Book Title: Agam 13 Upang 02 Rajprashniya Sutra Raipaseniyam Terapanth
Author(s): Tulsi Acharya, Mahapragna Acharya
Publisher: Jain Vishva Bharati
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कालय-कित्तिय
कालयकालक] जी०:३१८१६.
किसुथ किंशुक] ओ० २२. रा० २७.७७७,७७८, कालसंघिय [कालसन्धित] जी० ३१५८६
७८. जी० ३३११८, २८०, ५६० कालागरु. [ कालागुरु रा०, ६,१२,३२,१३२ किच्च [कृत्य] रा० ३१, ५६
२३६,२८१,२६२. जी० ३१३०२,३७२,३६८, किच्चा [कृत्वा] ओ० ८७- रा० ६६७, ४४७,४५७
जी० ३.११७ कालागुरु [कालागुरु ] ओ० २,५५.
किट्ठिया [कृष्टिका] जी० १९७३ कालाभिग्गहचरय [कालाभिग्रहचरक] ओ० ३४ ।
किडकर [क्रीडाकर] ओ० ६४ कालायस [कालायस] ओ०.६४. रा० १७३,
किणिय [किणित] रा० ७७ ६८१. जी० ३२२८५
किण्णर [किन्नर ओ० १३, ४६. रा०.६६८, कालोद [कालोद ] जी० ३१७७५,८१० से ८१२,
७५२, ७७१, ७८६. जी. ३१२६६, २८५, ८१४,८१६,८१८
२८८, ३००, ३१८, ३७२ कालोभास [कालावभास] जी० ३८३,६४ ... कालोय | कालोद] जी० ३१७७० से ७७३,८००,
किण्णरक [किन्न रकण्ठ] जी० ३।३२६ .
किण्णरकंठग [किन्नरकण्ठक? जी०३१४१६ ८०३ से ८०७,८१३,८१५,८१६ से ८२१,
किण्य [कथम् ] रा० ६६७ ६५६,९६४,६६५,६६७,६५०
किण्ह [कृष्ण] ओ० ४, १२, १३, १६. रा० २२, कालोयय [कालोदक] जी० ३।७७२
२४, २५, १२८,१३२, १५३, १६७, १७०, कावपेच्छा [कावप्रेक्षा] जी०.३।६१६
१७८, २३५, ७०३. जी. ३१७८१, २७३, काविल [कापिल ] ओ०६६ काविसायण कापिशायन] जी० ३।५८६
२७७, २७८, २९०, २१८, ३०२, ३२६,
३५.३, ३५८, ३८२, ३९७, ५८५, ५६७, कास [काश] जी० ३१६२८ कासित्ता [काशित्वा] जी० ३।६३०
५३८:१७, १०७५ किइकम्म [ कितिकमन्] ओ० ४०
किण्हकणवीर [कृष्णकणवार] रा० २५. कि [किम्] रा० ६२. जी० १०२ .
जी० ३.२७८ किंकर [किङ्कर] ओ० ६४, रा० ५१
किण्हकेसर [कृष्णकेसर] रा० २५ किंकरभूत [किङ्करभूत ] जी० ३।५६२
किण्हच्छाय [कृष्णच्छाय] ओ० ४. रा. १७०, फिकरभूय [किङ्करभूत ] रा० ६६४ ।
-७०३. जी० ३।२७३ किचि | किञ्चित्.) ओ० १६६. रा० ६. जी० २६२
किण्हबंधुजीव { कृष्णबन्धुजीव ] रा० २५ किंचूणोमोदरिय किञ्चिदूनावमोदरिक ओ० ३३ किण्हलेस [कृष्णलेश्य] जी० ३३१०१
किण्हलेस्सा [कृष्णले श्या] जी० ३.१०१, १०२ किपागफल [किम्पाकफ़ल] ओ० २३ किंपुरिस [किम्पुरुष ] ओ० ४६, १२०, १६२...
किण्हसप्प [कृष्णसर्प] रा० २५ रा० १४१, १७३, १६२, ६६८, ७५२, ७७१,
किण्हासोय [कृष्णाशोक] रा० २५ ७५६. जी० ३.२६६, २८५, ३१८
किण्होभास [कृष्णावभास ] ओ० ४. रा० १७०, किंपुरिसकंछ । किम्पुरुषकण्ठ ] रा० ११५, २५८.
. ७०३. जी० ३।२७३,२६८,३५८,५८५ जी० ३१३२८
कित्त [कोतम् ] -- कित्तति. रा० १८५ किपुरिसकंठग [किम्पुरुषकण्ठक] जी० ३,४१६
कित्तिय [कीति ] ओ०:२. किमय किम्मय ] जी०-३१८७, १०८१'
१. अगरे, भल्लातक, अर्जुन (आप्टे)
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