Book Title: Agam 13 Upang 02 Rajprashniya Sutra Raipaseniyam Terapanth
Author(s): Tulsi Acharya, Mahapragna Acharya
Publisher: Jain Vishva Bharati

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Page 343
________________ ६५० afar [ द्वितीय] ओ० ६३ गमंच [दकमञ्चक ] रा० १८० जी० ३३२६२ वगमंचय [ दकमञ्चक ] रा० १८१ मंडय [दकमण्डप ] रा० १८१ दगमंडव [दकमण्डप ] रा० १५० दगमंडवग] [ दकगण्डपक] जी० ३।२६२ गमट्टिया [ मृत्तिका ] ओ० १४६. रा० ८०६ वगमालग [ दकमालक ] रा० १८० जी० ३।२६२ गमालय [दकमालक ] रा० १८१ aree | दरजस् ] ओ० १६,४६,४७, १६४. ० ३८,१६०,२२२,२५६. जी० ३।२६२,३१२, ३३३,३८१, ४१७,५७६,५६७,८९४ गवार [दकवार ] जी० ३।११६ crates [ दकवारक ] जी० ३।५८७ दगवारग [ दकवारक ] रा० १२ दत्तम [दकसप्तम] ०६३ arसीम [ दकसीम ] जी० ३२७३५,७४५ से ७४७ दच्चा [ दत्वा ] रा० ६६७ द [ दग्ध ] ओ० १८४ [ दृढ] ओ० १,१४२, १४४. रा० १२,७५८, ७५६,८००, ८०२. जी० ३।११८ ढपण [ दृढप्रतिज्ञ ] ओ० १४४ से १५०, १५४. रा० ८०२, ८०५ से ८११,८१६ ढपतिरण [ दृढप्रतिज्ञ ] रा०८०४ ढरहा [ दृढरथा ] जी० ३।२५४ दढाउ | दृढायुष्] जी० ३।११७ age | दे० दर्दर ] ओ० २,५२, ५५. रा० ३२, १५६, २७६,२८१,२८५. जी० ३ ३३२,३७२,४४५, ४४७, ४५१,५६४ वहग [ दे० दर्दरक ] रा० ७७. बी० ३।५८७ दर [ दे० दर्दरक ] ० २८१. जी० ३०७८, ४४७ हरिगा | दे० दर्दरिका ] रा० ७७ ददुर [ दर्दर ] ओ० ५१. जी० ३।१०३८ af [दधि ] जी० ३१५६७ Jain Education International दर्गावइय दलइत्ता घण [नि ] रा० १३०. जी० ३१३०० [दधिमुख ] जी० ३६११,९१२ दधिवासु मंडव [दधिवासुका मण्डपक] जी० ३।२६६ पण [ दर्पण ] ओ० १२,१६. रा० २१,४६,२६१. जी० ३२८६, ३४७,५६६ पण | दर्पणक | ओ० ६४ दप्पणिज्ज [ दर्शनीय | ओ० ६३. जी० ३:६०२, ८६०,८६६,८७२, ८७८ दब्भसंधारण | दर्भसंस्तारक ] रा० ७६६ दमणा [ दमनक ] रा० ३०. जी० ३।२८२ दमिला [ द्रविडा, मिला ] रा० ८०४ दमिली | द्रविडा, द्रमिला ] ओ० ७० वयपत्त [ दयाप्रप्त ] ओ० १४. २० ६७१ दरदरजस् ] रा० २६ दरिमह [म] रा० ६८८ दरिय] [ दृप्त | ओ० ६. जी० ३१२७५ दरिस [ दर्शन] रा० ८०३ दरिसणावरणिज्ज [ दर्शनावरणीय] ओ० ४४ दरिसणिज्ज | दर्शनीय | ओ० १,५,७,८,१० से १३ १५.४६,६४,७२,१६४. २०१७ से २३,३२,३४ ३६ से ३८,५०,१२४,१३०, १३१,१३६, १३७, १४५, १५७,१७४, १७५, २२८, २३१,२३३, २४५,२४७, २४६, ६६८, ६७०, ६७२,६७६, ७००,७०२ जी० ३१८४,२३२,२६१,२६६. २६६,२७८,२७६,२८६ से २८८,२६०,३००, ३०३,३०६, ३०७,३११,३८७,३१३,४०७, ४१०, ५८१,५८४,५८५,५६६, ५१७,६३९, ६७२, ८३६८५७,८६३,११२१,११२२ दरणीय | दर्शनीय | रा० १ दरी [ दरी | जी० ३१६२३ दल | दल ] जी० ३२८२,५६७ दलहत्ता | दत्वा ] ओ० २१. रा० २६३. जी० ३।४५८ १. प्राप्त करुणागुण: [ वृ] दयाप्राप्तः स्वभावत: शुद्धजीवद्रव्यत्वात् । For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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