Book Title: Nandanvan Kalpataru 2019 06 SrNo 42
Author(s): Kirtitrai
Publisher: Jain Granth Prakashan Samiti
View full book text
________________
एम०ए०इइ पयवीमंडिएण कप्पडियासंनासंजुत्तेणं रसिगदाससुएणं हीरालालेण गुज्जरामुहे विसयविआरस्स सवित्थरं दंसिअत्तणेण मए य विसयसूईए निमित्तसूईए य किमवि सूइअत्तेण विरमेमि इमाओ पत्थावत्तो, विसयविआरजिण्णासूणं आमुहाइदंसणं भलावित्ता ।
___अवरं च इमगंथसंकलणाए हं पेरिओ पाइअसाहिच्चरसिगेण एम०ए०पयालंकिएण तिवेइसनाधारिणा चंदुलालसूणुणा चीमणलालेण इइ निद्दिसामि साणंदं ।
पज्जते इमं पि सूएमि जं संपइकाले वि महामोहतिमिरंधणत्तणं पत्ता बहुलोगा पियप्पियविओगसंजोगजन्नविविहदुहपरंपराए संबाहिआ सइ आउलवाउला हवंति । तेसिं सोगकरुणनिमित्ताइं अणेगाणि हुँति । तारिसकियंतनिमित्ताणं पयंसगो एसो गंथो । अओ एअंमि गंथे पदंसिए अणेगतिव्वदुक्खयपसंगे सम्मं पढिअ दुक्खविंदमोअणाए अउणोणिउत्तीए य सिणेहबंधणाओ अप्पाणं छोडाविऊणं अणासत्तिजोगं वीयरागभावणं च भावित्ता सिवमयलमरुअमणंतमक्खयमव्वबाहं ठाणं भो भव्वा ! सिग्धं चिय लहंतु त्ति पत्थेइ सिरिविजयविन्नाणसूरिअंतेवासी कत्थूरविजओ सूरियपुरे वीरवरिसे २४६७तमे मग्गसीसस्स सुदिपक्खम्मि बीआए तिहीए ॥
७४

Page Navigation
1 ... 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112 113 114 115 116 117 118 119 120 121 122 123 124 125 126 127 128 129 130 131 132 133 134 135 136