Book Title: Nandanvan Kalpataru 2019 06 SrNo 42
Author(s): Kirtitrai
Publisher: Jain Granth Prakashan Samiti
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सूरिचक्रचक्रवर्त्तिभट्टारकाचार्यश्रीविजयनेमिसूरीश्वरचरणाम्भोजचञ्चरीक-शिष्यरत्नानुयोगाचार्यपन्यासश्रीविज्ञानविजयगणि-विनेय-मुनिकस्तूरविजयविनिर्मिता
प्राकृतरूपमाला देवेन्द्रवन्द्यामिपयोजयुग्मं, समस्तभावप्रविभासदक्षम् । संसारसिन्धूत्तरणैकपोतं, नमामि पञ्चासरपार्श्वनाथम् ॥१॥ यनामस्मरणादनेकभवभूपापावली सत्वरं, नाशं याति समभ्युपैति सहसा कल्याणवृन्दः सताम् । कृत्याकृत्यविचारदानकुशला प्रज्ञा समुत्पद्यते । तं वन्दे विवुधाभिवन्दितमहं श्रीनेमिसूरीश्वरम् ॥२॥ प्रणम्य गणिपन्यासं, विज्ञानविजयं गुरुम् । मालां प्राकृतरूपाणां, कस्तुरस्तनुते मुनिः ॥३॥

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