Book Title: Sramana 1997 01
Author(s): Ashok Kumar Singh
Publisher: Parshvanath Vidhyashram Varanasi

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Page 12
________________ तनाव : कारण एवं निवारण भावनात्मक तनाव (Emotional), पारिवारिक (Family), सामाजिक(Social), परिवर्तनात्मक (Change), रासायनिक (Chemical), कार्य का तनाव (Work), निर्णयात्मक (Decision), रूपान्तरित (Commuting), भय (Phobic), शारीरिक (Physical), बीमारी (Disease), वेदना (Pain), तथा वातावरण (Environmetal) सम्बन्धी तनाव। इस प्रकार हम देखते हैं कि सभी चिन्तकों ने तनाव के अलग-अलग प्रकार बताये हैं। संख्या की दृष्टि से समानता न होते हुए भी कुछ प्रकार एक दूसरे से मिलते जुलते हैं और कुछ बिल्कुल भिन्न हैं। तनाव-मुक्ति के उपाय उपर्युक्त वर्णित तनावों के कारणों एवं प्रकारों को दूर करके व्यक्ति तनाव से मुक्त हो सकता है, क्योंकि जब व्यक्ति ही तनाव रहित हो जायेगा तो परिवार, समाज व विश्व अपने आप तनाव मुक्त हो जायेगा। आचार्य तुलसी ने भी इस सन्दर्भ में कहा है कि२८ "सुधरे व्यक्ति समाज व्यक्ति से राष्ट्र स्वयं सुधरेगा। 'तुलसी' अणु का सिंहनाद, सारे जग में प्रसरेगा। मानवीय आचार-संहिता में अर्पित, तन-मन हो। संयममय जीवन हो।।" यहाँ पर कुछ तनाव-मुक्ति के उपायों का उल्लेख किया जा रहा है जो इस प्रकार हैंमनोवैज्ञानिक विधि द्वारा तनाव मुक्ति मनोवैज्ञानिकों ने तनाव कम करने के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दो प्रकार की विधियों का वर्णन किया है। कुछ मनोवैज्ञानिकों के अनुसार- तनाव कम करने की ये विधियाँ, व्यक्ति को अपने वातावरण से बहुत समय तक समायोजन करने या न करने के लिए उपयुक्त हो सकती हैं पर इनका उद्देश्य उसके कष्ट की भावना को सदैव कम करना है।२९ ये विधियाँ इस प्रकार हैं १. प्रत्यक्ष विधियाँ (Direct methods of Tension Reduction)- प्रत्यक्ष विधियों का प्रयोग विशेष रूप से समायोजन की किसी विशेष समस्या के स्थायी समाधान के लिए किया जाता है।३० ये निम्न हैं (I) बाधा का विनाश या निवारण (Destroying or Removing the Barrier)- इसके अन्तर्गत व्यक्ति उस बाधा का निवारण करता है जो उसके उद्देश्य Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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