Book Title: Agam 13 Upang 02 Rajprashniya Sutra Raipaseniyam Terapanth
Author(s): Tulsi Acharya, Mahapragna Acharya
Publisher: Jain Vishva Bharati
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देउब्वियसमुग्घाय-वेराणुबंध
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वेउब्वियसमुग्धाय [ वैक्रिपसमुद्धात | रा० १०,१२, वेदिया | वेदिका | जी० ३।२६६,२८८,३००,३७२,
१८,६५,२७६. जी० ११८२, ३३१०८,४४५ ७६५,७६६ से ७७५,७७८ वेउब्वियसरीर वैक्रियशरीर ओ० १७६. वेवियापुडंतर | वेदिकापुटान्तर | जी० ३१२६६ जा०६।१७०
वेदियाबाहा | वेदिकाबाहु | जी० ३१२६६ वेउवि सरीरि वैक्रियशरीरिन् जी० ६ १७०, वेदेमाण | वेदयत् | ओ० ८६ रा० ७५१ १७७,१८१
वेमाणिणो [वैमानिकी] जी० २.७१,७२,१४८, वेंट [वृन्त ] जी० ३।३८७,६७२ वेग वेग] ओ० ४६,५७
वेमाणिय वैमानिक ओ० ५०. रा० ७,११,१५ वेच्च व्युत, व्यूत | रा० ३७.२४५. जी. ३.३११, से १७,५५,५६,५८,५६,१८५,१८७.२७६, ४०७
२८६,२६१.६५७. जी० १११३५, २०१५,१६, वेजयंत [ वैजयन्त ) ओ० १६२. जी० ३.१८१, ४५,४६,७१,७२,६५,६६,१४८,१४६; १२३०, २६६,५६६,५६७,७०७,७११,७९६,८१३,
६१७,१०३८
वेय विद} ओ० २५. रा० ६८६,७७१. वेजयंती | वैजयन्ती] ओ०६४, ०० ५०,५२,५६,
जी० २१४,११६; २११५१, ६६६ १३७,२३१,२४७. जी० ३।३०७,३६३,६१६,
1वेय वि.+ एज् |– वेथ इ. रा० ७७१.--वेयंति.
जी० ३१७२६ १०२६
वेयंत (व्ये जमान ] रा० ७७१ वेडंतिय (पाय) (दे० ओ० १०५,१२८ वेडंतिय (बंधण) | दे० ] ओ० १०६,१२६
वेषण | वेतन रा० ७८७,७८८ वेढ | वेष्ट } २०० ७६७
वेयण [दे० विक्रय | रा० ७७४ वेढणग | वेष्टनक] जी० ३.५६३
वेषणा | वेदना | ओ० १७,४६,७१,७४.१६५.
रा० ७५१,७६५. जी० ११८६, ३७७,११०, वेढित्ता [ष्टित्वः रा० ७६७
१२७१४,५,१२८।१,१२६७ वेढिमवेष्टिम | ओ०१०६,१३२. रा. २८५.
वेयणासमुग्धा ! वेदनाम मुद्घात ) जी० ११२३,८२. जी० ३१४५१,५६१ वेणतिया । बनयिकी स० ६७५
वेषणिज्ज [वेदनीय ] ओ० ८६,१७१ वेणु वेणु जी० ३।५८८
वेयणीय [ वेदनीय | ओ० ४४ वेणुदेव (वेगुदेव जी० ३।२५०
वेदिय । विदिक औ० २ वेणुसलाइ | देणुशलाकिको ] रा० १२
वेयालिया वेवालिकी| रा० १७३. वेव | वेद] ओ० ६७. जो० २११५१ ।
जी० ३:२८५ वेद | वेदय् ] - वेदति. जी० ३१११२
वेयावच्च [वैयावृत्य] ओ० ३८,४१ वेदणा | वेदना] जी० ३।१११ से ११५,११७,
वेर [वै] जी० ३.६२७ १२८
वेरग्ग | वैराग्य ] ओ० ४६,७४१५ वेदणासमुग्धात [वदनास मुद्घात ] जी० ३।१११२. वेरमण [विरमण } आ० ७६,७७,७६ से ८१,
१२०,१४०,१५७. ०६६३,६९८,७१७, वेदणासमुग्धाव वेदनास मुद्घात जी० ३।१०८, ७५२,७८७,७८६
वेराणुबंध वैराणुबन्ध] जी० ३२६१२
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