Book Title: Shrutsagar 2015 05 06 Volume 01 12 13
Author(s): Hiren K Doshi
Publisher: Acharya Kailassagarsuri Gyanmandir Koba

View full book text
Previous | Next

Page 14
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir 12 श्रुतसागर मे-जून-२०१५ अष्टापदगिरिमंडणुए, शंभव सुखदातार, श्रीविशालसोमसूरीसरू, संघ सकल सुखकार ॥१॥ ॥ इति श्री शंभव नमस्कारः ।। श्रीसंभव जिनवर सुखकरू, जस पाय नमइ सुर-नरवरू, श्रीजितारिनृपकुलि दिनकरू, तस वंदइ विशालसोमसूरीसरू ||३|| ॥ इति शंभवस्तुतिः ॥ नमु निरंतर भव्य लोक, अभिनंदन जिनवर, भावहिभंजन भूतलइ, नही एहवु सुरेसर, संवरनृपकुलकमलि भानु, सिद्धारथनंदन, जय जिन तिजगपूअणीज्ज, जगजनआनंदन, एकमनांजे चितिधरी ए, आराधइ गुणवंत, श्रीविशालसोमसूरीसरू, भवभंजन भगवंत ॥१॥ ॥ इति श्री अभिनंदन नमस्कारः ।। अभिनंदन जिनवर वंदीइ, पोतानां पाप निकंदीइ, श्रीविशालसोमसूरि आणंदीइ, चउथा जिननइ अभिनंदीइ ॥४॥ ॥इति अभिनंदनस्तुतिः ॥ पंचम जिन पहु पूअणिज्ज, श(शि)वरामारातु, सुमति सुमतिदातार सार-गुणे करि मातु, मेघरायसुत जास मात, सुमंगला राणी, प्रहि ऊठीनइ भजउ भावि, भविका नित प्राणी, श्रीविशालसोमसूरि जेहना ए, गुण समरइ दिन-राति, भजु भविक जन भावसिउं, सुमतिनाथ सुप्रभाति ॥१॥ ॥ इति नमस्कारः॥ सुमति सुमति अप्पइ, दुख हेलांसु खप्पइ, सेवक सुख थप्पड़, रागनई रोस कप्पइ, For Private and Personal Use Only

Loading...

Page Navigation
1 ... 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84