Book Title: Vijaychand Kevali Charitra
Author(s): Chandraprabh Mahattar
Publisher: Jain Dharm Prasarak Sabha

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Page 38
________________ अष्टप्र. // 17 // पुरनरनारिरिंदो देवं पुप्फरकएहिं पूएछ। पुलश्नमिऊण मुणिं अकयपूयाफलं राया // // अक्षत अखंमफुमियचोककएहिं पुंजत्तयं जिणंदस्स / पुरवे नरा कुणंतो पावंति अखंझियसुहाशाज्य: पूजा. श्य गुरुवयणं सोचं अस्कया समुछेलं लोउँ // दणं सा सुई पत्नण निअअत्तणो कंतं // 6 // हूँ| अह्मिवि नाह एवं अकयपुंजत्तएण जिणनाहं / पूएमो अचिरेणं सिडिसुहं जेण पावेमो // एवंतीए जणिकणं चंचुपुडे खिविर्य चोककएहिरवे जिणिंदपुर पुजतिअंकीरमिहुणेणा॥ नणिअं अवच्चजुअलं जणणीजणएहिं जिणवरिंदस्स।पुर मुंचह अके पावह जेणकयं सुकंजएर श्य पदियहं काजं अस्कयपूचं जिणंदनत्तीए / आयुकये गया चत्तौरिवि देवलोगंमि // // 1 जुत्तूण देवसुकै सो सुअजीवो पुणोवि चविऊणं / संजा हेमपुरे राया हेमप्पहो नाम // ए॥ सो विय सूजीवो तत्तो चविऊण देवलोगाउँ / हेमप्पहस्स नजा जाया जयसुंदरी नामाए॥ सापछिमावि सूई संसारे हिंमिऊण सा जायो। हेमप्पहस्स रन्नो रश्नामा जारिया दुश्यों // 3 // अन्नावि कमेणं पंचसया जावे नारिया तस्स।जाया पुण श्छा पढमा ते जारिया दोवि ॥ए ? (संजाया पुण श्छा पढमा नारिया उन्नि) इति पागंतरं * अह अन्नया नरिंदो दूसह जर ताव ताविय सरीरो।चंदणजबुतिठवीहु लोलश्नूमीए अप्पाणं ए॥ | // 17 // | 1 अह अन्नया नरिंदो। 23 जङ्गुयं / 3 नत्ती निय। 4 अह्मवि। 5 एयं / 6 अवरेणं / पावेमि / विय / ए पयदियहं / 10 श्राउरकरण / 11 चत्तारित / 12 देवखोए। 13 संजाया। 15 बीया। 15 चेव / RASHRSSBHASHRS Jun Gun Aaradhak DIAC.Gunratnasuri M.S.

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