Book Title: Surishwar aur Samrat Akbar
Author(s): Vidyavijay
Publisher: Vijaydharm Laxmi Mandir Agra

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Page 351
________________ सूरीश्वर और सम्राट् । उपर्युक्त चार प्रकारके मनुष्योंमेंसे चौथे प्रकारके मनुष्य यद्यपि बहुत ही थोड़े थे; परन्तु वे ऐसे थे कि, जो अकबरको वास्तविक खलीफा समझते थे | यह बातभी हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि, अकबर ने चारों प्रकारके लोगों की संख्या बढ़ानेमें कभी अपनी सत्ताका उपयोग नहीं किया था । इतना ही नहीं, यदि कोई उसके विचारोंका विरोध करता था तो उसकी दलीलें वह ध्यानपूर्वक सुनता था और शान्ति के साथ उनका उत्तर देता था । ३०८ उसने अपना धर्म फैलाने में बहुत ज्यादा शान्ति और सहनशीलता से काम लिया था । और उसके जीवन में तो उसके महत्त्वकी इतनी ख्याति हो गई थी कि, श्रद्धालु और भोले दिलके हिन्दु-मुसलमान उसकी मानता मानने लगे थे । कोई पुत्र - प्राप्ति के लिए, कोई 'धन प्राप्तिके लिए, कोई स्नेहीके संयोग के लिए और कोई शत्रुका दमन करने के लिए; किसी न किसी हेतुसे, लोग उसकी मानता मानते थे ! अबुल्फजल लिखता है कि, -- "Other Multitudes ask for lasting bliss, for an upright heart, for advice how best to act, for strength of body, for enlightenment, for the birth of a son, the reunion of friends, a long life, increase of wealth, elevation in rank, and many other things. His Majesty, who knows what is really good, gives satisfatory answers to every one, and applies remi- dies to their religious perplexities. Not a day passes but people bring cups of water to him, beseeching him to breathe upon it. "+ + Ain-i-Akbari, Vol 1, by H. Blochmanh M. A. P. 164. Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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