Book Title: Agam 13 Upang 02 Rajprashniya Sutra Raipaseniyam Terapanth
Author(s): Tulsi Acharya, Mahapragna Acharya
Publisher: Jain Vishva Bharati
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चउद्दसी-चंददीव
चउद्दसी चतुर्दशी] ओ० १२०
१०३,१०५,११३,१२१,१२५,१३५; २।६, चरहसभत्त [चतुर्दशभक्त] ओ० ३२
१०,१५,७८ ; ३२३०,४५१,४५२,५८८, चउप्पई [चतुष्पदी जी० २१५,६
११३८, ६।११३,१२१,१३१,१४१,१४७ चउप्पद [चतुष्पद] जी० २।११३,१२२, ३।१४२ चउसट्टि [चतुष्पष्टि ] ओ० ६२. जी० ३६११ चउप्पय | चतुष्पद] रा० ६७१,७०३,७१८, चउट्टिया चतुष्पष्टिका | रा० ७७२
जी० ११०१ से १०३,१२०,१२१; २३१,२३, चउसालग [चतुःशालक] जी० ३५९४
५१, ३८८,१४१,१४२,१६३,७२१ चउहा [चतुर्धा] रा० ७६४,७६५ चउप्पाइया | चतुष्पादिका] जी० २६
चंकमंत [चक्रम्यमाण] ओ०५७ चउम्भाग (चतुर्भाग | जी० ३१२४७,२५०,२५६, चंगेरी [चङ्गेरी रा० १५६,२५८.२७९. १०२७ से १०३५
जी० ३५३२६,३५५,४१६,४४५ चउभाग [चतुर्भाग] जी० २।४० से ४३; ३।२४७ ।। चंचल [चञ्चल | ओ० २३,४६,४६ चउमासिय | चातुर्मासिक | ओ० ३२
चंडचण्ट ] ओ० ४६. रा० १०,१२,५६,२७६, चउम्मुह [चतुर्मुख ! ओ० ५२,५५. रा० ६५४, ६७१,७६५. जी० ३३८६,११०,१७६,१७, ६५५,६८७,७१२. जी० ३१५५४
१८०,१८२,४४५ चउरंगल [चतुरङ्गुल रा० ५६. जी० ३२५६६, चंडा | चण्डा जी० ३१२३५,२३९,२४१,१०४०, ८३८११७
१०४४ चउरत [चतुरंत) ओ० ४६
चंद [चन्द्र | ओ० १६,२७,५०,६४६८,१७०. चउरंस [चतुरस्र] जी० ११५, ३१२२,७७,७८,
रा० २६,७०,१३३,२८२,८०२,८०३,८१३. ३५२,५६४,५६७,१०७१
जी० १११८, ३२५८,२८२,३०३,४४८,५६६, चउरकप्प | चतुष्कल्प जी० ३.५६२
५६७,७०३,७२२,७६२ से ७६४,७६६,७६८, चउरासीइ | चतुरशीति | ओ० ६३. जी० १:१०३
७७०,७७२,७७४ से ७७६,७७८,८०६,८२०, चउरासीति [ चतुरशीति | जी० ३।१६
८३०,८३४,८३७,८३८४,७,१०१५ से २३, चउरिदिय चतुरिन्द्रिय ] जी० ११८३,६०; ।
२५ से २७.२६,३२,८४५,८७३,८७६,८७६, २६१०१,१०३,११२,१२१,१३६,१४६,१४६;
६२६,६३७.६५३,१०१७,१०२०,१०२१, ३।१३०,१३६,१६७,४११,४,८,१४,१८ से
१०२३ से १०२६,११२२ २०,२४,२५, ८१,३,५,६।१,३,५,७,१६७,
चंदण | चन्दन । ओ० ६.१०,२६,४७,५२,६३, १६६,२२१,२२३,२२६,२३१,२५६,२५६,
११०,१३३. रा० ३०,१३१,१४७,१४८, २६४,२६६
१७३,२५८,२७६,२८०,२८५,२६१,२६३ से चउविसाण [चतुर्विषाण रा० १६२.
२६८,३००,३०५,३१२,३५१,३५५,५६४, जी. ३३३३५
६८७ से ६८६. जी० ३।२८३,२८५,३०१, चउवीस [चतुर्विंशति ] ओ० ३३. जी० ३।२३६ ४४५,४५१,४५७ से ४६२,४६५,४७०,४७७, चाउम्विध | चतुर्विध] जी० ३।१,४४७
५१६,५२०,२४७,५५४,५८३,८३८।२६ चउठिवह । चतुर्विध ] ओ० २८,३७,४५,६३,११७. चंदत्यमणपविभत्ति चन्द्रास्तमन प्रविभक्ति |
रा० ११४ से ११७, २८१,२८५,२८६,६७५, रा० ८६ ७४०,७४६,७६६. जी० ११५,१०,८३,६१, चंददीक [चन्द्रद्वीप] जी० ३१७६२,७६३,७६६,
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