Book Title: Nandanvan Kalpataru 2019 06 SrNo 42
Author(s): Kirtitrai
Publisher: Jain Granth Prakashan Samiti

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Page 48
________________ गुरवो सिरिकत्यूरसूरिणो आ. हेमपूर्णाश्रीः अहमदावादमहानयरे माणेकचउक्कपएसे खेतरपालपोलमज्झे कुटुंबमेगं परिवसइ-फत्तेचंद-नानचंदकीनखाबवाला-इइ । तंमि कुटुंबे अमीचंदसेट्ठी, चम्पासेट्ठिणी - इइ दंपइणो गिहे रइलाल-हिंमतलाल - इइ भाउणोऽणंतरं कांतिलालणामगपुत्तस्स जम्मो जाओ। सो य पढमजोव्वणत्थो चेव आयरियसिरिविजयणेमिसूरीसर-पट्टाभरणआयरियसिरिविजयविन्नाणसूरीसरसमीवे दिक्खं गहीअ । तस्स य णामं सिरिकत्थूरविजयो त्ति ठावियं ।। माया-पिउणो आसीसेहिं, गुरूणं च सिरिविन्नाणसूरीणं पसाएणं कत्थूरविजओ समग्गसत्थविऊ पाइयाभासाविसारओ य जाओ । जह पारसमणिस्स फासेण चेव लोहं सुवण्णीहोइ तहेव गुरुकिवाए अप्पमइ-विन्नाणो सिस्सो नाणी सुअपारगामी य हवइ । सिरिकत्थूरविजयस्साऽवि एमेव गुरुकिवाए विसुद्धवेरग्गभावणाए य संजमजीवियंमि गुरुभत्तिसुयभत्ति-चरित्तभत्ति त्ति तिण्हं रयणाणं संगमो हवीअ । तेसिं जीवणं तहा पवित्तं निम्मलं च आसि जहा तेसिं समीवं समागयाणं जीवाणं दुहाई उवसमिंसु, हिययं च संतीए सुहेण पसन्नयाए य भरिअं हवेज्ज । तेसिं पसन्नया भावणाए य उच्चत्तणं पाइय-सक्कयभासाहिं पासाइयरीईए रइएसु गंथेसु पइबिंबियाई होज्ज । नियजोग्गयाए गुणपत्तत्ताए गुरुकिवाए य पुण्णाणं तेसिं, परमगुरूणं सिरिविजयणेमिसूरीसराणं आसीसाए आयरियपयप्पयाणं जायं । तेहिं च निययनिम्मलचरित्तप्पहावेण जिणसासणस्स पंचसट्ठिसमहियाणं सिस्साणं पसिस्साण य पणामणं कयं । एसा खु तेसिं चरित्तभत्ती । ___ अह अण्णया पहायसमए सूरिमंतं जवंताण तेसिं झाणं झायंताणं पच्चक्खं समोसरणट्ठियस्स भावजिणेसरस्स दरिसणं संजायं । तओ तेसिं तारिसं चेव जिणालयं निम्मविउं भावणा पाउब्भूया । ताहे तेसिं सीसेणं आयरियसिरिचंदोदयसूरिणा एवं भावणं नाउं तं तारिसं झाणकाले दिटुं समोसरणागारं जिणचेइअं सिरिसत्तुंजयगिरिरायमूले निम्माविअं । ३७

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