बहुविहा पासायपगइवेइयारम्मा / वेरुलियथूभियागा रयणामयदामलंकारा // 267 // संखंकसन्निकासा सब्वे दगरयतुसारसविराणा / दस य सए उविद्धा पासाया ते विरायति // 268 // एगवीस जोयणसयाई पुढवीणं तासिं होइ बाहल्लं / पंचसु अणुत्तरेसु रयणविचित्ता य सा पुढवी // 266 / / तत्थं विमाणा बहुविहा पासायपगइवेइयारम्मा। वेरुलियथूभियागा रयणामयदामलंकारा // 270 // संखंकसनिकासा सब्बे दगरयतुसारसरिवराणा / इकारस उविद्धा पासाया ते विरायंति // 271 // तत्थासणा बहुविहा सयणिजा मणिभत्तिसयविचित्ता / विरइयवित्थडभू(दू)सा य रयणामयदामलंकारा // 272 // सव्वट्ठविमाणस्स उ सव्वुवरिल्लाउ थूभियंतायो। बारसहिं जोयणेहिं इसिफभारा तो पुढवी // 273 ॥निम्मलदगरयवराणा तुसारगोखीर-फेणसविराणा / भणिया उ जिणवरेहिं उत्ताणय-छत्तसंठाणा // 274 // पणयालीसं पायाम-वित्थडा होइ सयसहस्साई / तं तिउणं सविसेसं परीरो होइ बोद्धब्बो // 275 // एगा जोयणकोडी बायालीसं च सयसहस्लाई / तीसं चे सहस्सा दो य सया अउणपन्नासा // 276 // खित्तद्धय-विच्छिन्ना अट्ठव य जोयणाणि बाहल्लं / परिहायमाणी चरिमंते मच्छियपत्ताउ तणुययरी // 277 // संखंकसन्निकासा नामेण सुदंसणा अमोहा य / श्रज्जुण-सुवरणयमई उत्ताणय-छत्तसंठाणा // 278 // ईसीपभाराए सीयाए जोयणंमि लोगंतो। तस्सुवरिमम्मि भाए सोलसमे सिद्धमो. गाढे // 271 // कहिं पडिहया सिद्रा ?, कहिं सिद्धा पइट्ठिया ? / कहिं बोंदि चइत्ताणं, कत्थ गंतूण सिझई ! // 280 // अलोए पडिहया सिद्धा,

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