Book Title: Yatindrasuri Abhinandan Granth
Author(s): Kalyanvijay Gani
Publisher: Saudharmbruhat Tapagacchiya Shwetambar Shree Sangh
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खरवाटक भिणाय और श्री चवलेश्वर पार्श्वनाथ ले:-दौलतसिंह लोढा, 'अरविंद' धामणिया (खरवाटक-खेराड़)
__मेवाड़ विभाग के जहाजपुर, माण्डलगढ, काछोला और कोटडी तहसीलों के लगभग पांच सौ ग्रामवाला एवं लगभग ६०० मील के क्षेत्रफल वाला यह भाग जो माण्डलगढ़ से श्री चवलेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ एवं जहांजपुर से कोटडी पर्यंत फैला हुआ है कभी इससे अधिक भी विस्तृत था-ऐसे प्रमाण अनेक स्थानों पर उपलब्ध होते हैं। जहांजपर से लगभग ४-५ मील के अन्तर पर ध्वंशितरूप में धौड़ (नाथण) नामक खण्डहरग्रस्त अत्यल्प रूप में एक अभी प्राम है । वह लगभग आज से ६००७०० वर्ष पूर्व अवश्य एक समृद्ध नगर था। कुमारपाल गूर्जरसम्राट् के समय का एक लेख वहां अवशेष रूप में बचे हुए एक शिवमन्दिर के स्तम्भ पर विद्यमान है। उसका अक्षरान्तर मैं ने भी किया है और मेवाड राज्य के समय में भी उसको लिया गया था । लेख से स्पष्ट है कि धौड़ का सामन्त अजमेर के राजा के आधीन था और लेख में गूर्जरसम्राट् कुमारपाल का उल्लेख होने से यह स्पष्ट है कि अजमेर का राजा गूर्जरसम्राट् का माण्डलिक राजा था। इसी लेख में 'खरवाटक' शब्द का प्रयोग हुआ है। प्रचलित भाषा में जहां खैर वृक्ष अधिक हों उस स्थल का नाम 'खैरवाड' अर्थात् खरवाटक । आज भी इस भाग में खैर के वृक्ष बहुतायत रूप में हैं। इस लेख पर विचार कर के कहा जा सकता है कि 'खरवाटक' प्रदेश 'खर वाटक' के नाम से कुमारपाल से अर्थात् वि. १२-१३ शताब्दी पूर्व से प्रसिद्ध रहा है।
_मेवाड़-राज्य में आनेसे बहुत पूर्व इस भाग पर किसी स्वतंत्र राजा का राज्य था और उसकी राज्यधानी भिणाय थी । भिणाय में स्वतंत्र राज्य लगभग एक सहस्र वर्षपूर्व रहा होगा-यह अनुमान किया जा सकता है। इसके कई आधार हैं । रियासतीयुग में भिणाय का भाग काछोला-प्रगणा में था। काछोला शाहपुरा-राज्य का तहसीलस्थान था । शाहपुराधीश को यह काछोला तहसील उदयपुर के राणाओं से भेंट में प्राप्त हुई थी। शाहपुरा-राज्य सम्राट् शाहजहाँ के शासनकाल में स्थापित हुआ था । शाहपुरा को जब काछोला- तहसील भेंट हुई थी. उस समय भिणाय वैसी ही खण्डित अवस्था में था जैसा आज तीन सौ वर्ष पश्चात् वह है । मेवाड़ के इतिहास में भी इस 'भिणाय' का कहीं उल्लेख नहीं मिलता । परन्तु जब भिणाय के खण्डहर और उसके समीप भागों को देखते हैं तो सहज समझ में आता है कि यह भाग कभी अवश्य समृद्ध और अत्यन्त फला-फूला रहा है । मेवाड़ राज्य लगभग एक सहस्र वर्षों से भी प्राचीन राज्य रहा है । एक सहस्र प्राचीन मेवाड़ - राज्य के इतिहास में जब
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