Book Title: Anekant 1997 Book 50 Ank 01 to 04
Author(s): Padmachandra Shastri
Publisher: Veer Seva Mandir Trust

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Page 72
________________ अनेकान्त/29 सम्बंधी ग्रन्थों की रचनाकर श्रुत परम्परा को गतिशील बनाया है। अभी तक प्राप्त रचनाओं के अतिरिक्त इनकी एक कृति तर्क-परीक्षा का उल्लेख मिला है, यह कृति पत्र-पत्रिका से पृथक् है। (4) आचार्य प्रभाचन्द्र :- आपकी उपलब्ध रचनाओं के अतिरिक्त एक न्याय विषयक रचना "प्रमाणदीपक" का उल्लेख मिला है। (5) आचार्य वीरसेन स्वामी :- आपकी न्याय विषयक रचना "प्रमाणनौका" अन्वेषणीय है। (6) आचार्य जिनसेन स्वामी :- आपके दो ग्रन्थों की जानकारी प्राप्त हुई है। सैन्य काण्ड और निमित्तदीपक (7) अभिनवधर्म भूषण :- आपकी न्याय विषयक एकमात्र रचना "न्याय दीपिका बहुचर्चित रचना है। किन्तु एक और न्याय कृति “प्रमाण-विस्तार" ज्ञात (8) प्रभादेव स्वामी :- सम्भवतः इन आचार्यों के बारे में भी कुछ जानकारी अभी तक प्राप्त नहीं होती है। इनकी अज्ञात कृतियाँ निम्न प्रकार से हैं : 1} प्रमितिवाद (2} युक्तिवाद (3} अव्याप्तिवाद {4} तर्कवाद और {5} नयवाद । ये सभी रचनायें न्याय विषयक है। (9) वादिराज स्वामी :-इनकी “वाद मञ्जरी" न्याय वाद विषयक रचना है। (10) धर्म सागर : आप सिंह संघ के थे। अधिक कुछ ज्ञात नहीं है। आपकी निम्न रचनायें हैं : [1} जीव-विचार, {2} सप्ततत्वी, {3} नवपदार्थी, {4} द्रव्यचक्र। (11) वादिसिंह स्वामी :- वादीभसिह से प्रथक हैं। आपकी कृतियॉ निम्न हैं {1} तर्क-दीपिका, {2} धर्म-सग्रह। (12) जोगदेव स्वामी :- इनकी रचना हैं 'श्रावक प्रायाश्चित ग्रन्थ'। (13) कुमार विन्दुमुनि:- आप भी अज्ञात सृजनकर्ता है आपकी रचना 'निमित्त संहिता' है। (14) उग्राचार्य :- आयुर्वेद से सम्बंधित 'कनकदीपक' वैद्यक-ग्रन्थ रचा है। (15) अमरकीर्ति आचार्य :- इनके बारे में भी उल्लेख प्राप्त नहीं होता किन्तु इन्होंने स्वयंभू स्तोत्र एवं जिन सहस्रनाम स्तोत्र पर संस्कृत टीका रची है जो अन्वेषणीय है। आचार्यों के अतिरिक्त भट्टारकों ने भी समय-समय पर ग्रन्थों का प्रणयन करके जैन वाड्मय को समृद्ध बनाया है। नीचे कुछ भट्टारकों के विलुप्त ग्रन्थों का विवरण प्रस्तुत कर रहा हूं : (1) वर्द्धमान भट्टारक - सम्भवतः आप न्याय दीपिकाकार धर्म भूषण के गुरू हैं। आपकी रचना है 'तत्वविनिश्चय'। (2) भट्टारक जिनेन्द्र भूषण :- इनकी एकमात्र कृति का उल्लेख प्राप्त हुआ

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