Book Title: Agamiya Suktavalyadi
Author(s): Sagaranandsuri, Anandsagarsuri
Publisher: Jain Pustak Pracharak Samstha

View full book text
Previous | Next

Page 17
________________ श्रीआगमीय - सूक्तावली ॥१५॥ 122238322 55s the 22222222 ३७ माणुसत्ते असारंमि, वाहीरोगाण आलए । जरामरणघत्थमि, खर्णपि न रमामहं ॥ ३८ जम्म दुक्खं जरा दुक्खं, रोगा य मरणाणि य । अहो दुक्खो हु संसारो, जत्थ कीसंति जंतुणो ॥ ३९ खित्तं वत्युं हिरण्णं च पुत्तदारं च बंधवा । चइताण इमं देहं गंतव्यमवसस्स मे ॥ ४० जह किंपागफलाणं, परिणामो न सुंदरी । एवं भुत्ताण भोगाणं, परिणामो न सुंदरी ॥ ४१ तं विम्मापियरो, एवमेयं जहाफुडं । इहलोगे निष्पिवासस्स, नत्थि किंचिवि दुक्करं ॥ ४२ सारीरमाणसा चैव देयणा उ अनंतसो । म सोढाओं] [६] भीमाओ [ई], असई दुक्खभयाणि य ॥ ४३ जरामरणकंतारे, चाउरंते भयागरे । (४५८) मया सोढाणि भीमाइ, जम्माई मरणाणि य ॥ ४४ सो वितऽम्मापियरो ! एवमेयं जहाफुडं । परिकम्मं को कुणई, अरने मिगपक्खिणं ? ॥ ४५ एगभूओ अरम्ने वा जहा ऊ चरई मिगो । एव धम्मं चरिस्सामि, संजमेण तवेण य ॥ ४६ जया मिगस्स आयंको महारण्णंमि जायई । अच्छंतं रुक्खमूलंमि, को णं ताहे चिगिच्छई ? ॥ ४७ को वा से ओसहं देइ, को वा से पुच्छई सुहं । को से भत्तं व पाणं वा, आहरित पणामई ? ॥ ४८ जया य से सुही होइ, तया गच्छइ गोअरं । भत्तपाणस्स अट्ठाए, बल्लराणि सराणि य ॥ (४५४) ४९ खाइत्ता पाणियं पाउं, वल्लरेहिं सरेहि य । मिगचारियं चरित्ताणं, गच्छई मिगचारियं ॥ ५० एवं समुट्टिए भिक्ख, एवमेव अगए । मिगचरियं चरिताणं, उहं पक्कमई दिसं ॥ 55 Www x h (४६४) द्धा. ५१ जहा मिए एग अणेगचारी, अगेगवाले धुवगोअरे अ । एवं मुणी गोयरियं पविट्ठे, नो हीलए नोवि य खिंसइज्जा ॥ (४६२) भा ५२ सीहत्ता निक्खमि सीहत्ता चैव विहरसु पुत्ता ! । जह नवरि धम्मकामा विरत्तकामा उ विहरंति ॥ ५३ नाणेण दंसणेण य चरिततवनियमसंजमगुणेहिं । ती मुलीए होहि तुमं वह्नमाणो उ उत्तराध्यय नस्य सूक्तानि ॥१५॥

Loading...

Page Navigation
1 ... 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76