Book Title: Vyavahar Ratnam Author(s): Bhanunath Publisher: Bhanunath View full book textPage 8
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir -CPIGH के गुरौ रिक्ता, शनी पूर्णातिनिन्दिता ॥ १५॥ अथ दग्धतिथिः ॥ चापे मीने द्वितीया च, चतुर्थों की वृषकुम्भयोः ॥ षष्टो मेषे कुलीराख्ये, कन्यायुग्मे तथोष्टमो ॥१६॥ दशमी वृश्चिके सिंह द्वादशो है मकरे तुले ॥ एतास्तु तिथयो दग्धाः शुभे कर्मणि वर्जिताः ॥ १७ ॥ अथ भद्राविचारः ॥ अ-. टम्यां पूर्णिमायाञ्च शुक्ले पूर्वदले स्मृता ॥ एकादश्याश्चतुर्थ्याश्च तथा भद्रा परे दले ॥ १८ ॥ कृष्णेन्त्याढ़े तृतीयायां दशम्यामपि संस्थिता ॥ सप्तम्याञ्च चतुर्दश्यां पूर्व भागे तथैव च ॥ १९॥ | महहिध्वंसिनी या च नित्यं दुःखप्रदायिनी ॥ सा भद्रा वर्जनीया स्यात्सर्वकार्ये सदा वुधैः ॥२०॥ क्रूरकाय्ये, खरोष्ट्रादेः क्रयादौ, समरेषु च ॥ भद्रा प्रशस्ता विज्ञ या सर्वथा देवचिंतकैः ॥२१॥ अथ , भद्रावासमाह ॥ आदावष्टघटी स्वर्गे ततः षोडश भूतले ॥ तदूई षट्च पाताले भद्रा त्रिंशद्घटीक्रमात् ॥ २२ ॥ खर्गे च लभते सौख्यं पाताले च धनागमम् ॥ मर्त्यलोके भवेञ्चिन्ता एवं भद्रा --DIOEDICI0 मल-5-06-06-05-foteo.cG 00 For Private and Personal Use OnlyPage Navigation
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