________________ REATRE द्वितीय अध्याय आरंभ के शासक रणराग (520-40) का पुत्र तथा जयसिंह का प्रपौत्र पुलकेशि प्रथम (540-66) अपनी योग्यता तथा बलबूते पर चालुक्य राजवंश का प्रतिष्ठापक बना। उसकी राजनीतिक दूरदर्शिता ने (543-44) बादामी की मज़बूत पहाडी को एक मजबूत कीलेबंदी में परिवर्तित करने की प्रेरणा दी और फिर उसने अपनी स्वतंत्रता घोषित की। पुलकेशि प्रथम के इस फैसले को इतिहासकारों ने उसकी प्रतिभा का उचित निर्णय कहकर प्रशंसा की है। कारण यह किला मलप्रभा नदी से पाँच किलोमीटर की दूरी पर सुरक्षा हेतु बनवाया गया था। इस स्थान का उसका चुनाव उचित ही था, जो उसके अधिपत्य का ही शुभ संकेत था। इस पहाडी के पूर्व में पाँच किलोमीटर आगे महाकूट तथा उसी दिशा में थोडा आगे नदी के पास प दकल्ल और आठ किलोमीटर नीचे की ओर ऐहोळे है। तत्कालीन मंदिर तथा उत्कीर्णित लेख चालुक्यों के अधिपत्य के साक्ष्य हैं। पुलकेशि प्रथम ने अपना विजयोत्सव मनाने के लिए अश्वमेध के साथ-साथ अन्य धार्मिक यज्ञ भी किए। तथ्यों को देखने से ऐसा लगता है कि पुलकेशि प्रथम और द्वितीय को रणविक्रम, रणपराक्रम, रणविक्रांत तथा रणरासिक आदि उपाधियों से नवाज़ा गया था। Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org