Book Title: Jain Hiteshi 1914 Ank 09
Author(s): Nathuram Premi
Publisher: Jain Granthratna Karyalay

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Page 10
________________ जैनहितैषी क्षितिमोहनसेन, नेपालचन्द्रराय, और कालीमोहन घोष क्रमशः मुख्य संरक्षक हैं। इनके नीचे और भी कई देखरेख रखनेवाले हैं । हरएक विभागमें आवश्यकतानुसार कमरे हैं; जैसे शिशुविभागमें तीन कमरे हैं। हरएक कमरेमें एक एक मानीटर है। उन तीनों पर एक केप्टेन है। केप्टेन और मानीटरोंको लड़के अपने आप चुनते हैं और उनकी आज्ञामें रहते हैं। यदि कभी कोई लड़का कुछ अपराध कर लेता है तो उनका केप्टेन उस लड़केको समझाकर उससे प्रायश्चित्त करवाता है। यदि वह केप्टेनसे नहीं मानता तो विद्यार्थियोंकी एक विचारसभा होती है । उनमेंसे एक न्यायाधीश चुना जाता है । फिर उस न्यायाधीशके सामने लड़का अपना निरपराधी होना साबित करता है, अथवा अपराध स्वीकार करता है और प्रायश्चित्त लेता है। यदि अपराधी होने पर भी वह अपना अपराध स्वीकार नहीं करता है, तो उसको सप्रमाण अपराधी साबित कर दण्ड दे दिया जाता है । इस काममें उनके संरक्षक लोग बहुत ही कम हस्तक्षेप करते हैं । यही हालत प्रत्येक विभागकी है। __ यदि कभी एक विभागका विद्यार्थी दूसरे विभागके लडकेसे लड़ता है तो उसका न्याय करनेके लिए आश्रमकी प्रधान विचारसभाकी विचारबैठक होती है । इस सभामें आश्रमभरके विद्यार्थी और मास्टर लोग मेम्बर हैं। इसमें भी विद्यार्थी ही न्यायाधीश चुना जाता है और उक्त प्रकारसे अपराधियोंका विचार होकर प्रायश्चित्त या दण्डविधान होता है। उक्त प्रथासे विद्यार्थियोंके कोमल हृदय निर्मल और पवित्र हो जाते हैं । उनको अपने दुष्कृत्यों और सुकृत्योंकी जाँच करना आजाता है। Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org

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