Book Title: Agam 13 Upang 02 Rajprashniya Sutra Raipaseniyam Terapanth
Author(s): Tulsi Acharya, Mahapragna Acharya
Publisher: Jain Vishva Bharati

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Page 266
________________ आमरणंतदोस-आयावणभूमि आमरणंतदोस आमरणान्तदोष] ओ० ४३ आमलकप्पा [आमलकल्पा] रा० १,२,८ से १०, आमलग [आमलक] रा० ७७१ जी ११७२ आमलय [आमलक] रा० ७७० आमेल [आपीड] ओ० ४६ रा० ६९,७० आमेलग [आपीडक ] रा० १३३ जी० ३३०३, ५६७ आमेलय {आपीडक ] ओ० ५७ आमोट [आमोट] रा० ७७ आमोडिज्जत [आमोट्यमान] रा० ७७ आमोसहिपत्त [आमाँषधिप्राप्त ] ओ० २४ आय [आत्मन् ] जी० ११५० आयंक [आतङ्क] ओ० ४३,११७. रा० १२,७५८, ७५६,७६६. जी० ३३११८ आयंत [आवान्त ] ओ० २१,५४. रा० २७७, २८८,७६५,८०२ जी० ३.४४३ आयंब [आताम्र ओ० १६ आयंबिलय [आचाम्लक ] ओ० ३५ आयंबिलवनमाण आचाम्लवर्धमान] ओ० २४,३५ आयंस [आदर्श] रा० १४६,२५८,२७६, जी० ३१५९७ आयंसग [आदर्शक] जी० ३ ३२२,४१६,४४५ आयंसघरग [आदर्शगृहक रा० १८२,१८३. जी० ३.२६४ आयंसघरय आदर्शगृहक जी० ३।२६५ आयसमंडल [आदर्शमण्डल] रा० २४ जी० ३३२७७ आयंसमुह [आदर्श मुख जी० ३३२१६,२२६।४ आयंसय आदर्शक] ओ० १३ आयत [आयत] ओ० १६,४७. रा० १२४. जी० २५३१५७७,५९६,६३६,१०३६ आयपच्चइय | आत्मप्रत्यायिक, प्रात्ययिक] रा० ७५४,७५६ आयय [आयत] जी० ३.२२,५६७ आयर [आदर] जो० ३।४४६ आयरक्ख [आत्मरक्ष रा०७,४४,५६,५८,२८०, २८२,२८६,२६१,६५७,६६४. जी० ३१३४५, ३५०,३५६,४४६,४४८,५५७,५६२,५६३, ६३७,६५६,६८०,७००,१०२५,१०३८ आयरिय [आचार्य] ओ० ४०,४१,१५५. रा० ७७६ आयव [आतप] ओ० ८६ आयवस [आतपत्र] ओ०६४. रा० ५०,५१,२५५ आयवाभा [आतपाम ] जी० ३.१०२६ आयाए [आदाय] रा० ७७४ आयाण [आदान] ओ०१६. जी० ३१५९६ आयाणभंडमत्तणिक्खेवणासमिय [प्रादानभाण्डामत्र निक्षेपणासमित ओ० २७,१६४ आयाणभंडमत्तनिक्खेवणासमिय आदानभाण्डामत्र निक्षेपणासमित] ओ० १५२. रा० ८१३ आयाम [आयाम] ओ० १३,१७०,१६२. रा० ३६,१२४,१२६,१२८,१३७,१७०,१८८,२०६, २११,२१८,२२१,२२२,२२४,२२६,२२७, २३०,२३३,२३८,२४२,२४४,२४६,२५१ से २५३,२६१,२६२,२७२. जी० ३.५१८१,८२, ८६,२१७,२२२,२२६,२६०,३०७,३१०,३५१, ३५३,३५५,३५८,३५६,३६१,३६४,३६५, ३६८ से ३७२,३७४,३७६,३७७,३८०,३८१, ३८३,३८५,३८६,३६२,३९५,४००,४०४, ४०६,४०८,४१२ से ४१४,४२२,४२५,४२७, ४३७,५७७,५६७,६३२,६३४,६३६,६४२, ६४४६४६,६४६,६५२,६५५,६६८,६७१,६७३ से ६७५,६७६,६८३,७३६ ७३७,७५४,७५८, ७६२,७६५,७६८,८३५,८५२,८८४,८८७, ८६१,८६३ से ८९५,८६७,८६६,६०१,९०६, १०७,६१०,१०१० से १०१४,१०७३,१०७४ आयामसित्यभोइ आयामशिक्थभोजिन् ओ० ३५ आयारषर आचारधर ] ओ० ४५ आयारवंत [आकारवत् ओ० १ आयावणभूमि [आतापनभूमि] ओ० ११६ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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