Book Title: Vaidhyak Rasraj Mahodadhi Bhasha Part 01
Author(s): Bhagwandas Bhagat
Publisher: Khemraj Shrikrushnadas Shreshthi Mumbai
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(५२)
रसराज महोदधि ।
चावल से एक चावल तक ये दवा सर्व प्रकारके रोग को दूर करती है, अनोपान मिश्री, दूध, घी. अथ शिलाजीत शोधन.
त्रिफलाके रसमें एक दिन घोटै फिर एकदिन दूध में घोटै तौ शिलाजीत शुद्ध होय खुराक ६ मासे आधासेर दूधके साथ जो मनुष्य एक महीनासेवै तो शरीर पुष्ट होय वल होय बीर्य बढै अनोपान मुवाफिक सब रोग हरै शिलाजीतका गुण कुछ वर्णने योग्य नहीं. अथ मैनशिल शोधन
मैनशिल अगस्त्य के रस में घोटै अथवा अदरख के रसमें घोटै शुद्धहोय तो सब काम में बैपरै ( गुण) कडु - at farst stara कास आदि सब रोगोंको हरै. अथ रसकपूर मारनविधि.
एक तोला रसकपूर लेके बिजौरा नींबूके बीच में रखके मुलतानी मिट्टीसे कपडमिट करके सुखायके एक सेर बीना हुआ कंडा लेकर उसमें रखके फूँकिदे पीछे रस निकालके ताँबामें डाले तो पानी सोखन होय. अथ खपरिया शोधन
खपरिया लाल करिके सात बेर नींबू के रस में बुझावे तो शुद्ध होय और सब काममें आवै. अथ नीलाथोथा शोधन. सिर्का अथवा अचार में दो तोला नीलाथोथा को
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