Book Title: Kalpasutra Moolpath
Author(s): Bhimsinh Manek Shravak Mumbai
Publisher: Bhimsinh Manek Shravak Mumbai
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JAIN EDUCATION INTERNATIONAL FOR PRIVATE AND PERSONAL USE ONLY
Page #1 -------------------------------------------------------------------------- ________________ AUN IDEARNA REVSARIDUND O ALSOYASSAS *॥श्रीकल्पसूत्र मूलपाठ (बारसो) NdANTA SAYARosante Jain Education international ar Private Personal use only Page #2 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० ॥ १ ॥ ************************ श्री चतुर्दशपूर्वर बाहुस्वामिप्रणीत पर्युषणाकल्प ना दशाश्रुतस्कंध सूत्रनुं यामुं अध्ययन अथवा ॥ श्री कल्पसूत्र मूलपाठ ॥ (बारसो) छपावी प्रसिद्ध करनार, श्रावक भीमसिंह माणेक, जैन पुस्तको प्रसिद्ध करनार तथा वेचनार. १०७ धनजी स्ट्रीट मुंबई ३. द्वीतिय आवृति. विक्रम संवत् १९८३. वीर संवत् २४५२. ************* बारसो. ॥ १ ॥ Page #3 -------------------------------------------------------------------------- ________________ प्रस्तावना. जैननां पीस्तालीश सूत्रोमां बेद सूत्रो ले. तेमांनां चार वेद सूत्र (निशीथ, व्यवहार, वृहत् कल्प अने दशाश्रुतस्कंध) चतुर्दशपूर्वधर श्रीमानू नावाहुस्वामीनां रचेलां. तेमांना चोथा दशाश्रुतस्कंध नामना मूत्रना बार अध्यायन , अने तेना आठमा अध्यायननुं नाम पर्युषणाकल्प . ते पर्युषणाकल्प श्रीदेवर्किगणि दमाश्रमण महाराजे ज्यारे पुस्तको पर सूत्रो लखवानी शरुआत करी त्यारे जिनचरित्र तथा स्थविरावली जोमीने कल्पसूत्रना नामे जूई पुस्तक पाडीने लखेलु . ए सूत्रनी श्लोकसंख्या बारसो ने पंदर हावाथी । एने साधारणपणे घणी वेला बारसा सूत्र के बारसो पण कहेवामां आवे . | आ सूत्र प्रथम पर्युषणानी रात्रे साधुपर्षदमा एक जण बोली जतो ने बीजा साधु काउस्सग्गमा उन्ना रही श्रवण करता एवो रिवाज हतो, पण आनंदपुर (वमनगर) Jain Educationmamtional For Private & Personal use only Janeiro Page #4 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० ॥ १ ॥ ****** ना ध्रुवसेन राजाने त्यां तेनो पुत्र मरी जतां तेनो शोक उतारवा अर्थे वीरात् ए८० वर्षे सभा समक्ष वांचवामां आव्युं, त्यारथी दर पजुसरण चावतां ए सूत्र व्याख्यानमां वंचाय बेच्ने पजुसाने दिने मूल पाठे पंचाय बे. या प्रवृत्ति आजकाल तमाम श्रेतांवर जैनसप्रदायमां चाले वे, तेथी खावा प्रतिनपयोगी सूत्रपाठने बनती मदेनते विद्वान् मुनि महाराज पासे शुरू करावीने मोए बपावी प्रसिद्ध करी जैनधर्मोन्नति श्रवामां बनतो प्रयास लीधो वे, ते सफल ययाथी मे पोताने कृतकृत्य गणी शुं. श्रावक जीमसिंह माणेक. **** प्रस्ताव. ॥ १ ॥ Page #5 -------------------------------------------------------------------------- ________________ | ॐ श्रीवईमानाय नमः ॥ ॐ ॥ अई ॥ नमो अरिहंताणं, नमो सिक्षणं, नमो आयरियाणं, नमो उवज्छायाणं,नमो लोए सवसाहणं ॥ एसो पंचनमुक्कारो, सवपावप्पसणासणो, मंगलाणं च सवेसिं, पढमं दवइ मंगलं ॥१॥ तेणं कालेणं तेणं समरणं समणे नगवं महावीरे पंचदबत्तरे हुना, तंजहा, दबुत्तराहिं चुए-चश्त्ता गन्नं वक्ते, हजुत्तरादिं गनाउं गन्नं साहरिए, दजुत्तराहिं जाए, हजुत्तरादि मुंमे नवित्ता अगाराज अणगारिश्र पवश्ए, दबुत्तराहिँ अणंते अणुत्तरे निवाघाए निरावरणे कसिणे पडिपुगे । केवलवरनाणदंसणे समुप्पन्ने, साइणा परिनिवुए जयवं॥॥तेणं कालेणं तेणं समएणं । समणे नगवं महावीरे जे से गिम्हाणं चनने मासे अहमे पके आसाढसुई-तस्स णं * आसाढसुझस्स बहीपकेणं, महाविजयपुप्फुत्तरपवरपुंमरीया महाविमाणा वीसंसागरोवमहिश्याउँ, आजरकएणं नवकएणं विश्कएणं अणंतरं चयं चश्ता इहेव जंबुद्दीवे | JainEducationaire For Private Personal use only wanaw.jainelorary.org Page #6 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० ॥१॥ दीवे जारहे वासे दाहिणड्डनरहे, श्मीसे उसप्पिणीए सुसमसुसमाए समाए विश्वताए,' सुसमाए समाए विश्वंताए, सुसमसमाए समाए विश्कंताए, उसमसुसमाए समाए बहुविश्कताए-सागरोवमकोडाकोडीए 'बायालीसवाससहस्सेहिं कणिआए पंचदत्तरिवासेहिं अनवमेहि य मासेहिं सेसेहिं'-इक्कवीसाए तिबयरेदि इकागकु समुप्पन्नेहिं कासवगुत्तेहिं, दोदि य हरिवंसकुलसमुप्पन्नेहिं गोअमसगुत्तेहिं, तेवीसाए । तिबयरेहिं विश्वंतेहिं, समणे जगवं महावीरे चरमतिबयरे पुवतिबयरनिहिछे, माह*णकुंमग्गामे नयरे उसनदत्तस्स मादणस्स कोमालसगुत्तस्स नारिआए देवाणंदाए मादणीए जालंधरसगुत्ताए पुत्वरत्तावरत्तकालसमयंसि हबुतराहिं नस्कत्तेणं जोगमवाग-1 एणं आहारवक्कंतीए नववकंतीए सरीरवकंतीए कुचिसि गन्नताए वक्ते ॥३॥समणे । "बायालीसाए, 'पंचहनरिए, चरिमे तित्थयरे, ॥१॥ Jan Education na For Private Personal use only Page #7 -------------------------------------------------------------------------- ________________ R** ********* नगवं महावीरे तिन्नाणोवगए आवि हुबा-चश्स्सामि त्ति जाणइ, चयमाणे न याणइ, चुएमि त्ति जाण ॥ जं रयाणिं च णं समणे जगवं महावीरे देवाणंदाए माहणी जालंधरसगुत्ताए कुचिसि गप्नत्ताए वकंते, तं रयणिं च णं सा देवाणंदा मावणी सयणिऊसि सुत्तजागरा उंदीरमाणी उदीरमाणी इमेआरूवे उराले कल्लाणे सिवे धन्ने । मंगल्ले सस्सिरीए चनद्दस महासुमिणे पासित्ता णं पडिबुझा, तंजदा, “गय'-वसदसीद-अनिसे-दाम-ससि-दिणयरं'-जयं-कुंनं । पनमसर"-सागर"विमाणनवण-रयणुच्चय-सिदिं च ॥१॥" ॥४॥ तएणं सा देवाणंदा माहणी श्मे एयारूवे जराले कल्लाणे सिवे धन्ने मंगल्ले सस्सिरीए चनहस महासुमिणे पासित्ता एं। पडिबुझा समाणी, दन्तु चित्तमाणंदित्रा 'पीअमणा परमसोमणसिआ हरिसवसविसप्पमाणहियया 'धाराहयकलंबुगं पिव-समुस्ससिअरोमकूवा सुमिणुग्गदं करेइ, सु *पीइमणा. "क.यापुप्प.गं पिव. *********** Jain Education in For Private Personal Use Only Page #8 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० बारसो. ॥३॥ मिणुग्गदं करित्ता सयणिका अनुश, अनुत्तिा अतुरिअ-मचवल-मसंनंताए अविलंबिआए रायहंससरिसीए गईए, जेणेव सन्नदत्ते मादणे, तेणेव उवागबइ, उवागवित्ता उसनदत्तं मादणं जएणं विजएणं वहावेश, वझवित्ता सुहासणवरगया आसबा वीसना करयलपरिग्गदियं दसनदं सिरसावत्तं मबए अंजलिं कट्ट एवं वयासी-॥५॥ एवं खलु अहं देवाणुप्पिा ! अऊ सयणिऊसि सुत्तजागरा उंदीरमाणी उदीरमाणी इमेआरूवे उराले जाव सस्सिरीए चनहस महासुमिणे पासित्ता णं पडिबुझा, तंजदा, गय--जाव-सिदिं च॥६॥ एएसिणं 'नरालाणं जाव चनदसएदं महासुमिणाणं के मन्ने क खाणे फल वित्तिविसेसे नविस्स? तएणं से उसनदत्ते मादणे देवाणंदाए मादणीए अंतिए - * एअमहं सुच्चा निसम्म दस्तुळजाव दिअए धाराहयकलंबुझं पिव समुस्ससियरोमकूवे । सुमिणुग्गरं करेइ, करित्ता इंदं अणुपविसइ, ईहं अणुपविसित्ता अप्पणो साहा भदासणवरगया. इसे एयारूवे. देवाणुप्पिय! इति क. मु. अधिकः ॥५॥ For Private Personal Use Only Page #9 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ********* ************************* विएणं मइपुवएणं बुझिविन्नाणेणं तेसिं सुमिणाणं अनुग्गदं करेई, अबुग्गडं करित्ता देवाणंदं माहणि एवं वयासी-॥ ७ ॥ उराला णं तुमे देवाणुप्पिए ! सुमिणा दिछा, कल्लाणा सिवा धन्ना मंगल्ला सस्सिरी आरोग्ग-तुहि-दीदाज-कल्लाण-मंगलकारगाणं - तुमे देवाणुप्पिए ! सुमिणा दिशा, तंजहा-अबलानो देवाणुप्पिए ! नोगलानो देवाणुप्पिए ! पुत्तलानो देवाणुप्पिए ! सुरकलानो देवाणुप्पिए ! एवं खलु तुमं देवाणुप्पिए ! नवएडं मासाणं बहुपडिपुन्नाणं अम्माण राइंदिआणं विश्वंताणं सुकुमालपाणिपायं अहीण-पडिपुन्न-पंचिंदियसरीरं लकण-वंजण-गुणोववेअं माणुम्माणपमाणपडिपुन्नसुजायसवंगसुंदरंगं ससिसोमाकारं कंतं पिअदंसणं सुरूवं देवकुमारोवमं दारयं पयाहिसि ॥॥ | सेवि अ णं दारए उम्मुक्कबालनावे विनायपरिणयमित्ते जुवणगमणुपत्ते, रिनवेअजनव्वेअ-सामवेअ अथवणवेअ-इतिहासपंचमाणं निघंटुब्हाणं संगोवंगाणं सरदस्साणं ************* For Private Personal use only Page #10 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० चनादं वेआणं सारए वारए धारए,सडंगवी,सहितविसारए, संखाणे सिरकाणे सिरका बारसो. कप्पे वागरणे बंदे निरुत्ते जोइसामयणे अन्नेसु अ बहुसु बंनएणएसु परिवायएसु नएम सुपरिनिहिए आविजविस्स॥॥ तं राला णं तुमे देवाणुप्पिए! सुमिणा दिछा, जाव। आरुग्ग-तुहिन्दीदानय-मंगलकल्लाणकारगाणं तुमे देवाणुप्पिए! सुमिणा दिहत्ति कट्ट जुजो जुजो अणुवृहश॥१०॥तएणं सा देवाणंदा माहणीउसनदत्तस्स माहणस्स अंतिए । * एअमठं सुच्चा निसम्म दस्तु: जाव दियया, करयलपरिग्गहियं दसनदं सिरसावत्तं मत्रए अंजलिं कट्ट नसनदत्तं मादणं एवं वयास॥१॥एवमेयं देवाणुप्पिा ! तहमयं देवात्तप्पि आ! अवितहमेयं देवाणुप्पिा ! असंदिइमेयं देवाणुप्पिा ! इलियमेअं देवाणुप्पिा ! |पडिविअमेअं देवाणुप्पिा ! इचियपडिठियमेअं देवाणुप्पिा ! सच्चे णं एस . अठे, से जहेयं तुम्ने वयह त्ति कट्ठ ते सुमिणे सम्म पडिबइ, पडिचित्ता उसनदत्तेणं । ॥३॥ For Private Personal use only Page #11 -------------------------------------------------------------------------- ________________ *********** *** माहणेणं सनिरालाइंमाणुस्सगाई जोगनोगाई जुंजमाणी विहर॥१२॥ तेणं कालेणं तेणं समएणं सक्के देविंदे देवराया वळपाणी पुरंदरे सयक्कळ सहस्सके मघवं पागसासणे । दाहिणड्डलोगादिवई बत्तीसविमाणसयसहस्साहिवई एरावणवाहणे सुरिंदे अरयंबरवबधरे आलश्अमालमउडे नवहेम-चारु-चित्त-चंचल-कुंमलविलिहिङमाणगल्ले महिड्डिए । मदइए महायसे महाणुनावे महासुरके नासुरबोंदी पलंबवणमालधरे, सोहम्मे कप्पे । सोहम्मवम्सिए विमाणे सुहम्माए सनाए सक्कंसि सीहासणंसि, से णं तब बत्तीसाए । विमाणावाससयसाहस्सीणं, चनरासीए सामाणिप्रसादस्सीणं, तायत्तीसाए तायत्तीसगाणं, चनएहं लोगपालाणं, अमादं अग्गमदिसीणं सपरिवाराणं, तिएदं परिसाणं, सत्तएवं अणीआणं, सत्तएदं अणीआदिवईणं, चनएहं 'चनरासीए आयरकदेवसाहस्सीणं, अन्नेसिं च बहूणं सोहम्मकप्पवासीणं वेमाणिणं देवाणं देवीण य आहेवचं + बडंसए १ सीणं. ********* Main Education Interations For Private Personal Use Only Page #12 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प ॥४॥ F पोरेवच्चं सामित्तं जट्टित्तं महत्तरगत्तं आणाईसरसेणावच्चं कारेमाणे पालेमाणे महयादय- बारसो. नट्ट-गीय-वाश्अ-तंती-तलताल-तुडिय-घणमुरुंग-पमुपडहवाश्यरवेणं दिवाइंनोगनोगाई लुंजमाणे विदर॥१३॥इमं च णं केवलकप्पं जबुद्दीवं दीवं विनलेणं दिणा आनोएमाणे आनोएमाणे विदरइ, तब णं समणं जगवं महावीरं जंबुद्दीवे दीवे नारदे वासे दादिणडलरदे मादणकुंमग्गामे नयरे उसनदत्तस्स मादणस्स कोमालसगुत्तस्स नारियाए देवाणंदाए माहणीए जालंधरसगुत्ताए कुचिंसि गप्नात्तए वक्तं पासइ, पासित्ता हस्तुचित्तमाणंदिए णंदिए परमाणंदिए 'पीअमणे परमसोमणस्सिए दरिसवसविसप्पमाणहियए । धाराहयनीवसुरनि कुसुमचंचुमालश्यकससियरोमकूवे विकसियवरकमलनयणवयणे । पयलिय-वरकडग-तुडिय-केकर-मनड-कुंडल-दार-विरायंतवचे पालंबपलंबमाणघोलंतनूसणधरे, ससंनमं तुरिअं चवलं,सुरिंदे सीदासणा अनुठे, अनुत्तिा पायपीढाओ १ पीइमणा. २ सुरहि. ॥४॥ For Private Personal use only Page #13 -------------------------------------------------------------------------- ________________ पच्चोरुहर, पच्चोरुहित्ता वेरुखिय-वरिहरिठंजण-निजणोवि (वचि) अ-मिसिमिसिंत-मणिरयणमंमिश्र पाउया उमुअर, उमुश्त्ता एगसाडिअं उत्तरासंगं करेइ, करित्ता अंजलिमलिअग्गहने तिबयरानिमुहे सत्तष्पयाइं अणुगबइ, सत्तघ्पयाई अणुगचित्ता वाम जाणुं 'अंचइ, अंचित्ता दाहिणं जाणुं धरणिअखंसि साइट्ट तिरकुत्तो मुशहाणं धरणियलंसि । निवेसेइ, निवेसित्ता ईसिं पञ्चन्नमइ, पञ्चुन्नमित्ता कडगतुडिअर्थनिआउं जुआऊ साहरेश सादरित्ता करयलपरिग्गदिअं दसनदं सिरसावत्तं मबए अंजलिं कट्ट एवं वयासी ॥ १४ ॥ नमुबु णं अरिहंताणं जगवंताणं, आगराणं तिबयराणं सयंसंबुझाणं, पुरिसुत्तमाणं पुरिससीदाणं, पुरिसवरपुमरीयाणं पुरिसवरगंधदबीणं, लोगुत्तमाणं लोगनाहाणं लोगदियाणं लोगपश्वाणं लागपजाअगराणं, अनयदयाणं चरकुदयाणं मग्गद १ अंचेइ २ साहरइ For Private Personal Use Only Rainelibrary.org Page #14 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कटप० ॥ ५ ॥ &********************************* Jain Education! se याणं सरणदयाणं जीवदयाणं बोदिदयाणं, धम्मदयाणं धम्मदेसयाणं धम्मनायगाणं || धम्मसारदीणं धम्मवरचाजरंतचक्कवट्टीणं, दीवो ताणं सरणं गई पहा अप्पडिदयवरनाणदंसणधराणं विप्रट्टनमाणं, जिणाणं जावयाणं तिन्नाणं तारयाणं बुझाणं बोदयाणं मुत्ताणं मोगाणं सर्व्वन्नूणं, सबद रिसीणं, सिव-मयल - मरुच्यमांत-मस्कय-मवाबाद-मपुरावित्ति - सिद्दिगइनामधेयं ठाणं संपत्ताणं, नमो जिणाणं जियजयाणं ॥ नमुटु ए समणस्स नगवर्ड महावीरस्स [आइगरस्स चरमतिवयरस्स ] पुवतिचयर निद्दिहस्स जाव संपाविकामस्स ॥ वंदामि णं जगवंतं तचगयं इदगए, पासन मे जगवं तचगए इदयं ति कट्टु समणं जगवं महावीरं वंदइ नमसइ, वंदित्ता नमंसित्ता सीदासणवरंसि पुरवानिमुदे सन्निसन्ने ॥ तरणं तस्स सक्कस्स देविंदस्स देवरन्नो अयमेरूवे नए चिंतिए पचिए मणोगए संकप्पे समुप्पा ॥ १५ ॥ न खलु : ********** बारसो. ॥५॥ Page #15 -------------------------------------------------------------------------- ________________ Jain Education ********* एयं नूयं, न एयं जवं, न एयं नविस्सं, जं णं अरिहंता वा चक्कवट्टी वा बलदेवा वा वासुदेवा वा अंत कुलेसु वा पंतकुलेसु वा तुच्छकुलेसु वा दरिद्दकुलेसु वा किवणकुलेसु वा रिकागकुलेसु वा मादणकुलेसु वा प्रायासु वा प्रायाइति वा, आयाइस्संति वा ॥ १६ ॥ एवं खलु परदंता वा चक्कवट्टी वा बलदेवा वा वासुदेवा वा, उग्गकुलेसु वा जोगकुलेसु वा रायस्मकुलेसु वा इस्कागकुलेसु वा खत्तियकुलेसु वा दरिवंसकुलेसु वा अन्नयरेसु वा तदप्पगारेसु विसु-जाइ-कुल-वंसेसु प्रायासु वा प्रायाइति वा, प्रायाइस्संति वा ॥ १७ ॥ चिपु एसे वि नावे लोगछेरयनूए प्रांताहिं नस्सपिणी उसप्पिणी दिं विइक्कंताहिं समुप्पकइ, ( ग्रं. १००) नामगुत्तस्स वा कम्मस्स की एस्स प्रवेश्यस्स प्रणिणिस्स उदपणं, जं णं परिदंता वा चक्कवट्टी वा बलदेवा वा वासुदेवा वा, अंतकुलेसु वा पंतकुलेसु वा तुच्चकुलेसु वा दरिद्दकुलेसु वा निस्कागकुलेसु वा किव ********* Page #16 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कटप० ॥६ ॥ कुलसुवा, आयाइंसु वा, आयाति वा, आयाइरसंति वा, कुछिसि गन्नत्ताए वक्रमिंसु. बारसो. वा वक्कंमति वा वकंमिस्संति वा, नो चेव णं जोणीजम्मणनिरकमणेणं निकमिंसु वा । निकमंति वा निकमिस्संति वा ॥१७॥ अयं च णं समणे जगवं महावीरे जंबुद्दीवे दीवे । जारदे वासे मादणकुंमग्गामे नयरे उसनदत्तस्स मादणस्स कोडालसगुत्तस्स नारियाए देवाणंदाए मादणीए जालंधरसगुत्ताए कुडिसि गलत्ताए वक्रते ॥१॥ तं जीअमेअं तीअ-पचुप्पन्न-मणागयाणं सक्काणं देविंदाणं देवरायाणं, अरदंते जगवंते तदप्पगारेहिंतो अंतकुलेदितो पंतकुलेटिंतो तुडकुलेटिंतो दरिदकुलेदितो निकागकुलेहिंतो किवण। कुलेदितो मादणकुलेदितो तहप्पगारेसु उग्गकुलेसु वा नागकुलेसु वा रायन्नकुलेसु वा नायखत्तिय-हरिवंसकुलसु वा अन्नयरेसु वा तदप्पगारेसु विसुक्ष्जाश्कुलवंसेसुवा' सादरावित्तए, तं सेयं खलु ममवि समणं लगवं महावीरं चरमतिबयरं पुषतिबयरनिदि; १ जाव रजसिरिं कारेमाणेसु पालेमाणेसु. ****RRRRRRRRRRRRRRRRRRRRRRE ॥६॥ For Private Personal Use Only ainelibrary.org Page #17 -------------------------------------------------------------------------- ________________ **** ******* माहणकुंमग्गामा नयराजे उसनदत्तस्स मादणस्स कोडालसगुत्तस्स नारियाए देवा दाए मादणीए जालंधरसगुत्ताए कुबी खत्तियकुंमग्गामे नयरे नायाणं खत्तिआणं सिचस्स खत्तियस्स कासवगुत्तस्स नारियाए तिसलाए खत्तिआणीए वासिहसगुत्ताए कुचिसि गप्नत्ताए सादरा वित्तए । जे वि य णं से तिसलाए खत्तियाणीए गन्ने तंपि य णं । देवाणंदाए माहाणीए जालंधरसगुत्ताए कुचिंसि गप्नत्ताए साहरावित्तए-त्ति कटु एवं संपेदेश, एवं संपेदित्ता हरिणेगमसिं 'अग्गाणीयादिवरं देवं सद्दावेश, सदावित्ता एवं । वयासी-॥२०॥ एवं खलु देवाणुप्पिा ! न एअं अं, न एअं नवं, न एअंज* विस्सं, जं णं अरिहंता वा चक्कवट्टी वा बलदेवा वा वासुदेवा वा अंतकुलेसु वा पंतकुलेसु वा किवणकुलेसु वा दरिदकुलेसु वा तुडकुलेसु वा निकागकेलसु वा आया १ पायत्ताणीया० SRKER EXERRRRRRRRRRRRRRRRERE ** ********* ForPrivate LPersonal use Only Page #18 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प बारसो. इंसु वा, आयाति वा, आयाइसंति वा, एवं खलु अरिहंता वा चक्कवट्टी वा बलदेवा वा, वासुदेवा वा, उग्गकुलेसु वा नोगकुलेसु वा रायन्नकुलेसु वा नायकुलेसु वा खत्तियकुलेसु वा इकागकुलेसु वा हरिवंसकुलेसु वा अन्नयरेसु वा * तहप्पगारेसु विसुङ्जाइकुलवंसेसु आयाइंसुवा, आयाइंति वा, आयाश्स्संति वा ॥२२॥ अवि पुण एसे वि जावे लोगरयलूए अणंतादिं नस्सप्पिणी-उसप्पिणीदिं विश्कताहिं समुप्पङति, नामगुत्तस्स वा कम्मस्स अकीणस्स अवेश्अस्स अणिजिएणस्स, उदएणं, जं णं अरिहंता वा चक्कवट्टी वा बलदेवा वा वासुदेवा वा अंतकुलेसु वा पंतकुलेसु वा तुचकलेसु वा किवणकुलेसु वा दरिद्दकुलेसु वा निकागकुलेसु वा आयाइंसु वा, आयाति वा, आयाइसंति वा, कुचिंसि गन्नत्ताए वक्कमिंसु वा वकमंति वा । वक्कमिस्संति वा, नो चेव णं जोणीजम्मणनिकमणेणं निकामिंसु वा निरकमंति निक ************** ॥७॥ ******** ********** ww.jainelibrary.org Page #19 -------------------------------------------------------------------------- ________________ *********** मिस्संति वा ॥२२॥ अयं च णं समणे जगवं महावीरे जंबुद्दीवे दीवे जारदे वासे मादणकुंमग्गामे नयरे उसनदत्तस्स मादणस्स कोमालसगुत्तस्स नारियाए देवाणंदाए मादणीए जालंधरसगुत्ताए कुडिसि गन्नताए वक्ते ॥२३ ॥ तं । *जीअमेअंतीअ-पच्चुप्पन्न-मणागयाण सक्काणं देविंदाणं देवराईणं,जणं अरहते लगवंते । तदप्पगारेदितो अंतकलेहिंतो पंतकुलेदितो तुबकुलेदितो किवणकुलेहिंतो दरिद्द-* कुलेहिंतो वणीमगकुलेटिंतो जाव माहणकुदोहितो तहप्पगारेसु जग्गकुलेसु वा नोगकुलेसु वा रायन्नकुलेसु वा नायकुलेसु वा खत्तियकुलेसु वा इकागकुलेसु वा हरिवंसकुलेसु वा अन्नयरेसु वा तहप्पगारेसु विसुइजाइकुलवंसेसु साहरावित्तए ॥२४॥ तंगब णं तुमं देवाणुप्पिा ! समणं जगवं महावीरं माहणकंमग्गामा नयराजे उसनदत्तस्स मादणस्स कोमालसगुत्तस्स नारियाए देवाणंदाए माहणीए जालंधरसगुत्ताए कुची BASN*ERGERRRRRRREXI * ****** ** For Private & Personal use only ww.jainelibrary.org Page #20 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प बारसो. ॥७॥ खत्तियकुंग्गामे नयरे नायाणं खत्तियाणं सिश्चस्स खत्तियस्स कासवगुत्तम्स नारियाए तिसलाए खत्तियाणीए वासिसगुत्ताए कुडिसि गप्नत्ताए सादरादि, जे वि अणं से . तिसलाए खत्तियाणीए गन्ने तं पित्र णं देवाणंदाए मादणीए जालंधरसगुत्ताए कुचिंसि | गप्नत्ताए सादरादि, सादरित्ता ममेयमाणत्तिअं खिप्पामेव पच्चप्पिणादि ॥३५॥ तएणं से दरिणेगमेसी 'अग्गाणीयादिवई देवे सक्केणं देविदेणं देवरन्ना एवं वुत्ते समाणे हछे । जाव-दयहियए करयल-जाव तिकट्टु “जं देवो आणवेश्” त्ति आणाए विणएणं वयणं । पडिसुणे, पडिसणित्ता उत्तरपुरविमं दिसीनागं अवक्कम, अवक्कमित्ता वेनविअसमुग्याएणं समोदणइ, वेनविअसमुग्घाएणं समोदणित्ता संखिजाइं जोअणाइं दं निसिरइ, तंजदा,-'रयणाणं वइराणं वेरुविणं 'लोदिअकाणं 'मसारगलाणं हंसगनाणं "पुलयाणं सोगंधियाणं 'जोइरसाणं "अंजणाणं "अंजणपुखयाणं जायरूवाणं १ पायताणीया० **88XXXXRRRRRRRI ॥ ॥ X For Private Personal Use Only Page #21 -------------------------------------------------------------------------- ________________ RESERES98986RRNX** "सुनगाणं "अंकाणं "फलिदाणं "रिहाणं, अदाबायरे पुग्गले परिसाडेश, परिसाडित्ता अहासुहुमे पुग्गले परिआदियश् ॥ २६॥ परियाश्त्ता उच्चपि वेविअसमुग्घाएणं |समोदणइ, समोदणित्ता उत्तरवेनवियरूवं विजवइ, विनवित्ता ताए किछाए तुरियाएं चवलाए चंमाए जणाए जदूआए सिग्घाए दिवाए 'देवगईए वीश्वयमाणे वीईवयमाणे * तिरिअमसंखिजाणं दीवसमुद्दाणं मऊमज्जेणं जेणेव जर्बुद्दीवे दीवे, जेणेव जारदे वासे जेणेव मादणकुंमग्गामे नयरे, जेणेव उसनदत्तस्स मादणस्स गिदे, जेणेव देवाणंदा मादणी, तेणेव नवागबइ, उवागबित्ता आलोए समणस्स जगव महावीरस्स पणामं करेइ, पणामं करित्ता देवाणंदाए मदाणीए सपरिजणाए उसोवणिं दवइ,उसोवणिं । दलित्ता असुन्ने पुग्गले अवदरइ, अवदरित्ता सुन्ने पुग्गले परिकवर, परिकवित्ता 'अणु१ छेआए इति कचित् पाठः Main Education International For Private Personal Use Only Page #22 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० ॥ ए ॥ **************************** जान मे जयवं' ति कट्टु समणं जगवं मदावीरं प्रवाबादं अबाबादेणं दिवेण पदावे करयल संपुडेणं गिलइ, समणं जगवं मदावीरं करयलसंपुडेणं गिह्नित्ता जेणेव खत्तियकुंरुग्गामे नयरे, जेणेव सिस्स खत्तिप्रस्स गिदे, जेणेव तिसला खत्तियाणी, तेणेव नवागढइ, तेणेव जवागवित्ता तिसलाए खत्तियाणीए सपरिजणाए सोणिं दलइ, सोप्रणि दलित्ता सुने पुग्गले प्रवदर, अवदरित्ता सुने पुग्गले परिकवेइ, परिकवित्ता समां जगवं महावीरं प्रवाबाद नाबादेणं दिवेणं पढ़ावेणं तिसलाए खत्तिप्राणीए कुंचिंसि गनत्ता 'सादरइ, जे विच्य एां से तिसलाए खत्तिच्खाणीए गने तं पित्र णं देवाणंदाए | मादणीए जालंधरसगुत्ता कुचिंसि गनत्ताए सादरइ, सादरित्ता जामेव दिसिं पानप्रूए तामेव दिसिं पडिगए ॥ २७ ॥ ताए उक्किठाए तुरिच्याए चवलाए चंगाए जयणाए उध्दू१ इ, साहरिता इति कचिदधिकः । बारसो. ॥ ए ॥ Page #23 -------------------------------------------------------------------------- ________________ |आए सिघाए दिखाए देवगईए, तिरिच्प्रमसंखिजाणं दीवसमुद्दाणं मज्छंमज्जेणं जो - एसयसादस्सिएहिं विग्गदेहिं उप्पयमाणे उप्पयमाणे जेणामेव सोदम्मे कप्पे सोदम्मवडिंसर विमाणे सक्कंसि सीदासांसि सक्के देविंदे देवराया, तेणामेव जवागच्चइ, जवागवित्ता सक्क्स्स देविंदस्स देवरन्नो एप्रमाण तिच्यं खिप्पामेव पञ्चप्पिइ ॥ २८ ॥ तेां काले तेणं समएणं समणे जगवं मदावीरे तिन्नाणोवगए प्रावि हुच्चा, |तंजदा - सादरिजिस्सामि त्ति जाणइ, सादरिक्रमाणे न जाणइ, सादरिए मि त्ति जाइ ॥ २९ ॥ तेां कालेां तेणं समएणं समणे जगवं महावीरे जे से वासाणं तच्चे मासे पंचमे परके सो बहुले, तस्स एणं आसोच्अबदुलस्स तेरसी परके एां बासी इराईदिएदिं विश्क्तेदिं तेसी इमस्स राईदिप्रस्स अंतरा वट्टमाणे दिया कंपणं देवेां दरि १ वट्टमाणस्स क०सु० Page #24 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्पन बारसो. ॥१०॥ ***** 1*38********************** गमेसिणा सक्कवयणसंदिरेणं मादणकुंमंग्गामा नयरा उसनदत्तस्स मादणस्स - कोमालसगुत्तस्स नारिआए देवाणंदाए मादणीए जालंधरसगुत्ताए कुबीउ खत्तियकुंमग्गामे नयरे नायाणं खत्तिआणं सिबस्स खत्तिअस्स कासवगुत्तस्स नारिआए तिस खाए खत्तिआणीए वासिम्सगुत्ताए पुवरत्तावरत्तकालसमयंसि हजुत्तराहिं नरकत्तेणं जोग* मुवागएणं अवाबादं अवाबादेणं कुचिसि गप्नत्ताए साहरिए॥ ३० ॥ जं रयणिं च णं समणे जगवं महावीरे देवाणंदाए मादणीए जालंधरसगुत्ताए कुबी तिसखाए खत्तिआणीए वासिम्सगुत्ताए कुचिंसि गप्नत्ताए सादरिए, तं रयणिं च णं सा देवणंदा मादणी सयणिज्जंसि सुत्तजागरा उदीरमाणी उदीरमाणी श्मयारूवे उराले कल्लाणे सिवे धन्ने मंगल्ले सस्सिरीए चउद्दस महासुमिणे तिसलाए खत्तियाणीए दडे ति पासित्ता णं पडिबुझा, तंजदा-गया गादा ॥ ३१ ॥ जं रयणिं च णं समणे जगवं महावीरे ******KRRRRRRRRO ॥१०॥ Jain Education For Private & Personal use only ineraryong Page #25 -------------------------------------------------------------------------- ________________ देवाणंदाए माहणीए जालधरसगुत्ताए कुछी तिसखाए खत्तिआणीए वासिठसगुत्ताए * कुबिसि गप्नत्ताए साहरिए, तं रयणिं च णं सा तिसला खत्तिआणी तंसि तारिसगंसि वासघरंसि अग्निंतर सचित्तकम्मे बाहिर दूमिअघहम विचित्तनल्लोअचिल्लियतले मणिरयणपणासिअंधयारे बहुसमसुविनत्तनूमिन्नागे पंचवन्न-सरस-सुरनि-मुक्कपुप्फपुंजोवयारकलिए कालागुरु-पवरकुंरुक-तुरुक्क-मऊतधूवमघमघंतगंधुध्धुयानिरामे सुगंधवरगंधिए गंधवट्टिनूए, तंसि तारिसगंसि सयणिऊसि सालिंगणवट्टिए उन बिब्बोअणे जन उन्नए मज्के णयगंन्नीरे गंगापुलिणवालुअनद्दालसालिसए उअविअ-खोमिअ गुल्लपट्टपडिबन्ने सुविरश्अरयत्ताणे 'रत्तंसुयसंवुए, सुरम्मे आईणग-रूय-बूर-नवणीअतूल-तुल्लफासे सुगंधवरकुसुमचुन्नसयणोवयारकलिए, पुवरत्तावरत्तकालसमयंसि सुत्तजागरा उहीरमाणी हीरमाणी इमारूवे जराले जाव चउद्दस महासुमिणे पासित्ता । १ संवुडे, २ एआरूवे. NRORRRRRRRRRRRRRRRR** lain E stantematon For Private Personal use only wanw.ainetorary.org Page #26 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प णं पडिबुझा, तंजहा".'गय-वसह-'सीद-'अनिसेय-दाम-'ससि-"दिणयरं-ऊयं- बारसो. ॥११॥|| कुंनं। पनमसर-"सागर-विमाणनवण-रयणुच्चय-"सिदिं च॥१॥॥३॥ तएणं । सा तिसला खत्तिआणी तप्पढमयाए 'तउंअचनदंत-मूसिअगलिअविपुलजलहर-हारनिकर-खीरसागर-ससंककिरण-दगरय-रययमहासेलपंमुरतरं समागयमहुयरसुगंधदाणवा|सियकपोलमूलं देवरायकुंजरं(र)वरप्पमाणं पिबइ सजलघणविपुलजलहरगजियगंनी- रचारुघोसं 'नं' सुन्नं सव्वलकणकयंबिअं वरोरुं ॥२॥३३॥ त पुणो धवलकमलपत्तपयरारेगरूवप्पनं पदासमुदर्जवदारेहिं सवर्ड चेव दीवयंतं असिरिनरपिल्लणाविसप्पंतकंतसोहंतचारुककुहं तणु-'सुश्-सुकुमाललोमनिश्चविं थिर-सुबइ-मंसलोवचित्रलह-सुविनत्त-सुंदरंगं पिच घण-वट्ट-सह-नक्कि-विसिह-तुप्पग्ग-तिकसिंगं दंतं सिवंस। १ नास्तीदं क० सु०, २ सुद्ध क० मु०, For Private &Personal use only. Main Educatiolindia Liriainelibrary.org Page #27 -------------------------------------------------------------------------- ________________ माणसोहंतसुदंतं वसई अमिअगुणमंगलमुहं ॥२॥३॥त पुणो दारनिकर-खीरसागरससंककिरण-दगरय-रययमहासेलपंमुरंग' (ग्रं० २००) रमणिकपिबणिजं थिर-सह-पनछ वट्ट-पीवर-सुसिलिह-विसिम्-तिक-दाढाविडंबिअमुहं परिकम्मिअजच्चकमलकोमल-पमाणसोहंतलहन रत्तुप्पलपत्तमउअसुकुमालताबुनिल्लालियग्गजीदं मूसागयपवरकणगताविअआवत्तायंतवट्टतमियविमलसरिसनयणं विसालपीवरवरोरुं पडिपुन्नविमलखंधं मिनविसय-सुहम-लकणपसब-विचिन्नकेसराडोवसोदिअं ऊसिअ-सुनिम्मिअ-सुजाय-अप्फोडिअलंगूलं सोमं सोमाकारं लीलायंतं नहयला उवयमाणं नियगवयणमश्वयं पिड सा गाढतिकग्गनदं सीहं' वयणसिरिपल्लवपत्तचारुजीदं ॥३॥३५॥ त पुणो पुन्नचंदवयणा, उच्चागयगणलहसंग्निं पसनरूवं सुपरहिअकण गकुम्मसरिसोवमाणचलणं १ पंडुरतरं. २ पलंब० (क० कि०). ३ कणगमय० क० कि. Main Education International For Private & Personal use only Jw.jainelibrary.org Page #28 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० ॥ १२ ॥ **** अच्चुन्नय-पीए र इ-मंसल - उन्नय-तणु तंब -नि-इनदं कमलपलाससुकुमाल कर चरणकोमलवरंगुलिं कुरुविंदावत्तवट्टाणुपुवजंघं निगूढजाणुं गयवरकरसरिसपी वरोरुं चामीकररइप्रमेदलाजुत्तकंत विविन्नसो चिक्कं जच्चंजण - नमर- जलयपयर - उप्र-सम-संदिप्र-तणु- प्राइज- लमद - सुकुमाल - मय - रमणि रोमराई नाभी मंडलसुंदर विसालपसचजघणं | करयलमा इपसचतिवलियमज्छं नाणामणिकणग-रयण-विमलमदातवणिजामरण-भूस विराइ' यंगोवंगिं हारविरायंतकुंदमालपरिण-६जलजलितथणजुअल विमलकलसं याइयपत्तिच्प्रविनू सिएणं सुनगजाबुजलेणं मुत्ताकलावएणं उरबदीणारमाल विरइएणं कंठमणिमुत्तणं कुंडल जुलुल्लसंत सोवसत्तसोनंतसप्पनेणं सोनागुणसमुदपणं प्राणएकुटुंबिएणं कमलामल विसालरम णिलोप्रणं कमलपकलंतकरगदिच्प्रमुक्कतोयं लीला१ मंगुर्वर्ग क० कि०, २ लोअणि. Jain Education Hional : बारसो. ॥ १२ ॥ Page #29 -------------------------------------------------------------------------- ________________ वायकयपकएणं सुविसद-कसिण-घण-सएद-संबंतकेसह पनमद्दहकमलवासिणिं 'सिरिं' गवई पिचर हिमवंतसेलसिहरे दिसागइंदोरुपीवरकरानिसिच्चमाणिं ॥४॥ ३६॥ त पुणो सरसकुसुममंदारदामरमणिकनूअं चंपगासोग-पुन्नाग-नाग-पिअंगु-सिरीस-मुग्गरग-मल्लिा -जाइ-जूहि-अंकोल्ल-को-कोरिंट-पत्तदमणय-नवमालिअ-बनल-तिखय-वासंतिअ-पनमुप्पल-पाल-कुदा-इमुत्त-सहकारसुरनिगंधिं अणुवममणोहरेणं गंधेणं दस । दिसा वि वासयंतं सबोग्असुरनिकुसुममल्लधवलविलसंतकंतबहुवन्ननत्तिचित्तं बप्पयमहुअरि-नमरगणगुमगुमायतनिखितगुंजंतदेसनागं 'दाम' पिब नहंगणतलाउँ उवयंतं ॥५॥३७॥ 'ससिं' च गोखीर-फेण-दगरय-रययकलसंपंरं सुनं हिअयनयणकंतं , पडिपुन्नं तिमिरनिकरघणगुदिरवितिमिरकरं पमाणपखंतरायव्हं कुमुअवणविबोदगं । निसासोदगं सुपरिमच्दप्पणतलोवमं हंसपडुवन्नं जोइसमुहमंमगं तमरिपुं मयणसरापू १ मंदारपरिजातिय-चंपग-वि(ब)उळ-मचकुंद-पाडल-जाय-जूहिय-सुगंधगंधपुप्फमालासहकार० 8ERSTARR86****%%88%%** For Private Personal use on Page #30 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० बारसो. ॥१३॥ रगं समुद्ददगपूरगं उम्मणं जणं दश्अवजिअं पायएदि सोसयंतं पुणो सोमचारुरूवं पिच सा गगणमंमलविसालसोमचंकम्ममाणतिलगं रोहिणिमणहिअयवल्लहं । देवी 'पुन्नचंदं समुल्लसंतं ॥६॥३॥ तजे पुणो तमपमलपरिप्फुडं चेव तेअसा पञ्जालंतरूवं, रत्तासोग-पगास-किंसुअ-सुअमुह-गुंजइ-रागसरिसं कमलवणालंकरणं अंकणं जोइसस्स अंबरतलपश्वं हिमपम्लगलग्गदं गहगणोरुनायगं रत्तिविणासं उदयत्यमणेसु । मुहुत्तसुददंसणं उन्निरिकरूवं रत्तिसुइंतज्प्पयारपमद्दणं सीअवेगमहणं पिछइ मेरुगिरिसययपरियट्टेयं विसावं ‘सूरं रस्सीसहस्सपयखियदित्तसोदं ॥॥ ३५॥तर्ज पुणो जच्चकणगलछिपहिअं समूहनील-रत्त-पीय-सुक्किल्ल-सुकुमाबुल्लसियमोरपिचकयमुश्यं 'धयं । अहियसस्सिरीयं फालिअ-संखंक-कुंद-दगरय-रययकलसपंमुरेणं मबयोण सीदेण ॥१३॥ १ मुद्धत. २ परियट्टयंत. JainEducation For Private & Personal use only nww.jainelibrary.org Page #31 -------------------------------------------------------------------------- ________________ **** ***** * * रायमाणेण रायमाणं नित्तुं गगणतलममलं चेव ववसिएणं पिबइ सिव-मयमारुयलयादयकंपमाणं अश्प्पमाणं जणपिणिजारूवं ॥॥ ४० ॥ त पुणो जच्चकंचणुकालंतरूवं निम्मलजलपुम्ममुत्तमं दिप्पमाणसोदं कमलकलावपरिरायमाणं पडिपुस्मसवमंगलनेयसमागमं पवररयणपरायंतकमलहियं नयणनूसणकरं पनासमाणं सब चेव दीवयंतं सोमलजीनिनेलणं सबपावपरिवजिअं सुन्नं नासुरं सिरिवरं सबोजयसुरनिकुसुमआसत्तमल्लदामं पिब सा ‘रययपुस्मकलसं॥॥४॥त पुणो । पुणरवि रविकिरणतरुणबोहियसहस्सपत्तसुरनितरपिंजरजलं जलचर-पदकर-परिदलगमनपरिजुङमाणजलसंचयं महंतं जसंतमिव कमल-कुवलय-नप्पल-तामरस-'मरीउरुसप्पमाणसिरिसमुदएणं रमणिकरूवसोदं पमुश्यंतनमरगणमत्तमढुयरिगणुक्करोलिङमाणकमलं कायंबग-बलादय-चक्क कलहंस-सारस-गविप्रसनणगणमिढुणसेविऊमाणसखिलं **XXXXXXXXXXX388****** ** * **** Main Education international For Private & Personal use only winw.jainelibrary.org Page #32 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कम्प ॥१४॥ पमिणिपत्तोवलग्गजलबिउनिचयचित्तं पिब सा दिययनयणकंतं 'पनमसरं' नाम सरं । बारसो. सरुदानिरामं॥१०॥४॥ त पुणो चंदकिरणरासिसरिससिरिवबसोहं चनर्गमणपवड्डमाणजलसंचयं चवलचंचलुच्चायप्पमाणकल्लोखलोलंततायं पडुपवणादयचलियचवलपा*गडतरंगरंगंतनंगखोखुब्लमाणसोनंतनिम्मलुक्कडनम्मीसहसंबंधधावमाणोनियत्तनासुर तरानिरामं महामगर-मन-तिमि-तिमिगिल-निरुध-तिलितिलियानिघायकप्पूरफेणपसरं - मदानईतुरियवेगसमागयत्नमगंगावत्तगुप्पमाणुच्चलंतपच्चोनियत्तनममाणलोलसलिलं पिवह 'खीरोयसायरं' सा रयणीकरसोमवयणा ११॥४३॥त पुणो तरुणसूरमंमलसमप्पदं दिप्पमाणसोनं उत्तमकंचणमहामणिसमूदपवरतेयसहस्सदिप्पंतनदप्पईवं कणगपयरवंबमाणमुत्तासमुजालं जलंतदिवदामं ईहामिग-उसन-तुरग-नर-मगर-विदग-वालग ॥१४॥ १ चउगुण Jain Educatie For Private Personal Use Only Page #33 -------------------------------------------------------------------------- ________________ किन्नर-रुरु-सरन-चमर-संसत्त-कुंजर-वणलय-पनमलय-जत्तिचित्तं गंधवोपवङमाणसंपुस्म*घोसं निच्चं सजलघणविनलजलहरगजियसद्दाणुणाश्णा देवउँदिमदारवेणं सय लमवि जीवलोयं पूरयंतं, कलागुरु-पवरकुंदुरुक्क-तुरुक्क-मऊतधूर्व-चासंगउत्तममघमघंतगंधुदुयानिरामं निच्चालोयं सेयं सेयप्पनं सुरवरान्निरामं पिचइ सा साउँक्नोगं 'वरविमाणपुमरीयं'।१॥४४ात पुणो पुलग-वेरिंदनील-सासग-कक्केयण-लोहियस्क-मरगय-मसारगल-पवाल-फलिह-सोगंधिय-हंसगन्ज-अंजण-चंदप्पह-वररयणेहिं महियसपहिअंगगणमंडखंतं पन्नासयंतं, तुंगं मेरुगिरिसंनिगासं पिब सा रयणनिकररासिं॥१३॥४५॥ सिदि' च सा विनलुजालपिंगलमदुघयपरिसिच्चमाणनिध्दूमधगधगाश्यजवंतजालुङलानिरामं तरतमजोगजुत्तेहिं जातपयरेहिं अमुम्ममिव अणुप्पश्मं पिच जालुङालणगअंबरं व कब पयंतं अश्वेगचंचलं सिहिं ॥१४॥४६॥ श्मे एयारिसे सुने सोमे पियदं १ धूवसारसंगयं (क० कि० वृत्तौ पाठान्तरम् ) Jain Education Page #34 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कहप० सणे सुरूवे सुविणे दखूण सयणमज्के पडिबुझा अरविंदलोयण दरिसपुलश्अंगी॥ बारसो. एए चनदस सुमिणे, सवा पासेई तिबयरमाया, जं रयणिं वक्कमई कुचिंसि महायसो अरिदा ॥ ४ ॥ तएणं सा तिसला खत्तियाणी इमे एयारूवे उराले चनद्दस महासुविणे पासित्ता णं पडिबुझा समाणी दस्तुठ-जाव-हियया धाराहयकयंबपुप्फगं पिव समूस्ससिअरोमकूवा सुविणुग्गरं करेइ, करित्ता सयणिका अनुठे, अनुत्तिा पायपीढा । पच्चोरुहइ, पञ्चोरुहित्ता अतुरिअमचवलमसंनंताए अविलंबियाए रायहंससरिसीए गईए । जेणेव सयणि जेणेव सिच्चे खत्तिए तेणेव उवागवइ, उवागवित्ता सिचं खत्तिकं ताहिं शाहिं कंताहिं पियाहिं मणुन्नाहिं मणोरमाहिं उरावाहिं कल्लाणाहिं सिवाहिं । धन्नाहिं मंगल्लादिं सस्सिरीयाहिं दिययगमणिजादिं दिययपल्दायणिजाहिँ मिनमदुर १ पासह १५॥ Jain E For Private & Personal use only Page #35 -------------------------------------------------------------------------- ________________ मंजुलाहिं गिराहिं संलवमाणी संलवमाण। पडिबोदेश॥४॥तएणं सा तिसला खत्तिआणी : *सिनेणं रमा अन्नणुमाया समाणी नाणामणि-कणग-रयण-नत्तिचित्तंसि नदासणंसि *निसीयइ, निसीइत्ता आसबा वीसला सुदासणवरगया सिवं खत्तिअं ताहिं काहिं। *जाव संलवमाणी संलवमाणी एवं वयासी ॥४ा एवं खलु अहं सामी! अऊ तंसि तारिसगंसि सयणिजंसि वरम जाव पडिबुझा, तंजदा-गयवसह गाहा । तं एएसिं सामी! नरालाणं चउदसएदं महासुमिणाणं के मन्ने कल्लाणे फल वित्तिविसेसे नविस्स? ॥५॥ तएणं से सिने राया तिसलाए खत्तिाणीए अंतिए एयम; सुच्चा निसम्म दस्तुचित्ते आणदिए पीश्मणे परमसोमणस्सिए हरिसवसविसप्पमाणहियए धारादयनीवसुरनिकुसुमचंचुमालश्यरोमकूवे ते सुमिणे जंगिएदेई, ते सुमिणे उगिएिदत्ता ईदं अणुपविसइ, ईहं अणुपविसित्ता अप्पणो साहाविएणं मश्पुवएणं बुद्धिविमाणेणं तेसिं १ ओगिण्हइ. Jain E n ForPrivate LPersonal use Only ainelibrary.org Page #36 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० **** ॥१६॥ ****** ** सुमिणाणं अबुग्गरं करेइ, अबुग्गदं करित्ता तिसलं खत्तिआणि ताहिं श्छादिं जाव । बारसो. * मंगल्लाहिं मियमदुरसस्सिरीयाहिं वग्गूर्हि संखवमाणे संखवमाणे एवं वयासी ॥५१॥ *राला णं तुमे देवाणुप्पिए! सुमिणा दिहा, कल्लाणा णं तुमे देवाणुप्पिए! सुमिणा । दिहा, एवं सिवा, धन्ना, मंगला, सस्सिरीया, आरुग्ग-तुहिन्दीदान-कल्लाण-(ग्रं.. ३००) मंगलकारगाणं तुमे देवाणुप्पिए! सुमिणा दिशा, तंजदा,-अबलालो देवाणुप्पिए.. लोगलानो देवाणुप्पिए! पुत्तलानो देवाणुप्पिाए! सुकलालो देवाणुप्पिए! रङलानो देवाणुप्पिए!-एवं खलु तुमे देवाणुप्पिए! नवएवं मासाणं बहुपडिपुरमाणं अच्छमाणं राईदियाणं विश्कंताणं अम्हं कुलकेचं, अम्दं कुलदीवं, कुलपवयं, कुलवडिंसयं, कुलतिलयं, कुलकित्तिकरं, कुलवित्तिकरं, कुलदिणयरं, कुलाधारं, कुलनंदिकर, कुलजसकरं,कुलपायवं,* कुलविवक्षणकरं, सुकुमालपाणिपायं, अहीणसंपुरमपंचिंदियसरीरं, ससिसोमाकारं, कंतं, ....१ पडिपुण्ण ******* ॥१६॥ *** Jan Educator For Private & Personal use only P ainelibrary.org Page #37 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ***ERXXXX6%%XXXXXXXXXXXX *पियदसणं,सुरूवं दारयं पयादिसि ॥५॥ से विजणं दारए उम्मुक्कबालनावे विनायपरिण यमित्ते जुवणगमणुपत्ते सूरे वीरे विकंते विबिन्नबिनलबलवाहणे रऊवई राया नविस्स। ॥५३॥ तंजराला णं तुमे देवाणुप्पिया! सुमिणा दिट्ठा, जाव उच्चपि तच्चंपि अणुवूहशा तएणं सा तिसला खत्तियाणी सिचस्स रमो अंतिए एयमहं सुच्चा निसम्म दस्तुम जाव-दियया करयलपरिग्गदिअं दसनदं सिरसावत्तं मलए अंजलिं कटु एवं वयासी ॥५४॥ एवमेयं । सामी ! तहमेयं सामी ! अवितहमेयं सामी! असंदि-इमेयं सामी ! इनिअमेयं सामी ! पडिविअमेयं सामी ! इनिअपडिचिअमेयं सामी ! सच्चे णं एसमठे-से जहेयं तुब्ने । वयद त्ति कटु ते सुमिणे सम्म पडिबइ, पडिबित्ता सिझनेणं रमा अप्नणुमाया समाणी नाणामणिरयण जत्तिचित्ता नदासणा अनुश्, अनुत्तिा अतुरिय-मचवल-मसंनंताए अविखंत्रिआए रायहंससरिसीए गईए, जेणेव सए सयणिजे, तेणेव उवागह, Jain Fiston International For Private & Personal use only Page #38 -------------------------------------------------------------------------- ________________ *** कल्प बारसो. ॥१७॥ ** **** उवागबित्ता एवं वयासी ॥ ५५ ॥ मा मे एए उत्तमा पदाणा मंगला सुमिणा दिशा अन्नहिं पावसुमणेहिं पडिहम्मिस्संति त्ति कट्ठ देवयगुरुजणसंबधादिं पसबाहिं मंगल्लाहिं| धम्मियाहिं लहाहिं कहाहिं सुमिणजागरिअं जागरमाणी पडिजागरमाणी विहर३॥५६॥ तएणं सिझले खत्तिए पञ्चूसकालसमयंसि कोमुंबिअपुरिसे सद्दावेश सद्दावित्ता एवं वयासी| जाखिप्पामेव नो देवाणुप्पिा ! अज सविसेसं बाहिरिअंउवठाणसालं गंधोदयसित्तं । सुश्असंमजिउँवलित्तं सुगंधवरपंचवमपुप्फोवयारकलिअं कालागुरु-पवरकुंजुरुक्क-तुरुक्कमज्जंतधूव-मघमघंतगंधुदुयाभिरामं सुगंधवरगंधियं गंधवट्टिनूअं करेद कारवेद, करित्ता कारवित्ता य सीहासणं रयावेद, रयावित्ता ममेयमाणत्तियं खिप्पामेव पञ्चप्पिणह ॥ ५ ॥ तएणं ते कोमंबिअपुरिसा सिझनेणं रम्मा एवं वुत्ता समाणा इन जाव दियया करयल जाव अंजलिं कटु ‘एवं सामि'त्ति आणाए विणएणं वयणं पडिसु ** * * ॥१७॥ *R E Jain Ede For Private & Personal use only Millainelibrary.org Page #39 -------------------------------------------------------------------------- ________________ R*********** *णंति, पडिसुणित्ता सिचस्स खत्तिअस्स अंतिआठ पडिनिस्कमंति, पडिनिकमित्ता जेणेव बादरिआ उवठाणसाला तेणेव उवागचंति, तेणेव उवागवित्ता खिप्पामेव सविसेसं बाहिरियं उवठाणसालं गंधोदगसित्तं सुइं जाव-सीहासणं रयाविति, रयावित्ता । जेणेव सिझने खत्तिए तेणेव उवागबंति, उवागवित्ता करयलपरिग्गदियं दसनई सिरसावतंमबए अंजलिं कट्ठ सिचस्स खत्तिअस्स तमाणत्तिअंपञ्चप्पिणंति॥याणा तएणं सिझने खत्तिए कल्लं पानप्पनायोए रयणीएफुल्लुप्पलकमलकोमलुम्मीलियंमि अदापंमुरे पनाए, रत्तासोग-प्पगासकिंसुअ-सुअमुह-गुंज-धराग-बंधुजीवग- पारावयचक्षणनयण-परहुअसुरतलोअण-जासुअकुसुमरासि-हिंगुलनिअरातिरेअरेदंतसरिसे कमलायरसंम्बोहए बहिअंमि सूरे सहस्सरसिमि दिणयरे तेअसा जलते, तस्स य करपहरापरइंमि अंधयारे १ प्पभाए ( क० मु० ). २ विबोहए. ******** *** Jain Edt For Private Personal Use Only Page #40 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० ॥ १८ ॥ *** बालायवकुंकुमेणं खचिच्य व जीवलोए, सयणिका अनुठे ॥ ६० ॥ अनुत्ता पायपीढा पञ्च्चोरुदइ, पच्चोरु हित्ता जेणेव अट्टणसाला तेणेव जवागच्चर, जवागवित्ता अट्टसालं पविस, अणुपविसित्ता अगवायाम - जोग वग्गण- वामद्दण मल्लजु-करहिं संते परिस्संते सयपाग-सदरसपागेदिं सुगंधव र तिल्लमाइएहिं पीणिजेहिं दीवणी - जेहिं मय णिदिं विंद णिहिं दप्पणिदिं सबिंदियगायपल्दाय पिजेदिं अनंगिए समाणे, तिलचम्मंसि निजणेहिं पडिपु पाणिपायसुकुमालकोमलत लेदिं पुरिसेहिं अनंगण-परिमद्दणु-बल-करणगुण निम्माएदिं बेएहिं दरखेदिं पठेदिं कुसलेदिं मेदावी हिं जित्र्यपरिस्समेदिं, ठिसुदाए मंससुदा तयासुदाए रोमसुदाए चनविदाए सुदपरिकम्मपाए संवादणाए संवादिए समाणे ववगर्यपरिस्समेट्टणसालाई पडिनिकमइ ॥ ६१ ॥ | पडिनिरकमित्ता जेणेव मणघरे तेणेव नवागच्चइ, नवागवित्ता मऊणघरं प्रणुपविस१ अवगयखेयपरिसमे बारसो. ॥ १८ ॥ Page #41 -------------------------------------------------------------------------- ________________ Jain Education ****** ******* इ, अणुपविसित्ता समुत्तजालाकुलाभिरामे विचित्तमणिरयणकुट्टिमतले रमणिके एदाए - मंमवंसि, नाणामणिरयणन त्तिचित्तंसि एदापी ढंसि सुदनिससे, पुप्फोदर दि गंधोदए दि उपदोदएहि सुहोदर दि सुहोददि प्र, कल्लाणकरणपवरमण विदीए मजिए, तत्र को प्रसादिं बहुविदेदिं कल्लाणगपवरमऊणावसाणे पम्दल - सुकुमाल - गंधकासाइपलू दिच्प्रंगे अंदयसुमदग्घदूसरयणसुसंबुडे सरससुर निगोसीस चंदणाणु लित्तगत्ते सुइमालावसगविलेवणे वि-मणिसुवरले कप्पियदार- ६दार- तिसरय- पालंबपलंब माणकडसुत्तसुकयसोने पि-गेविजे अंगुलिजगल लियकयानरणे वरकडगतुडिअर्थनियनुए दिवस स्सिरी ए कुंमलनको आणणे मउडदित्तसिरए दारोचयसुकर व मुद्दिप्रापिंगलंगुलीए पालंब पलंबमाणसुकयपडउत्तरि नाणामणि - कणग- रयण विमल १ नासानीसासवायवभ्वहरचस्खु ३२ वष्णफरिस जुत्त हयला लापेलवाइरेगधवलकण गखचिअंतकमा दूसरपणसुसंवए (क० कि० ) : ****** ainelibrary.org Page #42 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कस्प० वारसा. ॥१ ॥ महरिह-निनणोवचिअ-मिसिमिसिंत-विरश्अ-सुसिलिष्ठ-विसि-लठ-आविध्वीरवलए, किंबहुणा? कप्परुकए विव अलंकिअविजूसिए नरिंदे, सकोरिटमटलदामेणं उत्तेणं धरिऊमाणेणं सेअवरचामराहिं नदुव्वमाणीहिं मंगलजयसद्दकयालोए अणेगगणनायगदमनायग-राईसर-तलवर-माइंबिअ-कोडंबिअ-मंति-महामंति-गणग-दोवारिय-अमच्च-पीढमद्द-नगर-निगम-सिमि-सेणावश्-सबवाह-दूअ-संधिवाल सहिं संपरिखुडे धवलमहामेहनिग्गए श्व गहगणदिप्पंतरिकतारागणाण मज्के ससिव्व पिअदंसणे नरवई नरिंदे नरवसहे नरसीहे अग्नदिअरायतेअलबीए दिप्पमाणे मजणघराओ पडिनिस्कम॥६॥ मजाणघराओ पडिनिस्कमित्ता जेणेव बाहिरिआ उवहाणसाला तेणेव जवागढइ, उवाबित्तासीदासणंसि पुरवानिमुहे निसीअइ, निसीइत्ता अप्पणो उत्तरपुरबिमे दिसीनाए अहनदासणाइंसेअवबपञ्चुचयाइंसिवयकयमगलोवयाराइंरयावे,रयावित्ता अप्पणो १ एगावलि पिणद्धे इत्यादि (क० कि० ) ॥रा JainEducation international For Private Personal use only waaainelorery.org Page #43 -------------------------------------------------------------------------- ________________ अदूरसामते नाणामणिरयणमंमिश्र अहिअपिबणिजं मदग्धवरपट्टणुग्गयंसाहपट्टनत्तिसयचित्तताणं हामिअ-उसन-तुरग-नर-मगर-विदग-वालग-किन्नर-रुरु-सरन-चमर-कुंजरवणलय-पनमलय-जत्तिचित्तं अप्रिंतरिअं जवणिअं अंगवे, अंगवेत्ता नाणीमणिरयणनत्तिचित्तं अबरयमिनमसूरगुबयं सेअवनपञ्चुअंसुमनअं अंगसुहफरिसं विसिहं| |तिसलाए खत्तिाणीए नदासणं रयावे ॥६३॥ रयावित्ता कोमुंबिअपुरिसे सद्दावेश, सद्दावेत्ता एवं वयासी॥६॥ खिप्पामेव जो देवाणुप्पिा ! अंगमदानिमित्तसुत्तबधारए । विविहसबकुसले सुविणलकणपाढए सद्दावेद ॥ तएणं ते कोमुंबिअपुरिसा सिझनेणं । रमा एवं वुत्ता समाणा दन्तु जाव-दियया, करयल जाव-पडिसुणंति ॥६५॥ पडिसुणित्ता सिइबस्स खत्तियस्स अंतिआओ पडिनिस्कमंति, पडिनिकमित्ता कुंमपुरं नगरं । मऊमज्जेणं जेणेव सुविणलकणपाढगाणं गेदाइं तेणेव नवागचंति, नवागबित्ता १ कुंडग्गाम (क० कि०, क० मु.) WERESEXXXXX********* For Private Personal Use Only Page #44 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प *** ॥२०॥ सुविणलकणपाढए सद्दाविति ॥६६॥ तएणं ते सुविणलकणपाढगा सिइबस्स खत्ति- | बारसो. अस्स कोमुंबिअपुरिसेहिं सहावित्रा समाणा हन्तुछ जाव-हियया एहाया कयबलिकम्मा कयकोनअमंगलपायबित्ता सुझप्पवेसाइं मंगलाई वबाइं पवराइं परिहिआ . अप्पमदग्घानरणालंकियसरीरा सिव्य-हरिआलिया-कयमंगलमुशाणा सरहिं सएहिं । गेदेहिंतो निग्गति, निग्गचित्ता खत्तियकुंभग्गामं नगरं मऊमज्केणं जेणेव सि-वस्स रमो नवणवरवमिसगपडिज्वारे तेणेव उवागबंति, उवागचित्ता लवणवरवमिंसगपडिज्वारे, एगो मिलंति, मिलित्ता जेणेव बाहिरिआ उवठाणसाला, जेणेव सिध्ने । खत्तिए, तेणेव उवागबंति, उवागबित्ता करयलपरिग्गदिशं जाव अजलिं कट्ट, सिचं खत्तिअंजएणं विजएणं वझाविति ॥६॥ तएणं ते सुविणलकणपाढगा सिबेणं *॥॥ *रमा वंदिय-पृश्य-सक्कारिअ-सम्माणि समाणा पत्तेअं पत्तेअं पुवन्ननेसु नदासणेसु १ दूर्वावाची देश्यः शब्द, २ अच्चिय-बंदिय-माणिभ-पूइआ (क० कि०) *********** ********* Jain Ede For Private & Personal use only ww.jainelibrary.org Page #45 -------------------------------------------------------------------------- ________________ निसीयंति ॥ ६॥ तएणं सिझचे खत्तिए तिसलं खत्तियाणिं जवणिअंतरियं ठगवेइ, गवित्ता पुप्फफलपडिपुरमहले परेणं विणएणं ते सुविणलरकणपाढए एवं वयासी ॥६॥ एवं खलु देवाणुप्पिया ! अऊ तिसला खत्तियाणी तंसि तारिसगंसि जाव सुत्तजागरा * ओहीरमाणी ओहीरमाणी इमे एयारूवे उराले चउद्दस महासुमिणे पासित्ता णं पडि बुझा ॥ ७० ॥ तंजहा-'गयवसह'गाहा, तं एएसिं चनद्दसएदं महासुमिणाणं देवाणुप्पिया ! उरालाणं के मन्ने कल्लाणे फल वित्तिविसेसे नविरस ? ॥ १॥ तएणं ते सुमिणलकणपाढगा सिश्चस्स खत्तियस्स अंतिए एयमहं सोचा निसम्म हस्तुछ जावयदियया, ते सुमिणे ओगिएदंति, ओगिएिदत्ता ईहं अणुपविसंति, अणुपविसित्ता * अन्नमन्नेणं सहिं संचालिंति, संचालित्ता तसिं सुमिणाणं समा गहिअठा पुचिअठा _१ संलावंति (क० कि० ) Jain Education For Private Personal use only Page #46 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प ॥ १॥ विणिखियहा अनिगयठा सिइबस्स रमो पुरओ सुमिणसबाई उच्चारेमाणा उच्चारेमाणा बारसो. सिवं खत्तियं एवं वयासी ॥ २ ॥ एवं खलु देवाणुप्पिया ! अम्दं सुमिणस बार्योलीसं सुमिणा, तीसं महासुमिणा, बावत्तरि सवसुमिणा दिछा, तब णं देवाणुप्पिया ! अरहंतमायरो वा चक्कवट्टिमायरो वा अरदंतंसि ( ग्रं० ४00) वा चक्कदरंसि वा गन्नं । वक्कममाणंसि एएसिं तीसाए महासुमिणाणं श्मे चउद्दस महासुमिणे पासित्ता णं पडिबुळंति, ॥ ३ ॥ तंजहा-'गयवसह' गाहा ॥४॥ वासुदेवमायरो वा वासुदेवंसि ।। गन्नं वक्कममाणंसि एएसिं चनद्दसएहं महासुमिणाणं अन्नयरे सत्त मदासुमिणे पासित्ता णं पडिबुज्ऊंति, ॥ ५॥ बलदेवमायरो वा बलदेवंसि गम्नं वक्कममाणंसि एएसिं| चनहसाएदं महासुमिणाणं अन्नयरे चत्तारि महासुमिणे पासित्ता णं पडिबुऊति, ॥७॥ ममलियमायरो वा मंझलियंसि गन्नं वक्कममाणंसि एएसिं चउद्दसएहं महासुमिणाणं ॥२१॥ lain Educat For Private Personal Use Only mw.jainelibrary.org Page #47 -------------------------------------------------------------------------- ________________ । अन्नयरं एगं महासुमिणं पासित्ता णं पडिबुज्छंति ॥ ७॥ श्मे य णं देवाणुप्पिया! तिसलाए खत्तिाणीए चोद्देस महासुमिणा दिला, तं नराला णं देवाणुप्पिया! तिसलाए । खत्तियाणीए सुमिणा दिशा, जाव मंगलकारगा णं देवाणुप्पिा ! तिसलाए खत्तिापीए सुमिणा दिशा, तंजदा-अबलानो देवाणुप्पिया! नोगलानो देवाणुप्पिया ! पुत्तसानो देवाणुप्पिा ! सुकलालो देवाणुप्पिया! रजालानो देवाणुप्पिा ! एवं खलु । देवाणुप्पिया! तिसता खत्तियाणी नवएडं मासाणं बहुपडिपुमाणं अच्छमाणं राइंदिआणं विश्वंताणं, तुम्हं कुलकेचं कुलदीवं कुलपवयं कुलवमिंसगं कुलतिलयं कुलकित्तिकरं कुलवित्तिकरं कुलदिणयरं कुलाधारं कुलनंदिकरं कुलजसकरं कुलपायवं कुलतंतुसंताणविवक्षणकरं सुकुमालपाणिपायं अहीणपडिपुस्मपंचिंदियसरीरं लकणवंजण १ चउद्दस. For Private Personal Use Only . Page #48 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प ॥२॥ REENSEENERRR8XXXXXXXXXXX गुणोववेअं माणुम्माणपमाणपडिपुरमसुजायसवंगसुंदरंगं ससिसोमाकारं कंतं पियदंसणं . बारसो. सुरूवं दारयं पयादिसि ॥ ॥ से विय णं दारए जम्मुक्कबालनावे विनायपरिणयमित्ते जुवणगमणुप्पत्ते सूरे वीरे विकंते विबिन्नविपुलबलवाहणे चानरंतचक्कवट्टी रजवई राया । विस्सइ, जिणे वा तिलुक्कनायगे धम्मवरचानरंतचक्कवट्टी ॥ ७॥ तं नराला णं देवाणुप्पिया! तिसलाए खत्तियाणीए सुमिणा दिछा, जाव आरुग्ग-तुहि-दीदाऊ-कल्लाणमंगल-कारगा णं देवाणुप्पिा ! तिसलाए खत्तियाणीए सुमिणा दिहा ॥ ७० ॥ तएणं । सिध्चे राया तसिं सुमिणलकणपाढगाणं अंतिए एयमहं सोचा निसम्म दळे तुझे चित्तमाणंदिते पीयमणे परमसोमणसिए दरिसवसविसप्पमाणदिअए करयल-जाव ते सुमिणलकणपाढगे एवं वयासी ॥१॥ एवमेयं देवाणुप्पिया! तदमेयं देवाणुप्पिया! अवितहमेयं देवाणुप्पिया! इबियमेयं देवाणुप्पिा ! पडिबियमेयं देवाणुप्पिा ! १ सुच्चा. ॥२२॥ Jain Education ForPrivate LPersonal use Only ainelibrary.org Page #49 -------------------------------------------------------------------------- ________________ Jain Education *************************** इचियपडिचियमेयं देवाणुप्पिया ! सच्चे णं एस अठे से जदेयं तुझे वयद ति कट्टु ते | सुमि सम्भं पछि, पडिचिता ते सुविणलकण पाढए विजलेणं असणं पुप्फ-वच - गंध मल्ला-लंकारेणं सक्कारेइ सम्माणेइ, सक्कारिता संमाणित्ता विजलं जीवियारिदं पी - इदा दल, दलइत्ता पडिविसइ ॥ ८२ ॥ तरणं से सिध खत्तिए सीहासणा अनुठे, अनुत्ता जेणेव तिसला खत्तियाणी जवणिच्तरिया तेणेव जवागढइ, नवागचित्ता तिसलं खत्तियाणीं एवं वयासी ॥ ८३ ॥ एवं खलु देवाणुप्पिया ! सुमि - |एसचंसि बयालीसं सुमिणा, तीसं महासुमिणा, जाव एगं महासुमिणं पासित्ता एां पडि - बुज्छंति ॥ ८४ ॥ इमे गं तुमे देवाणुप्पिए ! चन्द्दस महासुमिणा दिट्ठा, तं जराला णं तुमे जाव - जिणे वा तेलुक्कनायगे धम्मवरचाजरंतचक्कवट्टी ॥८५॥ एणं सा तिसला खत्तिच्या णि एम सुच्चा निसम्म दहतु जाव - दिप्रया, करयल - जाव ते सुमिणे Heind : w.jainelibrary.org Page #50 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० ॥२३॥ सम्म पडिलर, ॥ ६ ॥ पडिचित्ता सिनेणं रमा अन्नणुन्नाया समाणी नाणामणि- बारसो. रयणन्नत्तिचित्ताओ नदासणाओ अप्ठेश, अनहित्ता अतुरिअं अचवलं असंनंताए * अविलंबिआए रायहंससरिसीए गईए जेणेव सए नवणे तेणेव नवागवइ, नवागवित्ता । सयं नवणं अणुपविछा ॥ ७ ॥ जप्पनिइं च णं समणे जगवं महावीरे तंसि नायकुलंसि साहरिए, तप्पनिइं च णं बहवे वेसमणकुंमधारिणो तिरियजनगा देवा सक्कवयणेणं से जाइं इमाइं पुरापोराणाई महानिहाणाइं नवंति, तंजहा-पहीणसामिआई पदीणसेनाइं पहीणगुत्तागारा, नचिन्नसामिाई नचिन्नसेनआईनचिन्नगुत्तागाराई, गामा-गर-नगर-खेड-कब्बड-मडंब-दोणमुह-पट्टणा-सम-संबाह-सन्निवेसेसु, सिंघाडएसुवा, तिएसु वा, चनक्केसु वा, चच्चरेसु वा, चनम्मुदेसु वा, महापदेसु वा, गामहा|णेसु वा, नगरहाणेसु वा, गामणिमेणेसु वा, नगरनिश्मणेसु वा, आव १ रायकुलंसि; २ गृहजलप्रवाहवाचो देश्यः शब्दः ॥२३॥ Jain Education For Private Personal use only Page #51 -------------------------------------------------------------------------- ________________ * ********** णेसु वा, देवकुलेसु वा, सन्नासु वा, पवासु वा, आरामेसु वा, उजाणेसु *वा, वणेसु वा, वणसंमेसु वा, सुसाण-सुन्नागार-गिरिकंदर-संति-सेला-वाण-नव गिदेसु वा, सन्निस्कित्ताइंचिति, ताइंसिश्चरायन्नवणंसि सादरंति॥॥ रयाणिं च *णं समणे नगवं महावीरे नायकुलंसि साहरिए, तं रयणिं च णं तं नायकुलं हिरमेणं| वडिला सुवम्मेणं वड्डिा धणेणं धन्नेणं रजेणं रहेणं बलेणं वादणेणं कोसेणं कोहागारेणं पुरेणं अंतेनरेणं जणवएणं जसवाएणं वड्दिना, विपुलधण-कणग-रयण-मणिमोत्तिय-संख-सिल-प्पवाल-रत्तरयणमाइएणं संतसारसावजेणं पीइसक्कारसमुदएणं अश्व अश्व अनिवड्दिना ॥ तएणं समणस्स लगवो महावीरस्स अम्मापिकणं अयमेयारूवे अग्नबिए चिंतिए पबिए मणोगए संकप्पे समुप्पजिबा॥ नए ॥ जप्पनिक च णं अम्दं एस दारए कुबिसि गप्नत्ताए वकंते, तप्पनिइं च णं अम्मे हिरमेणं वड्डामो **888888XXXXX* *********** *** ** For Private & Personal use only ainelibrary.org Page #52 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० बारसा. ॥२४॥ सुवम्मेणं धणेणं धन्नेणं रजेणं रहेणं बलेणं वादणेणं कोसेणं काछागारेणं पुरेणं अंतेनरेणं जणवएणं जसवाएणं वड्डामो, विपुलधण-कणग-रयण-मणि-मुत्तिय-संख-सिलप्पवाल-रत्तरयणमाइएणं संतसारसावश्लोणं पीइसक्कारेणं अश्व अश्व अनिवड्डामो, तं जया णं अम्मं एस दारए जाए जविरसइ, तया णं अम्दे एयस्स दारगेस्स एयागुरूवं गुमं गुणनिप्फन्नं नामधिकं करिस्सामो 'वक्ष्माणु'त्ति ॥ ए ॥ तएणं समणे लगवं महावीरे मानअणुकंपणछाए निच्चले निप्फंदे निरयणे अल्लीणपल्लोणगुत्ते आवि होना ॥१॥ तएणं तीसे तिसलाए खत्तियाणीए अयमेयारूवे जाव संकप्पे समु*प्पजिना-दडे मे से गन्ने, मडे मे से गन्ने, चुए मे से गन्ने, गलिए मे से गन्ने, एस मे गन्ने पुदि एयश, श्याणिं नो एयश त्ति कटु ओहयमणसंकप्पा चिंतासोगसागरसंपविठा करयलपल्दनमुद अट्टकाणोवगया नूमीगयदिहिया छियायश, तं पि य ॥२४॥ १ दारयस्स Jain Education For Private & Personal use only Ol ainelibrary.org Page #53 -------------------------------------------------------------------------- ________________ सिचरायवरनवणं नवरयमुइंग-तंती-तल-ताल-नाडश्कजणमणुऊं दीणविमणं विहरइ ॥ ए२ ॥ तएणं से समणे जगवं महावीरे माऊए अयमेयारूवं अनलिअंपविअं मणोगयं संकप्पं समुप्पन्नं वियाणित्ता एगदेसेणं एयर, तएणं सा तिसला खत्तियाणी हन्तुहा जाव हयहिअया एवं वयासी ॥ ३ ॥ नो खलु मे गन्ने दडे जाव नो गलिए, एस मे गन्ने पुविं नो एयर, श्याणिं एयश त्ति कटु दस्तुहा जाव दियया एवं विहरइ, तएणं समणे नगवं महावीरे गनवे चेव इमेयारूवं अनिग्गढ़। अनिगिएदश्-नो खलु मे कप्पइ अम्मापिनहिं जीवंतेहिं मुझे नवित्ता अगाराओ अणगारिश्र पवश्त्तए ॥ ए४ ॥ तएणं सा तिसला खत्तियाणी एदाया कयबलिकम्मा कयकोजयमंगलपायबित्ता सवालंकारविनूसिया, तं गन्नं नाइसीएहिं नाश्नएदेहिं नाइतित्तेहिं नाश्कमुएदि नाइकसाइएहिं नाइअंबिलेहिं नाश्महुरेहिं नाइनिहिं नाश्बु Jain Education For Private Personal use only Page #54 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प बारसो ॥२५॥ । केहिं नाश्नल्लेहिं नाश्सुक्केहिं सवत्तुगनयमाणसुदेहिं जोयणचायणगंधमल्लेहिं ववगय रोग-सोग-मोद-नय परिस्समा, जं तस्स गनस्स दिशं मियं पलं गनपोसणं तं देसे अ काले अ आहारमाहारमाणी, विवित्तमनएदि सयणासणेहिं परिक्कसुदाए मणोऽणुकूलाए विदारनूमीए, पसबदोदला संपुमदोदला संमाणियदोहला अविमाणिअदोदला बुजिन्नदोहला ववणीअदोहला, सुहं सुदेणं आसइसय चिछ निसीअश् तुयदृश विदर सुदंसुदेणं तं गन्नं परिवद ॥ ए५॥ तेणं कालेणं तेणं समएणं समणे जगवं महावीरे जे से गिम्दाणं पढमे मासे उच्चे पके चित्तसुझे तस्स णं चित्तसुझस्स तेरसी दिवसे णं नवएडं मासाणं बहुपडिपुरमाणं अच्छमाणं राइंदियाणं विश्वंताणं उच्चछाणगएसु गहेसु, पढमे चंदजोए, सोमासु दिसासु वितिमिरासु विसुझसु, जइएसु सवसनणेसु, पयादिणाणुकूलंसि नूमिसप्पिसि मारुयंसि पवायंसि, निप्फन्नमेश्णीयंसि । ॥१५॥ JainEducation international For Private Personel Use Only Page #55 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कालंसि, पमुश्यपक्कीखिएसु जणवएसु, पुत्वरत्तावरत्तकालसमयंसि इत्युत्तरादि । नस्कत्तेणं जोगमुवागएणं आरुग्गा आरुग्गं दारयं पयाया ॥ ९६ ॥ जं रयणिं च णं समणे नगवं महावीरे जाए सा णं रयणी बहूहिं देवेहिं देवीहि य उवयंतेहिं नप्पयंतेदि य नप्पिजेलमाणनूआ कहकदगनूा आवि हुना ॥ एyal * रयणिं च णं समणे जगवं महावीरे जाए तं रयणिं च णं बहवे वेसमणकुंमधारी ति रियजनगा देवा सिफचरायन्नवणंसि हिरमवासं च सुवामवास च वयरवासं च वनवासं : *च आनरणवासं च पत्तवासं च पुप्फवासं च फलवासं च बीअवासं च मल्लवासं च गंधवासं च चुमवासं च वसवासं च वसुदारवासं चं वासिंसु ॥ ए ॥ तएणं से सिपने खत्तिए नवणवश्-वाणमंतर-जोइस-वेमाणिएहिं देवेहिं तिबयरजम्मणानिसेयमहिमाए. १ माला० (क० कि०) देवुज्जोए एगालोए देवसन्निवाए उप्पिजल० (क० कि०); २ घण्णवासं च; ३ पियठ्याए पिअं निवेएमो, पिअं भे भवउ मउडवजं जहामालिअं ओमयं मत्थए पत्थए धोअइ (क० कि०) Jain Education internations For Private Personel Use Only Whaw.jainelibrary.org Page #56 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प बारसो. ॥१६॥ कयाए समाणीए पञ्चूसकालसमयंसि नगरगुत्तिए सद्दावेश, सहावित्ता एवं वयासी ॥ए । खिप्पामेव नो देवाणुप्पिया ! कुंडपुरे नगरे चारगसोदणं करेद, करित्ता माणुम्माणवक्षणं । करेद, माणुम्माणवक्षणं करित्ता कुंमपुरं नगरं सग्निंतरबाहिरियं आसियसम्मजिउँववित्तं , संघाडग-तिग-चनक्क-चच्चर-चनम्मुह-महापद-पहेसु सित्त-सुश्-संमठ-रवंतरावणवीदियं ।। मंचाश्मंचकलिअं नाणाविदरागनूसिअज्जयपडागमंमिश्र लाजल्लोश्यमदिअंगोसीससरसरत्तचंदण-दहरदिन्नपंचगुखितलं उवचियचंदणकलसं चंदणघडसुकयतोरणपडिज्वारदेसलागं सत्तोसत्तविपुलवट्टवग्घारियमझदामकलावं पंचवन्नसरससुरनिमुक्कपुप्फ-13 जोवयारकविअं कालागुरु-पवरकुंजुरुक्क-तुरुक-डज्छंतधूव-मघमघंतगंधुआनिरामं सुगंधवरगधिअं गंधवट्टिनूअं नड-नट्टग-जल्ल-मल्ल-मुध्यि-वेलंबग-कदग-पाढेग-सासगआरकैग-लंख-मंख-तूणइल्ल-तुंबवीणिय-अणेगतालायराणुचरिअं करेद कारवेद, करित्ता १ पवग० २ आइक्खग (क० कि०) ॥२६॥ JainEducations For Private Personal Use Only wow.jainetrary.org Page #57 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कारवेत्ता य जूअसहस्सं मुसलसहस्सं च जस्सवेह, जस्सवित्ता मम एयमाणत्तियं । पच्चप्पिणेह ॥ एए॥ तएणं ते कोमंबियपुरिसा सिझनेणं रमा एवं वुत्ता समाणा दहा । जाव दिया करयल-जाव-पडिसुणित्ता खिप्पामेव कुंमपुरे नगरे चारगसोहणं जाव *जस्सवित्ता जेणेव सच्चे राया (खत्तिए) तेणेव उवागचंति, उवागबित्ता करयल जाव कट्टु सिबस्स रमो एयमाणत्तियं पञ्चप्पिणंति ॥१०॥ तएणं से सिच्चे राया जेणेव अट्टणसाला तेणेव उवागबइ, उवागवित्ता जाव सवोरोदेणं सवपुप्फ-गंध-बबमल्ला-लंकार-विनूसाए सवतुडिअसद्दनिनाएणं मदया इड्डीए, मदया जुइए, महया बलेणं, महया वाहणणं, महया समुदएणं, महया वरतुडिअ-जमगसमग-पवाइएणं संख-पणवनेरि-ऊल्लरि-वरमुहि-तुमुक्क-मुरज-मुझंग-उंदिनिग्घोसनाश्यरवेणं नस्सुकं जक्करं नक्कि अदिऊं अमिजं अन्नडप्पवेसं अदंमकोदंमिमं अर्धरिमं गणिआवरनाडइजकलियं १ अहरिमं. २ अगणिअवरनाडइजकलिअं (क० कि० ) For Private & Personal use only HAIRainelibrary.org Page #58 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० ॥ २७ ॥ Jain Education **** अणेगतालायराणुचरिचं अणुप्रमुइंगं, (ग्रं० ५०० ) मिलायमल्लदामं पमुइ| पक्की लिय-सपुर जे जाणवयं दसदिवसं विईवडियं करे ॥ १०१ ॥ तएां से सि राया दसाहियाए विश्वडियार वट्टमाणीए सइए य सादस्सिए य सयसादस्सिए य | जाए य दाए जाए दलमाणे दवावेमाणे अ, सइए अ सादस्सिए अ सपसादस्सिए य लंने पचमाणे य पडिवावेमाणे य एवं विदरइ ॥ १०२ ॥ तरणं समणस्स जगव महावीरस्स अम्मा पियरो पढमे दिवसे विश्वडियं करेंति, तइए दिवसे चंदसूरदंसयिं करिंति, बठे दिवसे धम्मजागरियं करेंति, इक्कारसमे दिवसे विक्कते निव|तिए सुइजम्मकम्मकरणे, संपत्ते बारसादे दिवसे, विजलं असण- पाण- खाइम - साइमं नवरकड विंति नवरकडा वित्ता मित्त-नाइ - नियय-सयण - संबंधि- परिजणं नायए खत्तिए १ जणाभिरामं (क० कि० ) २ जागरिंति ( क० कि० सु० ) ************ बारसो. ॥ २७ ॥ Page #59 -------------------------------------------------------------------------- ________________ अ आमंतंति आमंतित्ता तो पना एहाया कयवलिकम्मा कयकोउयमंगलपायबित्ता सुझप्पावेसाई मंगलाइं पवराई वाई परिहिया अप्पमहग्यानरणालंकियसरीरा नोअ णवेलाए नोअणमंमवंसि सुदासणवरगया तेणं मित्त-नाइ-नियय-संबंधि-परिजणेणं नाय* एहिं खत्तिएदि सहिं तं विनलं असणं पाणं खाश्मं साश्मं आसाएमाणा विसाएमाणा| परिनाएमाणा परिचुंजेमाणा वा एवं विदरंति ॥ १७३ ॥ जिमिअनुत्तुत्तरागया वि अ णं समाणा आयंता चुका परमसुईनूआ तं मित्त-नाइ-नियग-सयण-संबंधि-परिजणं नायए खत्तिए य विनलेणं पुप्फ-गंध-वन-मल्ला-लंकारेणं सक्कारिति संमाणिति, सक्कारित्ता संमाणित्ता तस्सेव मित्त-नाश्-नियय-सयण-संबंधि-परियणस्स नायाणं खत्तिण य पुरज एवं वयासी ॥ १०४ ॥ पुविपि णं देवाणुप्पिया! अम्दं एयंसि दारगंसि गानं १ चोक्खा. २ सकारेंति. ३ संमाणेति. 888ERRRRRRRR********** For Private & Personal use only Page #60 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प ॥श्न॥ वतंसि समाणंसि इमेयारूवे अनलिए चिंतिए जाव समुप्पजिला-जप्पनिइं च णं । बारसो. अम्दं एस दारए कुचिंसि गप्नत्ताए वकंते, तप्पनिइं च णं अम्हे हिरमेणं वड्डामो सुवमेणं धणेणं धरमेणं रोणं रहेणं जाव सावश्कोणं पीसक्कारेणं अश्व अईव अनिवड्डामो, सामंतरायाणो वसमागया य, तं जया णं अम्दं एस दारए जाए नविस्सइ, तया णं अम्हे एयस्स दारगस्स इमं एयाणुरूवं गुमं गुणनिप्फन्नं नामधिकं करिस्सामो वइमाणु'त्ति ॥ ता अऊ अम्द मणोरदसंपत्ती जाया, तं होन णं अम्दं कुमारे 'वमाणे' नामेणं ॥२०५॥ समणे नगवं महावीरे कासवगुत्ते णं, तस्स णं तओ नामधिजा एवमादिऊंति, तंजहा-अम्मापिठसंतिए 'वइमाणे,' सहसमुश्आए 'समणे,' अयले जयन्नेरवाणं परीसहोवसग्गाणं खंतिखमे पडिमाण पालगे' धीमं अरश्रइसके | दविए वीरिअसंपन्ने देवेहिं से नाम कयं 'समणे जगवं महावीरे' ॥१०६॥ १ पालए. ॥श्॥ For Private & Personal use only Page #61 -------------------------------------------------------------------------- ________________ KR****KKHRE************** समणस्स णं जगवर्ड महावीरस्स पिा कासवगुत्ते णं, तस्स णं तो नामधिजा एवमादिऊंति, तंजदा-सिपचे इवा, सिङसे इवा, जसंसेइ वा ॥ समणस्स णं जगव महावीरस्स माया वासिही' गुत्तेणं, तीसे त नामधिजा एव*मादिति, तंजहा-तिसला ३ वा, विदेवदिन्ना इवा, पिअकारिणी वा ॥ समणस्स णं जगव महावीरस्स पितिले सुपासे, जि नाया नंदिव-धणे, नगिणी सुदंसणा, नारिया जसोआ कोमिन्ना गुत्तेणं ॥ समणस्स णं जगवर्ज महावीरस्स धूआ कासवी * गुत्तेणं, तीसे दो नामधिजा एवमाहिऊंति, तंजदा-अणोजा ३ वा, पियदंसणा वा ॥ समणस्स णं जगवले महावीरस्स नत्तुई कोसिअ (कासव) गुत्तेणं, तीसे णं वे नामधिजा एवमादिऊंति, तंजदा-सेसवई इवा, जसवई वा, ॥१०॥ समणे नगवं १ वासिहगोत्तेणं ( क० सु० ) २ कासवगुत्तेणं (क० सु० ) ३ दो. For Private & Personal use only Page #62 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प ॥९॥ महावीरे दके दकपश्न्ने पडिरूवे आलीणे नद्दए विणीए नाए नायपुत्ते नायकुलचंदे विदेदे विदेददिन्ने विदेहजचे विदेहसमाले तीसं वासाई विदेहंसि कट्ठ अम्मापिनहिं देवत्तगएहिं गुरुमहत्तरएहिं अग्नणुन्नाए समत्तपश्न्ने पुणरवि लोगंतिएहिं जीअकप्पिएहिं देवेहिं ताहिं काहिं कंतादिं पिआदि मणुन्नादिं मणामादिं जरालाहिं कल्लाणादि| सिवादिं धन्नादिं मंगल्लादिं मिअ-महुर-सस्सिरीआदि दिययगमणिकाहिं दिययपस्दायणिजाहिं गंन्नीराहिं अपुणरुत्ताहिं असयाहिं वग्गूहिँ अणवरयं अनिनंदमाणा| य अनिथुवमाणा य एवं वयासी ॥ १७ ॥ “जय जय नंदा!, जय जय नद्दा !, नई ते, जय जय खत्तिअवरवसदा !, बुज्छादि लगवं! लोगनादा !, सयलजगजीवहियं पवत्तेदि धम्मतिवं, हिय-सुद-निस्सेयसकरंसवलोए सवजीवाणं नविस्स” त्ति कटु जय १ लोअंतिएहिं. २ नाह! ॥२ ॥ Jain Ed an Interations Page #63 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयसई पजति ॥ १० ॥ पुविंपिणं समणस्स नगवढं महावीरस्स माणुस्सगाउँ गिदबधम्मा अणुत्तरे आनोइए अप्पडिवाई नाणदंसणे दुबा, तएणं समणे नगवं महावीरे तेणं अणुत्तरेणं आनोइएणं नाणदंसणेणं अप्पणो निस्कमणकालं आलोएइ आनोश्ता चिच्चा हिरम, चिच्चा सुवम, चिच्चा धणं, चिच्चा रऊं, चिच्चा रहं, एवं बलं वाहणं कोसं कुहागारं, चिच्चा पुरं, चिच्चा अंतेजरं, चिच्चा जणवयं, चिच्चा विपुलधणकणग-रयण-मणि-मुत्तिय-संख-सिल-प्पवाल-रत्तरयणमाश्यं संतसारसावश्ऊं,विद्यड्डश्त्ता, विगोवश्त्ता, दाणं दायारेदिं परिनाश्त्ता दाणं दाश्याणं परिनाश्ता ॥११०॥ तेणं । कालेणं तेणं समएणं समणे जगवं महावीरे जे से हेमंताणं पढमे मासे, पढमे परकेमग्गसिरबहुले, तस्स णं मग्गसिरबहुलस्स दसमीपरके णं पाईणगामिणीए गयाए पोरिसीए अनिनिविट्टाए पमाणपत्ताए सुवए णं दिवसे णं, विजए णं मुहुत्ते णं, चंदप्पनाए Jain Educato ForPrivate LPersonal use Only Aliainelibrary.org Page #64 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 8 कल्प *38* बारसो. ॥३०॥ *** FEEN************************ सीआए सदेवमणुासुराए परिसाए समणुगम्ममाणमग्गे संखिय-चक्किय-नंगलिअमुहमगंखिय-वइमाण-पूसमाण-घंटियगणेहिं, ताहिं श्छादि कंताहिं पियादि मणुन्नाहिं मणामादिं जरालाहिं कल्लाणादिं सिवाहिं धन्नाहिं मंगल्लादि मिअ-महर-सस्सिरीआदि । वग्गूहिं अभिनंदमाणा अनिथुवमाणा य एवं वयासी ॥१११॥ "जय जय नंदा!, जय जय नहा!, नई ते खत्तियवरवसदा ! अन्नग्गेदिं नाण-दंसणचरित्तेहिं, अजियाई जिणादि इंदियाइं, जिअं च पालेहि समणधम्मं, जियविग्यो विय वसादि तं देव! सिभिमज्के, निदणादि रागहोसमले तवेणं, विश्वणिअवकडे, महाहि अठकम्मसत्तू काणेणं उत्तमेणं सुक्केणं, अप्पमत्तो हरादि आरादणपडागं च वीर! तेढुक्करंगमज्के, पावय वितिमिरमणुत्तरं केवलवरनाणं, गढ य मुकं परं पयं जिणवरोवश्छेणं मग्गेणं | १ सिविआए ( क० मु०, क० ल०, क० कौ• ) **** ॥३०॥ ******RRB Jain Education! Page #65 -------------------------------------------------------------------------- ________________ *** **** * अकुडिलेणं हंता परीसहचमुं, जय जय खत्तिअवरवसहा! बहू; दिवसाइं, बहुशं परकाई, बहूई मासाइं, बदई उमई, बहूइं अयणाई, बहूई संवबराई, अन्नीए परीसहोवसग्गाणं, खंतिखमे नयनेरवाणं, धम्मे ते अविग्धं नवन" ति कट्ट जयजयसहं पजंति ॥ ११॥ तएणं समणे नगवं महावीरे नयणमालासहस्सेहिं पिबिजमाणे पबिजमाणे, वयणमालासहस्सेहिं अनिथुवमाणे अनिथुवमाणे, दिययमालासहस्सेदिं| जन्नंदिङमाणे उन्नंदिङमाणे, मणोरढमालासहस्सेहिं विछिप्पमाणे विनिप्पमाणे, कंतिरूवगुणेहिं पनिङमाणे पबिङमाणे, अंगुलिमालासहस्सेहिं दाङमाणे दाइजमाणे, दाहिणढलेणं बहणं नरनारीसहस्साणं अंजलिमालासहस्साई पडिबमाणे पडिबमाणे, नवणपंतिसहस्साई समठमाणे समैश्चमाणे, तंती-तल-ताल-तुडिय-गीय-चाइअ-रवेणं १ अभिभवि अगामकंटए (क० कि० ) २-३ समइकमाणे ( क० स० क० ल० ), ************* Painelibrary.org Page #66 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० ॥ ३१ ॥ Jain Education **** महुरेण य मणहरेणं जयजयसद्दघोसमी सिएणं मंजुमंजुला घोसेण य पडिबुज्ऊमाणे बारसो. पडिबुज्ऊमाणे, सबिड्डी ए सबजुईए सबबलेणं सववादणेणं सवसमुदपणं सङ्घायरेणं सबविनूईए सब विनूसार सङ्घसंनमेणं सबसंगमेणं सवपगईदिं सघनाडएहिं सवतालाय रेहिं सरोदेणं सवपुप्फ-गंध-मल्ला-लंकार - विनूसार सबतुडियसद्दसन्निनाएणं महया इड्डीए महया जुईए महया बलेणं महया वाहणेणं महया समुदपणं महया वरतुडिय-जमगसमग-प्पवाइएणं संख-पणव- पडद-नेरि-कल्ल रि- खरमुदि-हुमुक्क-झुंड दिनिग्घोसना इयरवेणं कुंमपुरं नगरं मज्छंमज्जेणं निग्गचर, निग्गचित्ता जेणेव नायसंमवणे नाणे जेणेव सोगवरपायवे तेणेव नवागढ, वागवित्ता सोगवरपायवस्स दे सीयं ठावेइ, गवित्ता सीया पचोरुद, पच्चरुदित्ता सयमेव आज रणमल्वालंकारं मुखइ, मु१ सब्बड्डीए (क० कौ०, क० लतायां. १ आपुच्छिजमाणे (क० कि०) २ सव्वावरोहेणं ( क०सु०, क० कौ० ) ॥ ३१ ॥ Page #67 -------------------------------------------------------------------------- ________________ इत्ता सयमेव पंचमुहियं लोअं करेइ, करित्ता बछेणं नत्तेणं अपाणएणं हजुत्तराहिं । नस्कत्तणं' जोगमुवागएणं एगं देवदूसमादाय एगे अबीए मुंजवित्ता अगाराउ अणगारिश्र पवइए ॥ ११३॥ समणे जगवं महावीरे संवबरं सादियं मासं जाव चीवरधारी होबा, तेण परं अचेलए पाणिपडिग्गदिए ॥ ११४॥ समणे नगवं महावीरे साइरेगा। ज्वालस वासाइं निचं वोसम्काए चियत्तदेहे जे केइ जवसग्गा नप्पऊंति, तंजहा-दिवा । वा माणुसा वा तिरिकजोणित्रा वा, अणुलोमा वा पडिलोमा वा, ते नप्पन्ने सम्म * सदश् खमइ तितिरकइ अहियासे ॥ १२५ ॥ तएणं समणे नगवं महावीरे अणगारे । *जाए, इरियासमिए नासासमिए एसणासमिए आयाणनंडमत्तनिकेवणासमिए जच्चार* पासवण-खेल-संघाण-जल्लपारिछावणियासमिए, मणसमिए वयसमिए कायसमिए मणगुत्ते वयगुत्ते, कायगुत्ते,गुत्ते, गुत्तिदिए,गुत्तबंजयारी, अकोहे अमाणे अमाए अलोदे, संते १ चंदेणं इत्यधिक, (क० मु०) Jain dan For Private Personal Use Only ainelibrary.org Page #68 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० ॥ ३२ ॥ पसंते जवसंते, परिनिबुडे णासवे ममे किंचणे बिन्नंगंथे निरुवलेवे, कंसपाई इव मुक्कतोए, संखे इव निरंजणे, जीवे इव अप्पडिदयगई, गगणमिव निरालंबणे, वाऊँ |श्व अप्पडिब-दे, सारयसलिखं व सुइदियए, पुकरपत्तं व निरुवलेवे, कुम्मे इव गुत्तिं - दिए, विदग इव विप्पमुक्के, खग्गिविसाएं व एगजाए, जारं परकी इव अप्पमत्ते, कुंजरे श्व सोंमीरे, वसदें इव जायथामे, सीदें इव धरिसे, मंदरे इव निक्कंपे, सागरे इव गंजीरे, चंदे इव सोमलेसे, सूरे इव दित्ततेए, जच्च कणगं व जायरूवे, वसुंधरा इव सबफास विसदे, सुहुहुयासणे" इव तेयसा जयंते ॥ इमेसि पयाणं कुन्नि संगणिगादार्ज - " कंसे संखे जीवे, गगणे वाऊ य सरयसलिले । पुस्करपत्ते कुम्मे, विदगे १ छिण्णलोए (क० कि०), २ संखो इव (क०सु०, क० कौ०) संख इत्र (क० लतायां), ३ वाऊ व्व (क०सु०, क० कौ० ). ४ वसभो (क०सु० क० लतयोः) ५ सीहो (क० सु० को० क० लतासु) ६ मंदरो (सु० कौ० ल०) ७ सागरो (तिसृष्वपि ) ८ चंदो ( तिसृष्वपि ) ९ मुरो (क०सु० को ० छ०); १० सण-सणो पाठान्तरे. : Jain Education national ******* बारसो. -1132 11 Page #69 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ********** खग्गे य नारंमे ॥१॥ कुंजर वसदे सीदे, नगराया चेव सागर-मखोदे। चंदे सुरे| कणगे, वसुंधरा चेव इयवहे ॥२॥" ॥११६॥ नविणं तस्स नगवंतस्स कब पडिबंधे नवइ-से अ पडिबंधे चनविहे पन्नत्ते, तंजदा-दवड, खित्त, काल, नाव दव णं सचित्ताचित्तमीसेसु दवेसु, खित्त णं-गामे वा, नगरे वा, अरमे वा, खित्ते वा, खले वा, घरे वा, अंगणे वा, नहे वा, काल णं-समए वा, आवलिआए वा आणापाणुए वा, थोवे वा, खणे वा, लवे वा, मुहुत्ते वा, अहोरत्ते वा, परके वा, मासे वा, क वा, अयणे वा, संवबरे वा, अन्नयरे वा दीदकालसंजोए, नावणं-कोदे वा, माणे वा, मायाए वा, लोने वा, नए वा, पिके वा, दोसे वा, कलदे वा, अग्नकाणे वा, पेसुन्ने वा, परपरिवाए वा, अरइरई वा, मायामोसे वा, मिदंसणसल्ले वा (ग्रं० ६००) १ हासे वा (क० सु०, क० ००). **ERES**** For Private Personal Use Only Page #70 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प बारसो. ॥३३॥ तस्स णं नगवंतस्स नो एवं नव ॥ ११७ ॥ से णं जगवं वासावासं वऊं अह गिम्दहेमंतिए मासे गामे एगराइए नगरे पंचराइए वासीचंदणसमाणकप्पे, समतिण मणि-खेछु-कंचणे, समउकसुदे, इहलोग-परलोगअप्पडिबछे, जीवियमरणे अ निरव* कंखे, संसारपारगामी, कम्मसत्तुनिग्घायणछाए अनुहिए एवं च णं विरद ॥११॥ *तस्स णं जगवंतस्स अणुत्तरेणं नाणणं, अणुत्तरेणं दंसणेणं, अणुत्तरेणं चरित्तेणं, अणुत्तरेणं आलएणं, अणुत्तरेणं विदारेणं, अणुत्तरेणं वीरिएणं, अणुत्तरेणं अजवेणं, अणुत्तरेणं महवेणं, अणुत्तरेणं लाघवेणं, अणुत्तराए खंतीए, अणुत्तराए मुत्तीए, अणुत्तराए गुत्तीए, अणुत्तराए तुहीए, अणुत्तरेणं सच्च-संजम-तव-सुचरिअ-सोवचिअफलनिवाणमग्गेणं, अप्पाणं नावेमाणस्स ज्वालस संवबराइं विश्कताइं तेरसमस्स १ समसुहदुरके (क० कि०, क० सु०). २ मरणा ( क० कि० ) ॥३३॥ Jain Education internations For Private Personal Use Only Page #71 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 888% RRRRRRRRXXXSEXMARKESTRESS संवचरस्स अंतरा वट्टमाणस्स जे से गिम्हाणं उच्चे मासे, चउजे परके–वश्साहसुई, तस्स णं वश्साहसुझस्स दसमीपरके णं पाईणगामिणीए गयाए पोरिसीए अनिनिविट्टाए पमाणपत्ताए, सुबए णं दिवसे णं, विजए णं मुहुत्तेणं, जंनियगामस्स नगरस्स बहिया नङ्गवालियाए नईए तीरे वेयावत्तस्स चेअस्स अदूरसामंते सामागस्स गाहावइस्स - कहकरणंसि सालपायवस्स अहे गोदोदिआए उक्कनुअनिसिझाए आयावणाए आयावेमाणस्स बछेणं नत्तेणं अपाणएणं हबुत्तरादिं नस्कत्तेणं जोगमुवागएणं काणंतरिआए वट्टमाणस्स अणंते अणुत्तरे निवाघाए निरावरणे कसिणे - पडिपुरमे केवलवरनाणदंसणे समुप्पन्ने ॥११॥ तेणं कालेणं तेणं समएणं समणे नगवं महवीरे अरदा जाए, जिणे केवली सवन्नू सवदरिसी,सदेवमणुासुरस्स लोगस्स १ उक्कुडिअ (क० मु०, क० को०). २ तएणं समणे भयवं महावीरे (क० मु०, क० कि०). ERRRRRRRRRRRRRRY Jain Education For Private & Personal use only Page #72 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कहप० ॥३४॥ XXXSAREERSSEXSANSKRISH परिआयं जाण पासइ, सबलोए सबजीवाणं आगई गई लिइं चवणं उववायं तक । मणो माणसिअं जुत्तं कडं पडिसेवियं आवीकम्मं रहोकम्मं, अरदा अरहस्सनागी, तं तं कालं मण-वय-कायजोगे वट्टमाणाणं सबलोए सबजीवाणं सबनावे जाणमाणे पासमाणे विदरश ॥१२०॥ तेणं कालेणं तेणं समएणं समणे जगवं महावीरे अघ्यिगाम । नीसाए पढमं अंतरावासं वासावासं उवागए, चंपं च पिठचंपं च नीसाए त अंतरावासे वासावासं उवागए, वेसालिं नगरिं वाणियगामं च नीसाए ज्वालस अंतरावासे वासावासं उवागए, रायगिदं नगरं नालंदं च बाहिरियं नीसाए चनद्दस अंतरावासे वासावासं उवागए, उ मिहिलाए, दो नदिआए, एगं आलंनियाए, एगं सावबीए, एगं पणिअनूमीए, एगं पावाए मज्झिमाए दबिवालस्स रमो रङ्गसनाए अप १ मिहिलिआए. 8888888888888888*RRRRRXX ॥३४॥ For Private Personal Use Only Page #73 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बिमं अंतरावासं वासावासं उवागए ॥११॥ तवं णं जे से पावाए मज्झिमाए दबिवालस्स रमे रअगसनाए अपचिमं अंतरावासं वासावासं उवागए, तस्स णं अंतरावासस्स जे से वासाणं चनजे मासे सत्तमे परके-कत्तिबहुले, तस्स णं कत्तियबहुलस्स पन्नरसीपके णं जा सा चरमा रयणी, तं रयणिं च णं समणे जगवं महावीरे कालगए विश्कंते समुझाए बिन्नजाइ-जरा-मरणबंधणे सिझे बुझे मुत्ते अंतगडे परिनिबुडे सवजकप्पहीणे, ॥१२॥ चंदे नाम से ऽच्चे संवबरे, पीश्वक्षणे मासे नंदिवणे पके, अग्गिवेसे नाम दिवसे, उवसमित्ति पवुच्चर, देवाणंदा नाम सारयणी निरतित्ति पवुच्चश्, अच्चे लवे, मुत्ते पाणु, थोवे सिझे, नागे करणे, सवासिमुहुत्ते, साश्णा नकत्तेणं जोगमुवागएणं । कालगए विश्कंते जाव सबस्कप्पहीणे ॥१३॥रयाणं चणं समणे नगवं महावीरे । कालगए जाव सबस्कप्पहीणेसा णं रयणी बहूहिं देवेहिं देवीदिय उवयमाणेहिं यनप्प १ दोचे (क० मु०, क• कौ०, क० ल०). IRESERRRRRRRRRRRRRRRRRRRIERRENES JainEducato For Private & Personal use only ainelibrary.org Page #74 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० ॥ ३५ ॥ Jain Educatio **** ******** यमाणेदि य जोविया प्रावि हुवा ॥ १२४ ॥ जं स्यणिं च णं समणे जगवं महावीरे में बारसो. | कालगए जाव सबडुकप्पदी णे, सा णं रयणी बहूहिं देवेदिं देवी द य जवयमाणे दिं उप्पयमाणे दि य उप्पिजलगनूच्या कदकदगनूच्या आवि हुवा ॥ १२५ ॥ जं स्यां चां समणे जगवं महावीरे कालगए जाव सबडुकप्पदीणे, तं स्यणिं च ां जिहस्स गोमस्स इंदनूइस्स अणगारस्स अंतेवासिस्स नायए पिबंधणे वुचिन्ने, प्रांते प्रपुत्तरे जाव केवलवर नाणदंसणे समुप्पन्ने ॥ १२६ ॥ जं रयणिं च ां समणे जगवं महावीरे कालगए जाव सबडुकप्पदीणे, तं स्यणिं च णं नवमल्लई नवलेचई कासी कोसलगा हारसवि गणरायाणो, अमावासाए पारानो पोसदोववासं पठविंसु, गए से जावु - कोए, दबुको करिस्सामो ॥ १२७ ॥ जं स्यणिं च णं समणे जगवं महावीरे कालगए जाव सबडकप्पदीणे, तं स्यणिं च णं खुद्दार जासरासी नाम महग्गदे दोवास. १ बाराभए (क० कि० ). ॥३५॥ w Page #75 -------------------------------------------------------------------------- ________________ सहस्सलिई समणस्स लगवढं महावीरस्स जम्मनस्कत्तं संकंते, ॥ १२ ॥ जप्पनि । च णं से खुद्दाए जासरासी मदग्गदे दोवाससहस्सलिई समणस्स नगवर्ड महावीरस्स जम्मनस्कत्तं संकंते, तप्पनिइं च णं समणाणं निग्गंथाणं निग्गंथीणं य नो नदिए नदिए पूआसक्कारे पवत्तइ ॥ १२॥ जया णं से खुद्दाए नासरासी । मदग्गदे दोवाससहस्सहिई समणस्स लगवर्ड महावीरस्स जम्मनस्कत्ता विश्वंते| विस्सइ, तया णं समणाणं निग्गंथाणं निग्गंथीण य नदिए नदिए पूआसक्कारे । नविस्सइ ॥ १३० ॥ जं रयणिं च णं समणे नगवं महावीरे कालगए जाव सबकप्पहीणे, तं रयणिं च णं कुंथुअणुधरी नामं समुप्पन्ना, जा छिया अचलमाणा उनमबाणं निग्गंयाणं निग्गंधीण य नो चस्कुफासं दवमागवश, जा अघ्आि चलमाणा उनमबाणं निग्गंथाणं निग्गंथीण य चस्कुफासं हवमागबइ ॥१३१॥ जं पा Jain Educations For Private Personal use only Page #76 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ** कस्प० ॥३६॥ ******* सित्ता बहुहिं निग्गंथेहिं निग्गंधीहि य सत्ताई पच्चकायाई, से किमाहु नंते? अज- बारसो. प्पनिई संजमे रारादे नविस्सइ ॥१३॥ तेणं कालेणं तेणं सयएणं समणस्स . नगवर्ज महावीरस्स इंदनूपामुकाउँ चउद्दस समणसाहस्सी जक्कोसिआ समणसं|पया हबा ॥१३३॥ समणस्स जगवढे महावीरस्स अजचंदणापामुस्का बत्तीस अऊियासाहस्सी उक्कोसिया अजियासंपया दुबा ॥१३४ ॥ समणस्स नगवन महावीरस्स संख-सयगपामुकाणं समणोवासगाणं एगा सयसोहस्सी अजणहिं च । सहस्सा उक्कोसिया समणोवासगाणं संपया हुबा ॥१३५॥ समणस्स नगव महावीरस्स सुलसा-रेवश्पामुकाणं समणोवासिआणं तिन्नि सयसाहस्सी अहारससहसा जक्कोसिआ समणोवासियाणं संपया दुबा ॥१३६॥ समणस्स णं नगव महावीरस्स तिन्नि सया चनहसपुवीणं अजिणाणं जिणसंकासाणं सवरकरसन्निवाईणं जिणो विव १ दुराराहए (क० कि०). २ सयसाहस्सी. ************ ॥३६॥ * Page #77 -------------------------------------------------------------------------- ________________ **** वितदं वागरमाणाां उक्कोसिया चउदसपुर्वीणं संपया हुवा ॥ १३७ ॥ समणस्स जगव महावीरस्स तेरस सया दिनाणी इसेस पत्ताणं नक्को सिया उहिना णिसंपया हुबा ॥ १३८ ॥ समास्स ां जगवर्ज महावीरस्स सत्त सया केवलनाीणं संनिसवराणदंसणधराणं नक्कोसिया केवलनाणिसंपया हुवा ॥ १३५ ॥ समणस्स एणं जगव | महावीरस्स सत्त सया वेबी देवाणं देविड्डिपत्ताणं नक्कोसिया वेवियसंपया दुखा ॥ १४० ॥ समास्स णं जगव महावीरस्स पंच सया विजलमईणं अड्डाइजेसु दीवेसु दोसु समुद्देसु सन्नीणं पंचिंदियाणं पत्तगाणं मणोगए जावे जाणमाणाणं नक्को सिच्या विजलमईणं संपया हुवा ॥ १४१ ॥ समणस्स णं महावीरस्स चत्तारि सया वाईणं सदेवमासुराए अपराजियाणं नक्कोसिया वाइसंपया हुवा ॥ १४२ ॥ समणस्स एां जगव भगव परिसाए वाए महावीरस्स *********** ) Page #78 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प ॥३॥ सत्त अंतेवासिसयाइं सिझाइं जाव सबकप्पहीणाई, चउद्दस अफ्रियासयाई सिधाई। बारसो. ॥ १४३ ॥ समणस्स णं नगवर्ड महावीरस्स अठ सया अणुत्तरोववाश्याणं गश्कखाणणं विश्कल्लाणाणं आगमेसिनहाणं नक्कोसिआ अणुत्तरोंववाश्याणं संपया हुना ॥ १४४ ॥ समणस्स लगवर्ड महावीरस्स उविदा अंतगडनूमी दुबा, तंजदाजुगंतगडनूमी य, परियायंतगडनूमी य, जाव तच्चाउँ पुरिसजुगाउँ जुगंतगडनूमी, चनवासपरियाए अंतमकासी ॥ १४५ ॥ तेणं कालेणं तेणं समएणं समणे जगवं महावीरे तीसंवासाइं अगारवासमज्के वसित्ता, सारेगाइं ज्वालस वासाइं बनमनपरियागं पाणित्ता, देसूणाई तीसं वासाई केवलिपरियागं पाणित्ता, बायालीसं वासाई साममपरियागं पाणित्ता, बावत्तरि वासाइं सवालयं पालश्ता खीणे वेयणिजा-जयनाम-गुत्ते श्मीसे उसप्पिणीए दूसमसुसमाए समाए बहुविश्कंताए तिहिं वासेहिं अक्ष ॥३१॥ For Private whinw.jainelibrary.org Personal Use Only Page #79 -------------------------------------------------------------------------- ________________ नवमेदि य मासेदिं सेसेहिं पावाए मज्जिमाए दविवालरस रमो रयसभाए एगे बीए बणं नत्तेणं पाणएणं साइणा नस्कत्तेणं जोगमुवागणं पच्चूसकालसमयं सि संपलिकनिसले पपन्नं अज्जयलाई कल्लाणफल विवागाईं, पण पन्नं अज्जयाई पावफल विवागाई, बत्तीसंच अपुवागरणाई वागरिता पदाणं नाम अज्कयणं विनावेमाणे | विनावेमाणे कालगए विश्यंते समुकाए विन्नजाइ - जरा - मरणबंधणे सिद्धे बुद्धे मुत्ते अंतगडे परिनिधुड सबडुकप्पदी ॥ १४६ ॥ समणस्स जगवर्ज महावीरस्स जाव | सब कप्पदी एस्स नव वाससयाई विक्कताई, दसमस्स य वाससयस्स अयं प्रसी इमे संवचरे काले गच्छ, वायणंतरे पुण अयं तेणजए संवरे काले गइ इइ दीसइ | ॥ १४७ ॥ ( क० कि० क०सु० १४८ ) ॥ २४ ॥ १ रज्जुग. ********* ) *** ******* Page #80 -------------------------------------------------------------------------- ________________ * कल्प बारसो. ॥३ ॥ ** ************* । तेणं कालेणं तेणं समएणं 'पासे' अरदा पुरिसादाणीए पंचविसाहे दुबा, तंजहाविसादाहिं चुए चश्त्ता गग्नं वकंते, विसाहादि जाए, विसादाहिं मुझे नवित्ता अगाराज अणगारिश्र पवश्ए, विसादाहिं अणंते अणुत्तरे निवाघाए निरावरणे कसिणे पडिपुस्मे केवलवरनाणदंसणे समुप्पन्ने, विसादाहिं परिनिबुए ॥ २४ ॥ तेणं कालेणं तेणं समएणं पासे अरदा पुरिसादाणीए जे से गिम्हाणं पढमे मासे पढमे पके चित्तबहले, तस्स णं चित्तबहुलस्स चनबीपके णं पाणया कप्पा वीसं सागरोवमहिश्या अणंतर चयं चश्त्ता इदेव जंबुद्दीवे दीवे नारदेवासे वाणारसीए नयरीए आससेणस्स रमो वामाए देवीए पुवरत्तावरत्तकालसमयंसि विसादादि नकत्तेणं जोगमुवागएणं आहारवक्कंतीए (ग्रं0 500 ) नववकंतीए सरीरवक्कंतीए कुर्बिसि गन्नत्ताए वक्ते ॥ २५० ॥ पासे णं अरहा पुरिसादाणीए निन्नाणोवगए आवि दुबा, तंजहा-चश् *RSEXXXXXXXXX*** * **** Jain Educatan international For Private & Personal use only viww.jainelibrary.org Page #81 -------------------------------------------------------------------------- ________________ स्सामि त्ति जाणइ, चयमाणे न जाणइ, चुएमि त्ति जाणइ, तेणं चेव अनिलावणं सुविणदसणविदाणेणं सवं-जाव-निअगं गिदं अणुपविधा, जाव सुदंसुदेणं तं गनं परिवद ॥ १५१॥ तेणं कालेणं तेणं समएणं पासे अरदा पुरिसादाणीए जे से हेमंताणं उच्चे मासे तच्चे परके-पोसबहुले, तस्स णं पोसबहुलस्स दसमीपके णं नवएवं मासाणं बहुपडिपुरमाणं अच्माणं राइंदिआणं विश्कताणं पुवरत्तावरत्तकालसमयंसि । विसादाहिं नस्कत्तेणं जोगमुवागएणं आरोग्गा आरोग्गं दारयं पयाया ॥ १५॥ जं रयणिं च णं पासे अरदा पुरिसादाणीए जाए, सा णं रेयणी बहूदिं देवेदिं देवीहि य । जाव नप्पिजलगनूया कहकहगल्या आवि हवा ॥१५३॥ सेसं तदेव, नवरं जम्मणं । पासानिलावेणं जाणिवं, जाव ते दोन णं कुमारे 'पासे' नामेणं ॥ १५४॥ पासे अरहा पुरिसादाणीए दरके दकपभन्ने पडिरूवे अल्लीणे नदए विणीए, तीसं वासाई १ तं रयणिं च णं (क० कि०, क० सु०) in Education International ForPrivate LPersonal use Only wnaw.jainelibrary.org Page #82 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प ॥३ ॥ अगारवासमज्के वसित्ता पुणरवि लोगंतिएहिं जिअकप्पेहिं देवेदिं तादिं इछाहिं जाव । एवं वयासी ॥ १५५॥ "जय जय नदा, जय जय नद्दा, नदं ते" जाव जयजयसहं । पलंजंति ॥१५६॥ पुछिपि णं पासस्स णं अरदर्ज पुरिसादाणीयस्स माणुस्सगा| गिदधम्मा अणुत्तरे आनोइए तं चेव सवं-जाव दाणं दाइयाणं परिनाश्त्ता, जे से , हेमंताणं उच्चे मासे तच्चे परके-पोसबहुले, तस्स णं पोसबकुलस्स इक्कारसीदिवसे णं : पुवाहकालसमयंसि विसालाए सिबिआए सदेवमणुासुराए परिसाए, तं चेव सवं, नवरं वाणारसिं नगरिं मज्जंमज्केणं निग्गबइ, निग्गचित्ता जेणेव आसमपए उजाणे, जेणेव असोगवरपायवे, तेणेव उवागबइ, उवागवित्ता असोगवरपायवस्स अहे सीयं । गवे, गवित्ता सीया पच्चोरुहर, पच्चोरुदित्ता सयमेव आमरणमल्लालंकारं उमुअइ, उमुश्ता सयमेव पंचमुहियं लोअं करेइ, करित्ता अप्ठमणं नत्तेणं अपाणएणं विसा ॥३ ॥ Jain Ed an Interations For Private Personal Use Only Page #83 -------------------------------------------------------------------------- ________________ * हाहिं नस्कत्तेणं जोगमुवागएणं एगं देवदूसमादाय तिहिं पुरिससएदि सहि मुझे नवित्ता । अगारा अणगारियं पवइए ॥१५७ ॥ पासे णं अरदा पुरिसादाणीए तेसीई राईदियाइ निच्चं वोसहकाए चियत्तदेदे जे केइ जवसग्गा उप्पऊंति, तंजदा-दिवा वा मा गुस्सा वा तिरिकजोणिआ वा, अणुलोमा वा पडिलोमा वा, ते उप्पन्ने सम्मं सहर *खम तितिक अदियासे ॥१५॥ तएणं से पासे नगवं अणगारे जाए इरियासमिए नासासमिए-जाव अप्पाणं नावेमाणस्स तेसीई राइंदियाइविश्कता, चनेरासीइमे राईदिए अंतरा वट्टमाणे जे से गिम्हाणं पढमे मासे पढमे पके चित्तबहुले, तस्स णं चित्तबहुलस्सचनबीपके णं पुवाहकालसमयंसिधायश्पायवस्स अहे बछेणं नत्तणं अपाणएणं विसाहाहिं नस्कत्तेणं जोगमुवागएणं काणंतरिआए वट्टमाणस्स अणंते अणुत्तरे निवाघाए १ चउरासीइमस्स राइंदिअस्स अंतरा वट्टमाणसु (क० कि०, क० सु० ) K*********************** *888888888****** ***** JainEducation.international For Private & Personal use only mata.jainelibrary.org Page #84 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० ॥ ४० ॥ ****** | निरावरणे जाव केवलवरनाणदंसणे समुप्पन्ने, जाव जाणमाणे पासमाणे विदरइ ॥ १५॥ | पासस्स एां पर हर्ज पुरिसादाणीयस्स अह गणा ग्रह गणहरा हुवा, तंजदा-सुने य १ - घोसे य २, वसिठे ३ बंजयारि य । सोमे ५ सिरिदरे ६ चेव, वीरजदे ७ जसेवि य ॥ १६० ॥ पासस्स णं परदर्ज पुरिसादाणी यस्स 'अदिस पासुरकार्ड सोलस समण साहस्सी नक्कोसिच्या समणसंपया हुवा || १६१ ॥ पासस्स रद पुरिसादाणियस्स 'पुप्फचूला 'पामुरकार्ड हत्ती प्रकियासादस्सी नक्कोसिया प्रकियासंपया हुवा ॥ १६२ ॥ पासस्स एणं रद पुरिसादाणी यस्स 'सुवय' पामुकाणं समपोवासगाणं एगा सेयसादस्सी चनसहिं च सदस्सा नक्कोसिच्या समणोवासगाणं संपया दुखा ॥ १६३ ॥ पासस्स एणं रद पुरिसादाणी यस्स ' सुनंदा' पामुरकाणं समगोवा सियाणं तिमि सयसादस्सी सत्तावीसं च सदस्सा नक्कोसिया समणोवासियाणं १ सयसाहस्सी ( क०सु० ) Jain Educationonal बारसो. ॥ ४०॥ 1982 jainelibrary.org Page #85 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ********* संपया दुवा ॥ १६४ ॥ पासस्स ां पर दर्ज पुरिसादाणीयस्स सया चउद्दस पुत्रीणं जिणाणं जिणसंकासाणं सङ्घकर सन्निवाईणं जाव - चउदसपुर्वीणं संपया दुचा | ॥ १६५ ॥ पासस्स णं परद पुरिसदाणीयस्स चन्द्दससया उदिनाणीणं, दससया केवलनाणीणं, इक्कारससया वेजवियाणं, बस्सया रिजमईणं, दस समसया सिध्दा, वीसं प्रयासया सिद्धा, आठसयां विजलमईणं, बस्सया वाईणं, बारससया अणुत्तरोववाइया ॥ १६६ ॥ पासस्स एां परद पुरिसादाणीयस्स विदा अंतगडनूमी दुवा, तंजदा-जुगंतगडनूमी, परियायंतगडनूमी य, जाव चच्चा पुरिसजुगार्ड जुगंतगड भूमी, |तिवासपरियार अंतमकासी ॥ १६७ ॥ तेां कालेां तेणं समएणं पासे परदा पुरिसादाणीए तीसं वासाई अगारवास मज्छे वसित्ता, तेसीइं राईदिच्याइं बनम परियायं पाठ णित्ता, देसूणाई सत्तरि वासाई केव लिपरियायं पाठणित्ता, पडिपुमाई सत्तरि वासाई १ 'अड सया' सार्द्धानि सप्त शतानीति कल्पलतायाम् ! Page #86 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प बारसो. ॥४१॥ HREE%%**********8 सामम्मपरिआयं पाणित्ता, एक वाससयं सवालयं पालश्ता खोणे वेयणिजा-जय-नामगुत्ते श्मीसे उसप्पिणीए दसमसुसमाए समाए बहुविश्वंताए जे से वासाणं पढमे मासे उच्चे परके-सावणसुझे, तस्स णं सावणसुधस्स अहमीपरके एणं उप्पि समेअसेलसिहरंसि । अप्पचनत्तीसश्मे मासिएणं नत्तेणं अपाणएणं विसादाहिं नकत्तेणं जोगमुवागएणं पुत्वएदकालसमयंसि वग्घारियपाणी कालगए विश्कंते जाव सत्वरकप्पहीणे ॥१६॥ पासस्स णं अरदर्ज जाव सव कप्पदीणस्स ज्वालस वाससया विश्वंताई, तेरसमस्स य वाससयस्स अयं तीसश्मे संवबरे काले गव॥१६॥२३॥ | तणं कालेणं तेणं समएणं अरहा 'अरिम्नेमी' पंचचित्ते हुबा, तंजहा-चित्तादिं चुए । चश्ता गन्नं वक्ते, तदेव नरकेवो-जाव चित्ताहिं परिनिवुए ॥ १७०॥ तेणं कालेणं * १ पुच्चरत्तावरत्त० (क० कि०, क० सु० ) ****XXXNXIERXXXREE***** 8 ॥४१॥ ****** in Eden Internationa For Private Personal use only Page #87 -------------------------------------------------------------------------- ________________ । तेणं समएणं अरदा अरिघ्नेमी जे से वासाणं चनचे मासे सत्तमे पके–कत्तिबहुले, तस्स णं कत्तियबहुलस्स बारसीपरके णं अपराजिआठ महाविमाणा बत्तीससागरोवमहिा अणंतरं चयं चश्त्ता इदेव जंबुद्दीवे दीवे नारदे वासे 'सोरियपुरे' नयरे 'समुविजयस्स' रमो नारिआए सिवाएं देवीए पुवरत्तावरत्तकालसमयंसि जाव चित्तादिं गन्नताए वकंते, सत्वं तदेव सुमिणदंसण-दविणसंहरणाश्यं श्च नाणियत्वं ॥१७॥ । तेणं कालेणं तेणं समएणं अरदा अरिहनेमी जे से वासाणं पढमे मासे उच्चे परके . सावणसुथे, तस्स णं सावणसुधस्स पंचमीपरके णं नवएदं मासाणं बहुपडिपुष्माणं जाव चित्ताहिं नरकत्तेणं जोगमुवागएणं आरोग्गा आरोग्गं दारयं पयाया ॥ जम्मणं समुद्दविजयानिलावेणं नेयत्वं, जाव तं होन णं कुमारे ‘अरिम्नेमी' नामेणं ॥१७॥ अरदा अरिहनेमी दरके जाव तिमि वाससयाइं कुमारे अगारवासमज्के वसित्ता णं, १ सिवादेवीए; Join Education Intemational For Private Personal use only Page #88 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कप० ॥४ ॥ पुणरवि लोगंतिएहिं जिअकप्पिएहिं देवेहिं तं चेवं सत्वं नाणियत्वं, जाव दाणं दाश्याणं परिनाश्ता ॥ १७३ ॥जे से वासाणं पढमे मासे उच्चे परके-सावणसुद्धे, तस्स णं सावणसुझस्स हीपरके णं पुवाहकालसमयंसि उत्तरकुराए सीयाए सदेवमणुासुराए पारिसाए अणुगम्ममाणमग्गे जाव बारवईए नयरीए मज्जंमज्जेणं निग्गबइ, निग्गनित्ता जेणेव रेवयए नाणे, तेणेव उवागबइ, उवागवित्ता असोगवरपायवस्स अहे । सीयं गवे, गवित्ता सीयार्ड पच्चोरुहर, पञ्चोरुहित्ता सयमेव आनरणमल्लालंकारं ।। मुयइ, उमुश्त्ता सयमेव पंचमुध्यिं लोयं करेइ, करित्ता उठेणं नत्तेणं अपाणएणं चित्तानकत्तणं जोगसुवागएणं एगं देवदूसमादाय एगेणं पुरिससहस्सेणं सम्मुिमेनवित्ता अगारा अणगारियं पवइए ॥ १७४ ॥ अरदा णं अरिहनेमी चउपन्नं राइंदियाई ॥४ ॥ १ समणु, Jan Education International For Private Personal use only www.jainelorary.org Page #89 -------------------------------------------------------------------------- ________________ निच्चं वोसहकाए चियत्तदेदे, तं चेव सवं, जाव पणपन्नगस्स राइंदियस्स अंतरा वट्टमा*णस्स जे से वासाणं तच्चे मासे पंचमे पके-आसोयबहुले, तस्स णं आसोयबहुलस्स पन्नरसीपरके णं दिवसस्स पलिमे लाए जतिसेलसिहरे वेडसपायवस्स अहे उणं - । तेण अपाणएणं चित्तानकत्तेणं जोगमुवागएणं गाणंतरियाए वट्टमाणस्स अणते अणुत्तरे-जाव सबलोए सवजीवाणं नावे जाणमाणे पासमाणे विदरश ॥ १५॥ अरदर्ज। णं अरिम्नेमिस्स अहारस गणा अहारस गणदरा दुबा ॥१७६॥ अरदर्ज णं अरि नेमिस्स 'वरदत्त'पामुस्काउँ अछारस समणसाहस्सी नक्कोसिया समणसंपया हुना * ॥१७॥ अरदर्ज णं अरिम्नेमिस्स ‘अङजस्किणि पामुकाउँ चत्तालीसं अजियासाहस्सी नक्कोसिया अङियासंपया दुबा ॥ १७ ॥ अरदर्ज णं अरिम्नेमिस्स 'नंद' १ अट्टमेणं (क० सु०, क० कि०, क० कौ०), २ चित्ताहिं नक्खत्तेणं; Main Education International For Private & Personal use only Page #90 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० पामुकाणं समणोवासगाणं एगा सयसाहस्सी अजणत्तरं च सहस्सा नक्कोसिया वारसो. ॥४३॥ समणोवासगाणं संपया दुना ॥ १७ ॥ अरदर्ज णं अरिम्नेमिस्स ‘महासुब्बया'पामु-* काणं समणोवासिआणं तिमि सयसाहस्सी उत्तीसं च सहस्सा उक्कोसिआ समणोवासिआणं संपया हुबा ॥ १० ॥ अरदर्ज णं अरिहनेमिस्स चत्तारि सया चनहसपुवीणं अजिणाणं जिणसंकासाणं सवस्करसंन्निवाईणं जाव संपया दुबा, पन्नरससया उदिनाणीणं, पन्नरससया केवलनाणीणं, पन्नरससया वेनविणं, दससया विनलमईणं, अहसया वाईणं, सोलससया अणुत्तरोववाश्आणं, पन्नरस समणसया सिघा, तीसं अजियासया सिघाइं॥ ११ ॥ अरदर्ज णं अरिहनेमिस्स विदा अंतगडनूमी दुबा, तंजदा-जुगंतगडनूमी परियायंतगडनूमी य-जाव अम्मा पुरिसजुगा जुगंतगडनूमी, ज्वांसपरिआए अंतमकासी ॥ १२॥ तेणं कालेणं तेणं समएणं अरदा १ दुवालसपरिआए; *********************** ॥४३॥ ** Jain Education For Private & Personal use only aineitary org Page #91 -------------------------------------------------------------------------- ________________ अरिघ्नेमी तिमि वाससयाई कुमारवासमज्के वसित्ता, चनपन्नं राइंदियाइं उनमनपरिआयं पाणित्ता, देसृणाइं सत्त वाससयाइं केवलिपरिआयं पानणित्ता, परिपामाइं सत्त वाससयाइं साममपरिआयं पाणित्ता, एगं वाससहस्सं सवानअं पालश्त्ता खीणे । वेयणिजा-जय-नाम-गुत्ते श्मीसे उसप्पिणीए दूसमसुसमाए समाए बहुविश्कताए जे से गिम्दाणं चम्बे मासे अहमे पके आसाढसुथे, तस्स णं आसाढसुझस्स अहमीपके णं प्पिं नङितसेलसिहरंसि पंचहिं बत्तीसेहिं अणगारसएटिं सहिं मासिएणं । नत्तेणं अपाणएणं चित्तौनकत्तेणं जोगमुवाएणं पुवरत्तावरत्तकालसमयंसि नेसजिए। कालगए ( ग्रं0 600 ) जाव सवकप्पहीणे ॥ १७३ ॥ अरदर्ज णं अरिम्नेमिस्स कालगयस्स जाव सवकिप्पहीणस्स चनरासीई वाससहस्साई विश्वंताई, पंचासी १ पडिपुण्णाई; २ चित्ताहिं नक्खत्तेणं; Jain Education For Private Personal Use Only Page #92 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कप० बारसो. मस्स वाससहसस्स नव वाससया विश्वंताई, दसमस्स य वाससयस्स अयं असीइमे संवबरे काले गव॥ १७४ ॥२२॥ ॥४४॥ | 'नमिस्स' णं अरहर्ड कालगयस्स जाव सवउकप्पदीणस्स पंच वाससयसहस्साई, * चनरासीइं च वाससहस्साइं नव य वाससया विश्कताइं, दसमस्स य वाससयस्स अयं असीइमे संवबरे काले गड ॥१५॥२१॥ । 'मुणिसुवयस्स' णं अरदर्ज कालगयस्स इक्कार वाससयसहस्साइं चनरासीइंच वाससहस्साई नव वाससया विश्कंता, दसमस्स यवाससयस्स अयं असीश्मे संवबरे काले गब॥१६॥२०॥ 'मल्लिस्स' णं अरह जाव सबस्कप्पहीणस्स पन्नहिं वाससयसहस्साइं चनरासीई ॥४४॥ Jain Ede For Private & Personal use only Page #93 -------------------------------------------------------------------------- ________________ * च वाससहस्साई नव वाससयाई विश्वंताई, दसमस्स य वाससयस्स अयं असीश्मे * संवचरे काले गबइ ॥ १७ ॥१५॥ । 'अरस्स' णं अरद जाव सबकप्पहीणस्स एगे वासकोडिसहस्से विश्कते, सेसं . जहा मल्लिस्स-तं च एयं-पंचसहिं लरका चनरासीई वास सहस्सा विश्वंता, तमि समए महावीरो निबुर्ज, त परं नव वाससया विश्कता दसमस्स य वाससयरस अयं असीश्मे संवबरे काले गह। एवं अग्ग जाव सेयंसो ताव दध्वं ॥ १७ ॥१७॥ | 'कुंथुस्स' णं अरदर्ज जाव सबउकप्पहीणस्स एगे चउनागपलिउँवमे विश्कते, पंचसहि वाससयसहस्सा, सेसं जदा मल्लिस्स ॥ १५॥१७॥ | संतिस्स णं अरदउँ जाव सबस्कप्पहीणस्स एगे चउन्नागूणे पलिवमे विश्कते पन्नाहिं च, सयसहस्सा सेसं जहा मल्लिस्स ॥ १० ॥१६॥ १ सहस्साई Jain Education tonal Page #94 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० ॥४५॥ धम्मस्स णं अरह जाव सबस्कप्पहीणस्स तिमि सागरोवमाइं विश्कताई, पन्नहिं च, सेसं जहा मनिस्स ॥ ११ ॥ १५ ॥ | अणंतस्स णं अरदउँ जाव सबउरकप्पहीणस्स सत्त सागरोवमाइं विश्कता पन्नहिं च, सेंसं जदा मल्लिस्स ॥ १५ ॥ १४ ॥ * विमलस्स णं अरदर्ज जाव सबजकप्पदीणस्स सोलस सागरोवमाइं विश्कताई, पन्नहिं च, सेसं जदा मल्लिस्स ॥ २३ ॥ १३ ॥ | वासुपुजस्स एणं अरदउँ जाव सबस्कप्पहीणस्स गयालीसं सागरोवमाइं विश्कता पन्नहिं च, सेसं जहा मल्लिस्स ॥१४॥१२॥ | सिङसस्स णं अरदर्ज जाव सबजुकप्पहीणस्स एगे सागरोवमसए विश्कते पन्न च, सेसं जहा मल्लिस्स ॥ १५ ॥११॥ ॥४५॥ lain Education International For Private & Personal use only Page #95 -------------------------------------------------------------------------- ________________ सीअलस्सणं अरदर्ज जाव सबकप्पहीणस्स एगा सागरोवमकोडी तिवास-अ-इनवमासादिअ-बायालीसवाससहस्सेहिं कणि विश्कता, एयंमि समए महावीरो निवुर्ज, * तऽविय णं परं नव वाससयाई विश्कताई, दसमस्स य वाससयस्स अयं असीश्मे संवबरे काले गब॥१६॥१०॥ सुविहिस्स णं अरदर्ज पुष्पदंतस्स जाव सबस्कप्पहीणस्स दस सागरोवमकोडी विश्कंता, सेसं जहा सीअलस्स, तं च श्म-तिवास-अध्नवमासाहिअ-बायालीसवाससहस्सेहिं कणिआ विश्कंता श्च्चाइ ॥ १० ॥॥ चंदप्पदस्स णं अरदर्ज जाव सबउरकप्पहीणस्स एगं सागरोवमकोडिसयं विश्कंतं, सेसं जहा सीअलस्स, तं च श्म-तिवास-अ-इनवमासादिय-बायालीससहस्सेहिं । कणगमिच्चाइ ॥ एG ॥ ७ ॥ KSEXXXXX************** Main Education For Private & Personal use only IPAKIRiainelibrary.org R Page #96 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० | सुपासस्स णं अरहज जाव सबजकप्पहीणस्स एगे सागरोवमकोडिसहस्से विश्- बारसो. ॥६॥ कंते, सेसं जहा सीअलस्स, तंच इम-तिवास-अनवमासादिअ-बायालीसवासहससेदि । कणिआ इच्चाइ ॥ १ ॥ ७॥ पनमप्पदस्स णं अरदर्ज जाव सबस्कप्पहीणस्स दस सागरोवमकोडिसहस्सा विश्कता, तिवास-अनवमासादिय-बायालीस वास सहस्सेदिं श्चाश्यं, सेसं जहा । सीअलस्स ॥२०० ॥६॥ | सुमश्स्स णं अरदले जाव सवदुरकप्पहीणस्स एगे सागरोवमकोडिसयसहस्से विश्कतें सेसं जदा सीअलस्स, तं च इम-तिवास-अनवमासादिय-बायालीसवाससहस्सेहिं श्च्चाश्यं ॥२०१॥५॥ अनिनदंणस्स एणं अरह जाव सबदुकप्पहीणस्स दस सागरोवमकोडिसयसहस्सा ॥४६॥ Main Education international For Private & Personal use only Page #97 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ************************ विश्कता, सेसं जहा सीअलस्स, तं च इमं तिवास-अनवमासादिय-बायालीसवाससहस्सेहिं इच्चाश्यं ॥२०॥४॥ | संनवस्स णं अरदर्ज जाव सबदुरस्कप्पहीणस्स वीसं सागरोवमकोडिसयसहस्सा विश्कता, सेसं जदा सीअलस्स, तं च इम-तिवास-अइनमासादिय-बायालीसवासस *हस्सेहिं श्चाश्यं ॥ २०३ ॥ ३ ॥ • अजियस्स णं अरद जाव सबदुकप्पहीणस्स पन्नासं सागरोवमकोडिसयसहस्सा विश्कता, सेसं जहा सीअलस्स, तं च श्म-तिवास-अ-इनवमासादिय-बायालीसवाससहस्सेहिं श्च्चाश्यं ॥२०४॥२॥ तेणं कालेणं तेणं समएणं 'नसन्ने' णं अरदा कोसलिए चननत्तरासाढे अन्नीपंचमे , हबा, तंजहा-उत्तरासाढाहिं चुए-चश्त्ता गग्नं वकंते जाव अन्नीश्णा परिनिवुए ॥२०॥ For Private & Personal use only Page #98 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० ॥४७॥ तेणं कालेणं तेणं समएणं उसने णं अरहा कोसलिए जे से गिम्हाणं चनवे मासे . | बारसो. सत्तमे परके-आसाढबहुले, तस्स णं आसाढबहुलस्स चनचीपरके णं सबसिधा महाविमाणाऊ तित्तीसं सागरोवमहिमा अणंतर चयं, चश्त्ता इदेव जंबुद्दीवे दीवे । नारदे वासे इकागनूमीए नानिस्स कुलगरस्स मरुदेवीए नारिआए पुवरत्तावरत्तकालसमयंसि आहारवऋतिए जाव गप्नत्ताए वक्ते ॥२०६॥ उसने णं अरहा कोस लिए तिन्नाणोवगए आवि हुबा, तंजदा चश्स्सामि त्ति जाण-जाव-सुमिणे पास तंजहा-'गयवसहगाहा । सवं तहेव-नवरं पढमं उसनं मुद्देणं अश्तं पासइ-सेसाउं| गयं । नानिकुलगरस्स साहेश, सुविणपाढगा नलि, नाजिकुलगरो सयमेव वागरे ॥ २०॥ तेणं कालेणं तेणं समएणं उसने णं अरदा कोसलिए जे से गिम्हाणं पढमे | ____ १ मरुदेवाए; २ साहेइ; ॥४ ॥ ein Et For Private Personal Use Only Page #99 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ** ****** **** मासे, पढमे परके-चित्तबहुले, तस्स णं चित्तबहुलम्स अहमीपके णं नवएवं मासाणं बहुपम्पुिरमाणं अच्माणं राइंदियाणं जाव आसाढाहिं नस्कत्तेणं जोगमुवागएणं जाव आरोग्गा आरोग्गं दारयं पयाया ॥ २० ॥ तं चेव सवं-जाव देवा देवी य वसुदा*रवासं वासिंसु, सेसं तदेव चारगसोदणं माणुम्माणवड्ढवणं-नस्सुक्कमाश्यहिश्वडिअजू-|| यवऊं सत्वं जाणिअव्वं ॥२०णानसनेणं अरदा कोसलिए कासवगुत्ते णं तस्स णं पंच नामधिजा एवमादिऊंति, तंजहा-नसने वा, पढमतिबयरे इ वा, पढमराया इवा, पढम, निकायरेश्वा, पढमजिणेश्वा ॥२१॥जसने णं अरदा कोसलिए दरके दकपश्मे पडिरूवे अल्लीणे नद्दए विणीए वीसं पुवसयसहस्साई कुमारवासमज्के वसइ,वसित्ता तेवहिं पुवसयसहस्साइंरजवासमम्के वसइ,तेवहिं चपुवसयसहस्साइंरजवासमज्केवसमाणे लेहा । आजे गणियप्पहाणासनणरुयपजावसाणा बावत्तरि कलाऊँ, चनसहिमदिलागुणे, १ तित्थंकरे; ********* Jain Education For Private Personal Use Only Page #100 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प ॥४ ॥ सिप्पसयं च कम्माणं, तिन्निवि पयाहिआए उवदिसइ, उवदिसित्ता पुत्तसयं रऊसए अनि- बारसो. सिंचइ, अनिसिंचिंत्ता पुणरवि लोअंतिएहिं जिअकप्पिएहिं देवेहिं ताहिं शाहिं जाव वग्गूहिं, सेसं तं चेव सर्व जाणिअवं, जाव दाणं दाइआणं परिनाइत्ता जे से गिम्हाणं| पढमे मासे पढमे परके-चित्तबहुले, तस्स णं चित्तबहुलस्स अहमीपरके एणं दिवसस्स . पनिमे नागे सुदंसणाए सीयाए सदेवमणुासुराए परिसाए समणुगम्ममाणमग्गे जाव । विणीयं रायहाणि मज्जंमज्जेणं णिग्गबइ, णिग्गचित्ता जेणेव सिचवणे उजाणे जेणेव । असोगवरपायवे तेणेव उवागवइ, उवागचित्ता असोगवरपायवस्स जाव सयमेव चउमु अं लोअं करेइ, करित्ता उठेणं नत्तेणं अपाणएणं आसाढाहिं नस्कत्तेणं जोगमुवागए णं जग्गाणं जोगाणं राइमाणं खत्तियाणं च चनहिं पुरिससहस्सेहिं सहिं एगं देवदूसमादाय मुंझे नवित्ता अगारा अणगारियं पवइए ॥११॥ उसने णं अरहा। ॥४ ॥ lainEducad For Private Personal use only Page #101 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कोसलिए एगं वाससहस्सं निच्चं वोसठकाए चियत्तदेदे जे केश उवसग्गा जाव0 अप्पाणं नावेमाणसं शक्कं वाससहस्सं विश्वंतं, त णं जे से हेमंताणं चनचे मासे सत्तमे पके-फग्गुणबहुले, तस्स णं फग्गुणबहुलस्स इक्कारसीपरके णं पुवाहकालसमयसि । , पुरिमतालस्स नयरस्स बहिआ सगडमुहंसि नाणंसि नग्गोहवरपायवस्स अदे अठमेणं लत्तणं अपाणएणं आसाढाहिं नकत्तेणं जोगमुवागएणं काणंतरिआए वट्टमाणस्स अणंते जाव जाणमाणे पासमाणे विहरश् ॥१२॥ उसनस्स णं अरदर्ज। कोसलिअस्स चनरासी गणा, चनरासी गणदरा हुबा ॥१३॥ उसनस्स एं । अरदर्ज कोसखिअस्स 'नसनसेण'पामुकाणं चनरासीइ समणसाहस्सी नक्कोसिया । समणसंपया हुना॥१४॥उसनस्स णं अरदर्ज कोसलिअस्स 'बंनि-सुंदरि पामुकाणं से अक्रियाणं तिमि सयसाहस्सी उक्कोसिया अजियासंपया हुना ॥१५॥ उसनस्स JainEducation intern For Private Personal use only wanaw.jainelorary.org Page #102 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प ॥४ ॥ णं अरदर्ज कोसखिअस्स 'सिजंस' पामुस्काणं समणोवासगाणं तिमि सयसादस्सी बारसो. पंचसहस्सा उक्कोसिया समणोवासगसंपया हुबा ॥१६॥ उसनस्सणं अरदर्ज कोसलिअस्स 'सुन्नद्दा'पामुकाणं समणोवासियाणं पंचसयसाहस्सी चनपमं च सहस्सा नक्कोसिया समणोवासियाणं संपया हुबा ॥ १७॥ नसनस्स णं अरदर्ज कोसलिअस्स चत्तारि सदस्सा सत्तसया परमासा चनद्दसपुवीणं अजिणाणं जिणसंकासाणं . जाव उक्कोसिया चनदसपुविसंपया हुबा ॥ १७॥ उसनस्स णं अरदर्ज कोसलिअस्स नव सहस्सा उदिनाणीणं उक्कोसिया उदिनाणीणं संपया हुत्या ॥ २१ ॥ उसनस्स णं अरदर्ज केसालिअस्स वीससहस्सा केवलनाणीणं. उक्कोसिया केवलनाणीणं संपया हुत्था ॥ २२ ॥ उसनस्स णं अरदर्ज कोसखिअस्स वीससहस्सा उच्च सया वेनवियाणं0 उक्कोसिया विनविसंपया हुत्या ॥ २१॥ उसनस्स णं अरदर्ज ॥४ ॥ Jain Education For Private Personal use only Page #103 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कोसखिअस्स बारस सहरस्सा उच्च सया पमास्सा विनलमईणं अड्डाइजेसु दीवेसु दोसु असमुद्देसु सन्नीणं पंचिंदियाणं पछत्तगाणं मणोगए नावे जाणमाणाणं पासमाणाणं नक्कोसिआ विनलमश्संपया हुबा ॥ २२॥ उसनस्स णं अरदर्ज कोसलिअस्स बारस सहस्सा उच्च सया पमासा वाईणं ॥ २२३ ॥ उसनस्स णं अरह कोसलि अस्स वीसं अंतेवासिसहस्सा सिझा, उसनस्स णं अरदर्ज कोसलिअस्स चत्तालीम । अजियासाहस्सी सिघाउँ ॥ २२४ ॥ उसनस्स णं अरदर्ज कोसलिअस्स बावीस . सहस्सा नवसया अणुत्तरोववाश्याणं गश्कल्लाणाणं जाव आगमेसि नदाणं नक्को-11 सा संपया हुत्या ॥ १२५ ॥ उसनस्स णं अरदर्ज कोसलिअस्स उविदा अंतगडनूमी दुबा, तंजहा-जुगंतगडनूमी परियायंतगडनूमी य, जाव असंखिजा पुरि १ सहस्सा JainEducation International For Private Personal use only Page #104 -------------------------------------------------------------------------- ________________ करूप० ॥ ५० ॥ ************************* सजुगार्ड जुगंतगडनूमी, अंतोमुदुत्तपरियार अंतमकासी ॥ २१६ ॥ तेां कालेां बारसो. तेणं समरणं उसने अरदा कोस लिए वीसं पुद्दी सय सदस्साई कुमारवासमच्छे वसित्ता णं, तेवहिं पुवसय सदस्साइं रजवासमज्जे वसित्ता णं, तेसीइं पुवसयसदस्साई अगावासमज्छे वसित्ता णं, एवं वाससदस्सं बनमन्त्रपरियायं पाउ णित्ता एवं पुवसयसदस्सं वाससदस्सूां केव लिपरिप्रायं पाणित्ता पडिप्रेसं पुवसयसदस्सं साममपरियागं पान - | णित्ता चउरासीइं पुवसयसदस्साई सवनयं पालइत्ता खीणे वेय गिजाउयनामगुत्ते इमी से उसप्पिणीए सुसम समाए समाए बहुविश्कताए तिदिं वासेदिं नवमेदि य मासेदिं सेसेदिं जे से हेमंताणं तच्चे मासे पंचमे परके - मादबहुले, तस्स एणं मादबहुलस्स ( ग्रं० ए००) तेरस परके णं उप्पि हावयसेल सिदरंसि दसदिं णगारसदस्सेदिं १ संपुरणं. ॥ ५० ॥ Page #105 -------------------------------------------------------------------------- ________________ सहिं चोइसमेणं नत्तेणं अपाणएणं अनीश्णा नकत्तेणं जोगमुवागएणं पुवाहकाख*समयंसि संपलियंकनिसम्मे कालगए विश्कंते जाव सबउकप्पहीणे ॥॥ उसनस्स *णं अरदर्ज कोसलियस्स कालगयस्स जाव सबस्कप्पहीणस्स तिमि वासा अनवमा *य मासा विश्वंता, तवि परं एगा सागरोवमकोडाकोडी तिवास-अनवमासादिय बायालीसाए वाससहस्सेहिं कणिया विश्कता, एयंमि समए समणे जगवं महावीरे *परिनिवुडे, तउवि परं नववाससया विश्कता, दसमस्स य वाससयस्स अयं असी श्मे संवबरे काले गव॥२२॥ | तेणं कालेणं तेणं समएणं समणस्स नगवर्ड महावीरस्स नव गणा, इक्कारस गणदरा दुबा ॥१॥ से केणणं नंते ! एवं वुच्च-समणस्स नगवळ महावीरस्स नव गणा, इक्कारस गणदरा दुना ? ॥२॥ समणस्स नगव महावीरस्स जि 00000ccce For Private Personal Use Only Page #106 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० ॥५ ॥ इंदनूई' अणगारे गोयमें गुत्तेणं पंच समणसयाइं वाएइ, मछिमए 'अग्गिनूई बारसो. अणगारे गोयमे गुत्तेणं पंच समणसयाई वाएइ, कणीअसे अणगारे 'वाउनूई' गोयम गुत्तेणं पंच समसयाई वाएइ, थेरे 'अऊवियत्ते' नारदाए गुत्तेणं पंच समणसयाई । वाएइ, थेरे 'अजसुहम्मे' अग्गिवेसायणे गुत्तेणं पंच समणसयाइं वाएइ, थेरे 'मंमितपुत्ते' वासिहे गुत्तेणं अध्ठाइं समणसयाई वाएइ, थेरे ‘मोरिअपुत्ते' कासवे गुत्तेणं । अध्छाइंसमणसयाइंवाएइ, थेरे ‘अकंपिए' गोयमे गुत्तेणं-थेरे 'अयललाया' हारिआ यणे गुत्तेणं-पत्तेयं एते उम्मिवि थेरा तिमि तिमि समणसयाइं वाएंति, थेरे ‘अजमेरो'-थेरे । पनासे'-एए उम्मिवि थेरा कोमिन्ना गुत्तेणं तिमि तिमि समणसयाई वाएंति।से तेणणं । अजो! एवं वुच्चश्-समणस्स लगव महावीरस्स नव गणा, इक्कारस गणहरा हुबा ॥५१॥ १ गोयमसगोत्तण Jain Edt For Private & Personal use only Page #107 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ॥३॥ सवेवि णं एते समणस्स नगवर्ड महावीरस्स एक्कारसवि गणहरा ज्वालसंगिणो * चउद्दसपुश्विणो समत्तगणिपिमगधारगा रायगिदे नगरे मासिएणं लत्तेणं अपाणएणं * कालगया जाव सबस्कप्पहीणा ॥ थेरे 'इंदनूई,' थेरे ‘अजसुहम्मे' य सिझिगए महावीरे पना उल्लिवि थेरा परिनिबुया ॥ जे इमे अऊत्ताए समणा निग्गंथा विदरंति, एए । णं सवे 'अङसुहम्मस्स' अणगारस्स आवच्चिजा, अवसेसा गणदरा निरवच्चा वुनिन्ना । ॥४॥ समणे नगवं 'महावीरे' कासवगुत्ते णं । समणस्स णं जगवर्ड महावीरस्स कासवगुत्तस्स 'अङसुहम्मे' थेरे अंतेवासी अग्गिवेसायणगुत्ते ॥१॥ थेरस्स णं अजासुदम्मस्स अग्गिवेसायणगुत्तस्स 'अजजंबु'नामे थेरे अंतेवासी कासवगुत्तेणें ॥२॥ थेरस्सणं अजाजंबुणामस्स कासवगुत्तस्स 'अजाप्पनवे' थेरे अंतेवासी कच्चायणसगुत्ते । ॥३॥ थेरस्स णं अजप्पन्नवस्स कच्चायणसगुत्तस्स 'अऊसिंझनवे' थेरे अंतेवासी . १ इक्कारसवि. २ गोत्ते इत्यपिपाठः Page #108 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प बारसो. मणगपिया वनसगुत्ते ॥ ४॥ थेरस्स णं अऊसिङनवस्स मणगपिनणो वच्चसगुत्तस्स अङजसनद्दे' थेरे अंतेवासी तुंगियायणसगुत्ते ॥५॥ संखित्तवायणाए अजजसजदाउ अग्ग एवं थेरावली जणिया, तंजदा-थेरस्स णं अङजसनहस्स तुंगियायणसगुत्तस्स अंतेवासी ज्वे थेरा-थेरे ‘अऊसंजूअविजए' माढरसगुत्ते, थेरे 'अऊलद्दबाढू' पाईण* सगुत्ते ॥थेरस्स णं असंनूअविजयस्स माढरसगुत्तस्स अंतेवासी थेरे 'अजथूलनद्दे' गोयमसगुत्ते ॥ थेरस्स णं अजथूबनबस्स गोयमसगुत्तस्स अंतेवासी ज्वे थेरा-' अङमहागिरी' एलावच्चसगुत्ते, थेरे ‘अऊसुहवी' वासिघ्सगुत्ते ॥ - थेरस्स णं अङसुदबिस्स वासिम्सगुत्तस्स अंतेवासी ज्वे थेरा 'सुध्यिसुप्पडिबुझा'| कोडियकाकंदगा वग्यावच्चसगुत्ता ॥ थेराणं सुध्यिसुप्पडिवुशाणं कोडियकाकंदगाणं वग्यावच्चसगुत्ताणं अंतेवासी थेरे 'अजाइंददिन्ने' कोसियगुत्ते ॥ थेरस्स णं अजाइंद ॥५ ॥ lainEducat For Private Personal use only Page #109 -------------------------------------------------------------------------- ________________ दिन्नस्स कोसियगुत्तस्स अंतेवासी थेरे 'अऊदिन्ने' गोयमसगुत्ते ॥ थेरस्स णं अजादिनस्स गोयमसगुत्तस्स अंतेवासी थेरे 'अङसीदगिरी' जाइस्सरे कोसियसगुत्ते ॥रस्स णं अङसीदगिरिस्स जाइस्सरस्स कोसियसगुत्तस्स अंतेवासी थेरे 'अजवरे' गोय* मसगुत्ते ॥ थेरस्स णं अऊवश्रस्स गोयमसगुत्तस्स अंतेवासी थेरे 'अऊवश्रसेणे| नकोसियगुत्ते॥ थेरस्स णं अऊवश्रसेणस्स नक्कोसिअगुत्तस्स अंतेवासी चत्तारि थेराथेरे 'अऊनाश्ले' (१) थेरे 'अऊपोमिले' (३) थेरे 'अऊजयंते' (३) थेरे 'अजतावसे (५)॥थेराउ अजानाश्वा अजनाइला सादा निग्गया, (२) थेराउ अऊपोमिला अऊपोमिला सादा निग्गया,(२)थेराउ अजयंता अजाजयंती साहा निग्गया,(३)थेराउ | अऊतावसा अजतावसी सादा निग्गया () इति ॥६॥ विवरवायणाए पुण अऊजसनद्दा पुर थेरावली एवं पलोइजार, तंजदा-थेरस्स णं अऊजसनहस्स तुंगि १ विलोइज्जइ (क० कि०). For Private Personal Use Only Page #110 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प ॥५३॥ RRRRRRRRSX यायणसगुत्तस्स श्मे दो थेरा अंतेवासी अदावच्चा अनिमाया हुबा, तंजहा-थेरे 'अ- वारसो. जनबाहू' पाईणसगुत्ते, थेरे अजासंचूविजए' माढरसगुत्तें ॥ थेरस्स णं अज्ञानहबाहस्स पाईणसगुत्तस्स इमे चत्तारि थेरा अंतेवासी अदावच्चा अनिमाया हुबा, तंजहा-थेरे 'गोदासे' (२) थेरे 'अग्गिदत्ते' (२) थेरे 'जम्मदत्ते' (३) थेरे ‘सोमदत्ते।। (५) कासवगुत्तेणं ॥ थेरेहिंतो गोदासेहिंतो कासवगुत्तेहिंतो इन णं गोदासगणे नाम । गणे निग्गए, तस्स णं श्मा चत्तारि साहा एवमादिऊंति, तंजदा-तामलित्तिया (१) कोडीवरिसिया (२) पंमुवैक्षणिया (३) दासीखब्बमिया (४)॥ थेरस्स णं अऊसंनूयविजयस्स माढरसगुत्तस्स इमे ज्वालस थेरा अंतेवासी अदावच्चा अनिरमाया हुबा, तंजदा-"नंदणनहु (१) वनंदण-नद्दे (२) तह तीसजद्द (३) जसलद्दे (४)। थेरे य सुमणंनद्दे (५) मणिनद्दे (६) पुस्मन्नद्दे (७) य ॥१॥ थेरे अ थूखनद्दे (G) १ संभूइविजए; २ पोंडवद्धणया (क० कि०); ३ सुमिणभद्दे (क० कि०); ४ गणिभदे; * * * ***RAL Jain Education For Private Personal Use Only Page #111 -------------------------------------------------------------------------- ________________ उअमई (ए) जंबुनामधिळे (१०) य। थेरे अ दीदनद्दे (१२) थेरे तद पंमुलद्दे (१२) य" ॥२॥ रस्स णं अजसंनूअविजयस्स माढरसगुत्तस्स श्मा सत्त अंतेवासिणी अदावच्चाउँ अनिमाया हुबा, तंजहा--"जरका (१) य जकदिमा (२) नूया (३) तह चेव नूयदिमा य (४)। सेणा (५) वेणा (६) रेणा (७) नगिणी थूलनदस्स" ॥१॥ थेरस्स णं अऊथूलनबस्स गोयमसगुत्तस्स इमे दो थेरा अंतेवासी अदावच्चा अनिमाया दुबा, तंजदा-थेरे 'अजमदागिरी' एलावच्चसगुत्ते । थेरे 'अजसुहबी' वासिसगुत्ते ॥ थेरस्स णं अजमदागिरिस्स एलावच्चसगुत्तस्स इमे अष्ठ थेरा अंतेवासी अदावच्चा अनिमाया हुबा, तंजदा-थेरे'उत्तरे' (१), थेरे 'बलिस्सहे' (२), थेरे 'धणड्डे (३), थेरे ‘सिरिजद्दे' (४),थेरे 'कोमिन्ने' (५), थेरे 'नागे' (६),धेरे 'नागमित्ते' (७), थेरे उम्बूए 'रोहगुत्ते' कोसियगुत्ते णं (1) ॥ थेरेहितोणं मुबूएहितो रोदगुत्तेहिंतो कोसियगु For Private Personal Use Only Page #112 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० ॥ ५४ ॥ ******* ****** तेहिंतो तब णं तेरासिया निग्गया । येरेहिंतो एां उत्तरब लिस्सदेर्दितो तब एां उत्तरब - | तिस्सदे नामं गणे निग्गए-तस्स एणं इमाउं चत्तारि साहा एवमादिति, तंजदा - कोसंबिया (१), सोईत्तिया (२), कोळंबा (३), चंदनागरी (४) ॥ येरस्सां असु बिस्स वासिष्ठसगुत्तस्स इमे ज्वालस थेरा अंतेवासी प्रदावच्चा अजिमाया दुवा, तंजदा- "थेरे प्र प्रकरोदा (१) नद्दजसे (२) य कामिड्डी (४) । सुप्रिय (५) सुप्प किबु -हे (६) रकिय (1) तद रोदगुत्ते (G) ॥ १ ॥ इसिगुत्ते (ए) सिरिगुत्ते (१०) गणी अ बने (११) गणी य तद सोमें (१२) । दस दो प्र गणदरा खलु, एए सीसा सुदच्चिस्स ॥ २ ॥ येरेदितो एां प्रकरोदणेदितो एां कासवगुत्तेदितो णं तच णं उद्देदगणे नामं गणे निग्गए, तस्सिमार्ज चत्तारि सादार्ज निग्गयाउ, बच्च कुलाई एवमादिति । से किं तं सदा ? सादा एवमादिति, तंजदा - उडुंब रितिया (१), मासपूरिया (२), मइपत्तिया (३), पुसपत्तिया ४, से तं १ मुत्तिवत्ति (क० कि० ) Jain Education2tional बारसो. ॥ ५४ ॥ ww.jainelibrary.org Page #113 -------------------------------------------------------------------------- ________________ साहार्ड ॥ से किं तं कुलाई? कुलाई एवमादिऊंति, तंजहा-“पढमं च नागनूयं, (१) विश्यं पुण सोमनूश्यं (२) हो। अह उल्लगढ तश्शं (३), चनवयं दबलिङ (४) तु॥१॥ पंचमगं नंदिऊं (५), उठं पुण पारिदासयं (६) दोश् । उद्देहगणस्सेए, बच्च कुला हुंति नायवा" ॥२॥ थेरेदितो णं सिरिगुत्तेहिंतो दारियसगुत्तेदितो श्व णं चार गणे नामं गणे निग्गए, तस्स णं श्मा चत्तारि सादाज, सत्त य कुलाइं एवमादिङांति, से किं तं सादा ? साहार्ड एवमाहिऊंति, तंजहा-हारियमालागारी (१), संकासीआ (२), गवेधुया (३), वजनागरी (४), से तं सादा ॥ से किं तं कुलाइं ? कुला एवमादिऊंति, तंजहा-“पढमित्र वालिङ (१), बीयं पुण पीश्धम्मिश्र (२) हो। तश्रं पुण हालिङ (३), चनवयं पूसमित्तिकं (1)॥१॥ पंचमगं मालिऊं (५), *पुण अङवेडयं (६) होइ । सत्तमयं कण्हसहं (७), सत्त कुला चारणगणस्स" ॥२॥ १ पण्णपत्तिआ (क० कि०, क० मु०) For Private Personal use only Page #114 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० ॥ ५५ ॥ ******* येरेहिंतो द्दजसेदितो नारद्दायसगुत्तेर्दितो व ां उडुवामियगणे नामं गणे निग्गए, तस्स एां इमाउं चत्तारि सादार्ज, तिमि कुलाई एवमादिति से किं तं सादार्ज ? सादाजे एवमादिऊंति, तंजदा - चंपिडिया (१) नद्दितिया (२) काकंदिया ( ३ ) मेहलिजिया ( ४ ) से तं सादार्ज ॥ से किं तं कुलाई ? कुलाई एवमादिति, तंजदा-जद्द - जसियं (१) तद नद्दगुत्तियं (२) तइयं च दोइ जसन (३) । एयाई जमुवाडिय -ग|स्स तिमेव य कुलाई ॥ १ ॥ येरेहिंतो गं कामिड्डी हिंतो कोडालसगुत्तेहिंतो इच वेसवाडियगणे नामं गणे निग्गए, तस्स णं इमार्ज चत्तारि सादा, चत्तारि कुलाई | एवमादिति । से किं तं सादार्ज ? सादार्ज एहमादिति तंजदा - सावचिया (१) र - पालिया (२) अंतरितिया (३) खेमलिशिया (४) से तं सादा ॥ से किं तं कुलाई ? कुलाई एवमादिति, तंजदा - "गणियं (१) मेहिय ( २) कामड्डि (३) च तद होइ 1 Jain Education sel . बारसो. ॥ ५५ ॥ Page #115 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ********************* इंदपुरगं (४) च । एयाई वेसवामिय-गणस्स चत्तारि उ कुटाई" ॥१॥ थेरेदितो णं ।। इसिगुत्तेहिंतो काकंदएहिंतो वासिम्सगुत्तेहिंतो श्व णं माणवगणे नामं गणे निग्गए, तस्स णं श्मा चत्तारि सादा, तिमि य कुलाई एवमादिऊंति, से किं तं सादा ? साहार्ड एवमादिऊंति, तंजदा-कासविङिया (१) गोयमिजिया (२) वासिध्यिा (३) सोरहिया (४) से तं सादाजे ॥ से किं कुटाई? कुलाई एवमादिङति, तंजहा-“इसिगुति । श्व पढम (१) बीयं इसिदत्तिअं मुणेयवं (२) तश्यं च अनिजयंतं (३) तिमि कुला माणगगणस्स" ॥१॥ थेरेहिंतो सुध्यि-सुप्पडिबुझेहिंतो कोडिय-काकंदएहिंतो वग्घावच्चसगुत्तेहिंतो श्व णं कोडियगणे नामं गणे निग्गए, तस्स णं श्मा चत्तारि सादा, चत्तारि कुलाइंच एवमादिऊंति । से किं तं सादा ? सादा एवमादिङति, * तंजदा-"नच्चानागरि (१) विजादरी य (२) वरीय (३) मज्जिमिला (४) य।कोडिय १ गुत्त इत्थ (क० को०) गुत्तियत्थ (क० सु०) * For Private & Personal use only Page #116 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० ॥५६॥ ******* | गणस्स एया, दवंति चत्तारि सादा ॥ १ ॥ से तं सादा ॥ से किं तं कुलाई ? कुलाई | एवमादिति, तंजदा -- पढमिच बंजलि (१) विश्यं नामेण वचलिऊं तु । तइयं पुण वाणि (३) चचयं पादवादयं (४) ॥ १ ॥ येराणं सुप्रियसुप्पडिबु-हाणं कोडियकाकंदयाणं वग्घावच्चसगुत्ताणं इमे पंच थेरा अंतेवासी अदावच्चा अनिमाया हुच्छा, तंजदा - येरे प्रद दिने (१) येरे पियगंथे (२) थेरे विजाहरगोवाले कासवगत्ते (३) थेरे ईसिदिन्ने (४) येरे परिददत्ते (५) थेरेदितो एां पियगंथेदितो एच एणं मज्जिमा सादा निग्गया, थेरेहिंतो णं विकादरगोवालेदितो कासवगत्तेर्दितो एच एं विज्ञादरी सादा निग्गया | येरस्स एणं इंद दिन्नस्स कासवगुत्तस्स 'अदिन्ने' थेरे अंतेवासी गोयमसगुत्ते । थेरस्स दिन्नस्स गोयमसगुत्तस्स इमे दो थेरा अंतेवासी प्रदावच्चा अनिमाया हुच्चा, तंजदा - येरे ' असं तिसे लिए' माढरसगुत्ते (१) थेरे 'प्रसी - १ इसिदत्ते (क०सु०, क० कि० ) : बारसो. ॥ ५६ ॥ Page #117 -------------------------------------------------------------------------- ________________ हगिरी' जाइस्सरे कोसियगुत्ते (२)। थेरेहितोणं अङसंतिसेणिएहिंतो माढरसगुत्तेहिंतो एब णं उच्चानागरी सादा निग्गया। थेरस्स णं असंतिसेणियस्स माढरसगुत्तस्स इमे । चत्तारि थेरा अंतेवासी अदावच्चा अनिमाया हुना, तंजहा-(ग्रं० १000) थेरे। 'अजसेणिए' (१) थेरे 'अजतावसे' (२) थेरे 'अङकुबेरे' (३) थेरे 'अजइसिपालिए | (४)। थेरेहिंतो णं अजसेणिएहिंतो एच णं अऊसेणिया सादा निग्गया, थेरेहिंतो णं , अजतावसेहिंतो एच एणं अऊतावसी साहा निग्गया, थेरेहिंतो णं अजकुबरेहिंतो एन । णं अङकुबेरा साहा निग्गया, थेरेदितो णं अशसिपालिएहिंतो एच णं अजइसिपाखिया सादा निग्गया। थेरस्स णं अजसीदगिरिस्स जाइस्सरस्स कोसियगुत्तस्स श्मे चत्तारि थेरा अंतेवासी अदावच्चा अनिमाया दुबा, तंजदा-थेरे 'धणगिरी' थेरे । 'अकवरे' थेरे 'अऊसमिए' थेरे 'अरिददिन्ने ॥थेरेदितो णं अङसमिएदितो गोयमसगुत्तेहिंतो श्च णं बंनदीविया साहा निग्गया, थेरेहिंतोणं अजवहिंतो गोयमसगुत्ते Jain Education For Private Personal Use Only Page #118 -------------------------------------------------------------------------- ________________ F** कल्प ॥ ॥ ******** हिंतोश्च णं अजवश्री साहा निग्गयाथेरस्स णं अजवरस्स गोयमसगुत्तस्स इमे तिमि बारसो. थेरा अंतेवासी अहावच्चा अनिमाया हुना, तंजहा-धेरे ‘अङवश्रसेणे' थेरे 'अऊपैनमे थेरे'अऊरदे॥थेरेदितो णंअजवइरसेणेहिंतोचणं अजनाइली साहा निग्गया,थेरेदितो , णं अङपनमेहिंतोश्च णं अजपनमा सादा निग्गया, थेरेहिंतोणं अजरदेहिंतोश्च णं । अजजयंती सादा निग्गया॥रस्स णं अजरदस्स बसगुत्तस्स 'अऊपूसगिरी' थेरे अंतेवासी कोसियगुत्ते॥॥थेरस्स णं अजापूसगिरिस्स कोसियगुत्तस्स अजफग्गुमित्ते' थेरे अं| तेवासी गोयमसगत्ते॥३॥रस्सणं अफग्गुमित्तस्स गोयमसगुत्तस्स अधणगिरी' थेरे अंतेवासी वासिठसगुत्ताधारस्सणं अजधणगिरिस्स वासिम्सगुत्तस्स अजासिवनूई थेरे । अंतेवासीकुबसगुत्ते॥॥रस्सणं अजसिवनूश्स्स कुठसगुत्तस्स अजानद्दे'थेरे अंतेवासी ॥७॥ कासवगुत्ते॥६॥रस्स णं अऊनहस्सकासवगुत्तस्स 'अजनकत्ते'थेरे अंतेवासी कासवगुत्ते । ॥॥रस्स णं अजनकत्तस्स कासवगुत्तस्स अकरके'थेरे अंतेवासी कासवगुत्ते॥॥थे **XEXX For Private & Personal use only Page #119 -------------------------------------------------------------------------- ________________ रस्सणं अजरकस्स कासवगुत्तस्स अऊनागे'थेरे अंतेवासी गोअमसगुत्ते॥॥थेरस्स णं हैं। अजनागस्स गोअमसगुत्तस्स अऊजेदिले थेरे अंतेवासी वासिम्सगुत्ते॥१०॥थेरस्सणं | अऊजेहिलस्स वासिठसगुत्तस्स अङविण्ढू' थेरे अंतेवासी माढरसगुत्ते॥११॥ थेररसणं अजविएहुस्स माढरसगुत्तस्स अजाकालए' थेरे अंतेवासी गोयमसगुत्ते॥२॥ रस्सणं । अजाकालियस्स गोयमसगुत्तस्स इमे दो थेरा अंतेवासी गोयमसगुत्ता-थेरे 'अजसंपलिए (१),थेरे अजानद्दे(२)।१३।एएसिणं जाहं थेराणं गोयमसगुत्ताणं अजवुड्डे'थेरे अंतेवासी गोयमसगुत्ते॥१४॥रस्स णं अऊवुड्डस्स गोयमसगुत्तस्स अकसंघपालिए थेरे अंतेवासी गोयमसगुत्ते॥२॥रस्सणं अङासंघपलिअस्सगोयमसगुत्तस्स अजहबी'थेरे अंतेवासी कासवगुत्ते॥१६॥रस्सणं अजहबिस्स कासवगुत्तस्स अऊधम्मे'थेरे अंतेवासी सुवयगुत्ते॥णाथेरस्स एणं अऊधम्मस्स सुव्वयगुत्तस्स अजासिंदे थेरे अंतेवासी कासवगुत्ते॥२॥ For Private Personal Use Only www.jainelorary.org Page #120 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कहप० ॥५ ॥ रस्स णं अऊसिंहस्स कासवगुत्तस्स 'अऊधम्मे' थेरे अंतेवासी कासवगुत्ते॥रणाथेरस्स। बारसो. *णं अऊधम्मस्स कासवगुत्तस्स 'अऊसंडिल्ले' थेरे अंतेवासी॥२०॥वंदामि 'फग्गुमित्तं,' च गोयमं 'धणगिरिं' च वासिहं । कुछ सिवनूइंपिय कोसिय उऊंतकण्हे अ॥१॥ तं वंदिळण सिरसा, 'नई' वंदामि कासवसगुत्तं । 'नर्क' कासवगुत्तं, 'रकंपिय कासवं । वंदे ॥२॥ वंदामि 'अऊनागं' च गोयमं जेदिलं' च वासिहं । 'विएहं' माढरगुत्तं, | 'कालग'मवि गोयमं वंदे ॥ ३ ॥ गोयमगुत्तकुमारं 'संपलियं' तहय 'नयं' वंदे । थेरं । च 'अजवुड्ढे' गोयमगुत्तं नमंसामि ॥ ४ ॥ तं वंदिकण सिरसा, थिरसत्तचरित्तनाणंसंपन्नं । थेरं च 'संघवालिय' गोयमंगुत्तं पणिवयामि ॥ ५॥ वंदामि ‘अऊहति' च कासवं खंतिसागरं धीरं । गिम्दाण पढममासे, कालगयं चेव सुझस्स ॥ ६॥ वंदामि ॥५ ॥ 'अजधम्म' च सुव्वयं सीललसिंपन्नं । जस निस्कमणे देवो, उत्तं वरमुत्तमं वद॥७॥ १ कासव० ( क. कि.) Jain Educa For Private Personal Use Only Page #121 -------------------------------------------------------------------------- ________________ दति' कासवगुत्तं, 'धम्म' सिवसादगं पणिवयामि । 'सीई' कासवगुत्तं, 'धम्मपिय *कासवं वंदे ॥ ७ ॥ तं वंदिळण सिरसा, थिरसत्तचरित्तनाणसंपन्नं। थेरं च 'अजाजंबुं *गोयमगुत्तं नमसामि ॥ ॥मिनमद्दवसंपन्नं, नवउत्तं नाणदंसणचरित्ते। थेरं च 'नंदियं' *पिय' कासवगुत्तं पणिवयामि ॥ १० ॥ तत्तो य थिरचरितं, उत्तमसम्मत्तसंत्तसजुत्तं ।। * देवड्डिगणिखमासमणं' माढरगुत्तं नमसामि ॥११॥ तत्तो अणुजंगधरं' धीरं मइसागरं । महासत्तं। थिरगुत्तखमासमणं, वरसगुत्तं पणिवयामि॥१॥ तत्तो य नाणदसण-चरित्ततवसुध्यिं गुणमहंतं । थेर 'कुमारधम्मं,' वंदामि गणिं गुणोवेयं ॥१३॥ सुत्तबरयणनरिए' खमदममद्दवगुणेहिं संपन्ने। 'देविड्डिखमासमणे, कासवगुत्ते पणिवयामि ॥२४॥ (स्थविरावली संपूर्णा) || ॥ तेणं कालेणं तेणं समएणं समणे नगवं महावीरे वासाणं सवीसइराए मासे । विश्कंते वासावासं पङोसवे ॥१॥ से केणठेणं नंते! एवं वुच्चइ 'समणे जगवं For Private & Personal use only Page #122 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० ॥ ५ ॥ ****** महावीरे वासाणं सवीसइराएं मासे विश्कते वासावासं पोसवेइ ? जर्ज णं पाए बारसो. गाणं गाराई कडियाई नक्कंबियाई बन्नाई लित्ताई गुत्ताई घठाई मठाई संपधूमियाई खाउंदगाई खायनि दमलाई अप्पणी हाए कडाई परिजुत्ताइं परिणामियाई जवंति, से ते एवं बुच्चइ 'समणे जगवं महावीरे वासाणं सवीसइराए मासे विक्कते वासावासं पोसवेइ' ॥ २ ॥ जहा णं समणे जगवं महावीरे वासाणं सवीसइराए मासे | विश्कते वासावासं पोसवेइ, तदा गं गणदरावि वासाणं सवीसइराए मासे विक्कते | वासावासं पोसविंति ॥ ३ ॥ जहा गं गणदरा वासाणं सवीसइराए जाव पोसविंति तदा णं गणदरसी सावि वासाणं जाव पोसविंति ॥४॥ जहा गं गणदरसीसा वासाणं जाव पोसविंति तदा णं येरा वि वासावासं जाव पद्मांसविंति ॥५॥जदा णं येरा वासाणं जाव पकोसविंति तहा णं जे इमे प्रत्ताए समणा निग्गंथा विदति, ऐएवि प्र णं वासाणं जाव १ विणं (क० कौ० ) * * * * ॥ एए ॥ ||Sanelibrary.org Page #123 -------------------------------------------------------------------------- ________________ पजोसविंति॥६॥जदा णं जे श्मे अजत्ताए समणा निग्गंथा वासाणं सवीसइराए मासे विश्कंते वासावासं पङोसविंति, तहा णं अम्हंपि आयरिया नवज्छाया वासाणं जाव । पजोसविंति॥ाजदाणं अम्हंपिआयरिया उवज्छाया वासाणं जाव पङोसविंति, तहाणं अम्देवि वासाणं सवीसइराए मासे विश्कते वासावासं पङोसवेमो, अंतरावि य से कप्प, *नो से कप्पश्तं रयणिं नवाश्णा वित्तए॥॥ वासावासं पड़ोसवियाणं कप्पइ निग्गंयाण वा निग्गंथीणं वा सव्व समंता सक्कोसं जोयणं उग्गदं गिएिदत्ता णं चिहिलं अदालंदमवि उग्गहें ॥ ए॥ वासावासं पजोसवियाणं कप्पर निग्गंथाण वा निग्गंथीणं * वा सब समंता सक्कोसं जोयणं निकायरियाए गंतुं पडिनियत्तए ॥ १० ॥ जब नई निच्चोयगा निच्चसंदणा, नो से कप्पश् सब समंता सक्कोसं जोयणं निकायरियाए * गंतुं पडिनियत्तए ॥ ११॥ एरावई कुणालाए, जब चक्किया सिया, एगं पायं जले - २ पज्जोसवेंति (क० कौ०) Main Education international For Private Personal Use Only Page #124 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० | *किच्चा एगं पायं थले किच्चा, एवं चक्किया एवं णं कप्पइ सव समंता सक्कोसं जोयणं । बारसो. ॥६॥ गंतुं पडिनियत्तए ॥ १२॥ एवं च नो चक्किया, एवं से नो कप्पश् सब समंता - *सक्कोसं जोयणं गंतुं पडिनियत्तए ॥ १३ ॥ वासावासं पङोसवियाणं अगश्याणं एवं वृत्तपुवं नवश्-दावे नंते ! एवं से कप्पइ दावित्तए, नो से कप्पइ पडिगाहित्तए॥१४॥ वासावासं पङोसवियाणं अगश्याणं एवं वृत्तपुवं नव-पडिगादेनंते! एवं से कप्पर पडिगादित्तए, नो से कप्पश्दावित्तए ॥१५॥ वासावासं पजोसविआणं अत्थेगश्याणं एवं वृत्तपुवं नवश्दावे नंते! पडिगादे नंते! एवं से कप्पश् दावित्तएविपडिगादित्तएवि॥१६॥ वासावासं पजोस वियाणं नो कप्पशनिग्गंथाण वा निग्गंथीण वा दहाणं तुहाणं आरोग्गाणं बलियसरीराणं श्मा नव रसविग अनिकणं अनिकणं आदारित्तए, तंजदा-खीरं । ॥६ ॥ (१), दहिं (२), नवणीयं(३), सप्पि (४), तिल्लं (५), गुडं (६), महुँ (७), मऊं () (ए) १ अरुग्गाणं इत्यपि पाठः Jain Edu For Private & Personal use only an.jainelibrary.org Page #125 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ******** ** ॥१७॥वासावासं पङोसवियाणं अगाणं एवं बुत्तपुत्वं नवइ, अहो नंते! गिलाणस्स, * से य पुचियत्वे-केवश्एणं अहो? से वएजा-एवएणं अहो गिलाणस्स, जं से पमाणं वयश्से । य पमाण चित्तवे, सेय विन्नविजा, से य विनवेमाणे लनिजा, से य पमाणपत्ते होन अलादि-श्य वत्तवं सिआसे किमाइते, एवइएणं अहो गिलाणस्स, सिया णं एव वयंत परो वश्जा-पडिगादेहं अजो पबा तुमंजकसि वा पांदिसि वा,एवं से कप्पइ पडिगाहित्तए नो से कप्पर गिलाणनीसाए पडिगादित्तए॥ १७ ॥वासावासं पजो सविआणं अविणं थेराणं तहप्पगाराइंकुलाइं कुडाइंपत्तिाइ थिजाइंवेसासियाइं समयाइंबहुमयाइंअणुमयाइं नवंति जई, से नो कप्पश् अदरकु वश्त्तए "अवि ते आजसो! इमं वा इमं वा” से . किमाहु नंते?, सड्ढी गिही गिएदवा, तेणियंपि कुजा ॥१॥ वासावासं पजोस वियरस निच्चन्नत्तियस्स निरकुस्स कप्पइ एगं गोअरकालंगाहावश्कुलं नत्ताए वा पाणाए वा निस्कमित्तए वा पविसित्तए वा, नन्नबायरियवेयावच्चेण वा एवं नवज्कायवेयावच्चेण वा, तव १ से य वइज्जा (क० को०); २ दाहिसि वा इति पाठानारे; ३ तत्थ (क० सु० क० को०) *** * * * ainelibrary.org Page #126 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० ****** ॥६॥ *********** स्सिवेयावच्चेण वा, गिलाणवयावच्चेण वा, खुड्डएण वा खुड्डियाएण वा अवंजणजायएण|| बारसो. वा ॥२॥ वासावासं पजोसवियस्स चवन्नत्तियस्स निरकुस्स अयं एवश्ए विसेसे-जं से पा निकम्म पुवामेव वियडगं जुच्चा पिच्चा पमिग्गदगं संलिदिय संपमङिय से य संथरिजा, कप्प से तदिवसं तेणेव नत्तणं पड़ोसवित्तए-से य नो संथरिजा, एवं से कप्प उच्चपि गादावश्कुलं लत्ताए वा पाणाए वा निकमित्तए वा पविसित्तए वा ॥३॥वासावासं पजोसवियस्स बहनतियस्स निरकुस्स कप्पंति दो गोअरकाला गादावश्कुलं लत्ता*एवा पाणाए वा निकमित्तए वा पविसित्तए वा॥२॥वासावासं पङोसवियस्स अम्मन्न*त्तियस्स निकुस्स कप्पंति तर्ज गोअरकाला गादावश्कुलं नत्ताए वा पाणाए वा निरक*मित्तए वा पविसित्तए वा॥२३॥वासवासं पजोसवियस्स विगिहन्नत्तियस्स निरकुस्स क पंति सवेवि गोअरकाला गादावश्कुलं नत्ताए वा पाणाए वा निकमित्तए वा पविसित्तए । वा ॥२४॥ वासावासं पजोसवियस्स निच्चन्नत्तियस्स निरकुस्स कप्पंति सवाइं पाणगाई ॥६ ॥ ****** JainEducation International For Private Personal Use Only Page #127 -------------------------------------------------------------------------- ________________ RXXX****RRRRRRRRXXXXXXX पडिगाहित्तए।वासावासं पजोसवियस्स चनबन्नत्तियस्स निरकुस्स कप्पति तर्ज पाणगाई। अपडिगादित्तए, तंजदा-उसेश्मं, संसेश्म, चाउलोदगं। वासावासं पजोसवियस्स बहनत्ति यस्स निरकुस्स कप्पंति तर्ज पाणगाइं पडिगादित्तए, तंजदा-तिलोदगंवा, तुसोदगंवा, *जवोदगं वा । वासावासं पङोसवियस्स अम्मन्नत्तियस्स निरकुस्स कप्पंति तजे पाणगाई। पडिगादित्तए, तंजदा-आयामे वा, सोवीरे वा, सुझवियडे वा । वासवासं पङोसवियस्स विगिन्नत्तियस्स निरकुस्स कप्पइ एगे सिणवियडे पडिगादित्तए से वि य णं असिजे नोविय णं ससि।वासावासं पजोसवियस्स नत्तपडियाइस्कियस्स निरकुस्स कप्पइ एगे जसिणवियमे पडिगाहित्तए, सेवि य णं असिने नो चेव णं ससिबे, सेवि यणं परिपए नो चेव णं अपरिपूर,से विय णं परिमिए नो चेव णं अपरिमिए,से विधणं बहुसंपन्ने नौ चेव णं अबहुसंपन्ने ॥३॥ वासावासं पङोसविअस्स संखादत्तियस्स निरकुस्स कप्पंति पंच दत्तीएलोअणस्स पडिगादित्तएपंच पाणगस्स,अहवा चत्तारिनोअणस्सपंच पाणगस्स, १ आयामं वा, सोवीरं वा, सुद्धविअडं वा (क• मु० क० को०) २ विकिट्ठ कि० सु० क० को०)। ******************* ** Main Education International For Private & Personal use only wrow.jainelibrary.org Page #128 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० 112 11 अदवा पंच जोअणस्स चत्तारि पाणगस्सातच ां एगा दत्ती लोंणासायण मित्तमवि पडिगादिच्या सिया, कप्पइ से तद्दिवसं तेणेव नत्तणं नत्तणं पोस वित्तए, नो से कप्पइ उच्चपि गादावइकुलं प्रत्ताए वा पाणाए वा निरक मित्तर वा पविसित्तए वा ॥ २६ ॥ वासावासं |पको सवियाणं नो कप्पइ निग्गंथाण वा निग्गंथी वा जाव नवस्स्यार्ज सत्तघरंतरं संखडिं संनिंयट्टचारिस्स इत्तए, एगे एवमाहंसु-नो कप्पइ जाव नवस्सया परेणं सत्तघरंतरं संखमिं संनियट्टचा रिस्स इत्तए, एगे पुण एवमादंसु-नो कप्पइ जाव जवस्सया परंपरें | संखमिं संन्नियट्टचारिस्च इत्तर ॥ २७ ॥ वासावासं पोस वियस्स नो कप्पइ पाणिपमिग्गदियस्स निरकुस्स कणगफुसिय मित्तमवि बुठिकायंसि निवयमाणंसि जाव गादावइकुलं न| त्ताए वा पाणाए वा निरक मित्तए वा पविसित्तए वा ॥ २८॥वासासासं पोस वियरस पाणिप| डिग्गदियस्स निरकुस्स नो कप्पइ गिसि पिंमवायं पडिगादित्ता पोस वित्तए, पोसवेमाणस्स सहसा बुटिकाए निवइका देस मुच्चा देसमादाय से पाणिणा पाणिं परिपिदित्ता Jain Education intimational बारसो. ॥ ६२॥ Ww.jainelibrary.org Page #129 -------------------------------------------------------------------------- ________________ | नरंसि वा ां निलिजिया, करकंसि वाणं समादडिया, प्रदावन्नाणि वा लेणाणि वा उवागचिका, रुकमूलाणि वा नवागचिका, जदा से पाणिंसि दए वा दगरए वा दगफु सिच्या वा नो परियाव ॥२॥ वासावासं पोसवियस्स पाणिपडिग्गदियस्स निरकुस्स जं | किंचि कणगफुसियमित्तंपि निवडेति, नो से कप्पइ गादावइकुलं नत्ताए वा पाणाए निरक| मित्त वा पविसित्तए वा ॥ ३०॥ वासावासं पोसवियस्स पडिग्गदधा रिस्स निरकुस्स नो | कप्पइ वग्घारियवु ठिकायंसि गादावइकुलं प्रत्ताए वा पाणाए वा निस्कमित्तए वा पविसि - उत्तए वा, कप्पर से पवु ठिकायंसि संतरुत्तरंसि गादावइकुलं जत्ताए वा पाणाए वा निकमित्तए वा पविसित्तए वा ॥ ३२॥ ( ग्रं० ११०० ) वासावासं पोस वियस्स निग्गंथस्स निग्गंथीए वा गादावइकुलं पिंमवायपरिच्या अणुपविहरस निगिज्जिय निगिकिय वुठिकाए | निवइका, कप्पर से प्रदे आरामंसि वा पदे नवस्सयंसि वा प्रदे वियडगिदंसि वा प्रदे | रुकमूलंसि वा जवागवित्तए ॥ ३२॥ तब से पुवागमणेणं पुवाउत्ते चाडलोदणे पञ्चात्ते नि ********* Page #130 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्पन बारसो. ॥६३॥ लिंगसूव,कप्पइसे चाउलोदणे पडिगादित्तए,नो से कप्पइनिलिंगसूवे पडिगाहित्तए॥३३॥ तब से पुवागमणेणं पुवाउत्ते निलिंगसूवे पचाउत्ते चाउलोदणे,कप्पइसे निलिंगसूवे पडिगादित्तए,नो से कप्पश् चानलोदणे पडिगादित्तए॥३४॥तव से पुवागमणेणं दोवि पुवानत्ताई कप्पंति से दोवि पडिगादित्तए।तब से पुवागमणेणं दोवि पठानत्ताइं,एवं नो से कप्पंति दोवि पडिगादित्तए,जे से तब पुवागमणेणं पुवाउत्ते,से कप्पश् पडिगादित्तए,जे से तब पुवागमणेणं पाउत्ते,नो से कप्पइ पडिगादित्तए॥३॥वासावासं पजोसवियस्स निग्गंथस्स निग्गंथीए वा गादावश्कुलं पिंमवायपमियाए अणुपविछेस्स निगिन्किय निगि-1 किय वुहिकाए निमश्का,कप्पइसे अहे आरामंसि वा अहे नवस्सयंसि वा अहे वियडगिहंसि वा अहे रुकमूलंसि वा उवागवित्तए,नो से कप्प३ पुवगहिएणं नत्तपाणेणं वेलं उवायणावित्तए,कप्पइ से पुवामेव वियडगं जुच्चा पडिग्गहगं संलिहिय संखिदिय संपमजिय संपमझिय एगाययं मंगं कट्ट सावसेसे सूरे जेणेव उवस्सए तेणेव उवागचित्तए, ॥६३॥ For Private Personal use only Page #131 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ************************* नो से कप्पर तं रयणिं तदेव उवायणा वित्ताए॥३६॥वासावासं पजोसवियस्स निग्गंथस्स निग्गंथीए वा गादावश्कुलं पिझवायपडियाए अणुपविठस्स निगिछिय निगिज्य वुहिकाए निवजा,कप्पई से अहे आरामंसि वा अहे जवस्सयंसि वा उवागवित्तए ॥३॥ तब नो कप्पइ एगस्स निग्गंथस्स एगाए ये निग्गंथीए एगये चिहित्तए । १, तब नो कप्पइ एगस्स निग्गंधस्स उपदं निग्गंधीणं एगय चित्तिए २, तब नो । कप्पर डाहं निग्गंथाणं एगाए य निग्गंथीए एगय चिहित्तए ३, तब नो कप्पर जाएं निग्गंथाणं एवं निग्गंथीण य एगय चित्तिएधाअबियश्च केश पंचमे खुड्डए वा खु-* ड्डिया श्वा अन्नसिं वा संलोए सपडिज्वारे एवएदं कप्पक्ष एगय चिहित्तए॥३॥वासावासं पङोसवियस्स निग्गंथस्स गाहावश्कुलं पिंमवायपमियाए अणुपविठस्स निगिन्छिए निगिन्छिए वुझिकाए निवजा,कप्पइसे अदे आरामंसि वा अहे जवस्सयंसि वा जवागचित्तए,तब नो कप्पइ एगस्स निग्गंथस्स एगाए य अगारीए एगय चिहित्तए,एवं चन १ नास्ति प्रत्यन्तर २ एगा (क० सु० क० को०) Main Education International For Private Personal Use Only BAMLLiainelibrary.org Page #132 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प बारसो. ॥६५॥ नंगी।अविणं इच केइ पंचमए थेरे वा थेरिया वा अन्नेसिं वा संलोए सपडिज्वारे, एवं क- प्पइ एगयां चिहित्तए।एवं चेव निग्गंथीए अगारस्स य नाणियवं॥३॥वासावासं पङोसवियाणं नो कप्पक्ष निग्गंथाण वा निगंथीण वा अपरिमएणं अपरिमयस्स अहाए असणं वारपाणं वाश्खाइमं वा३साइमं वाधजाव पडिगादित्तए॥४॥से किमाहुते?श्चा * परोअपरिमएलुजिजा,श्वा परोन जुजिजा ॥४॥ वासावासं पजोसवियाणं नो कप्पश् । निग्गंथाण वा निग्गंधीण वा उदनल्लेण वा ससिणिण वा कारणं असणं वा २ पाणं वा खाइमं वा३साइमं वाधहारित्तए॥४॥से किमाहुते?सत्त सिणेहाययणा पमत्ता, तंजहा-पाणी१,पाणिलेदार,नहा३,नदसिदाम,लमुदाय,अहरोहा६,उत्तरोठाशअद पुण एवं जाणिजा-विगउँदगेमे काए बिन्नसिणेदे,एवं से कप्पइ असणं वारपाणं वा श्खाइमं वा ३. साइमं वादारित्तए॥४३॥वासावासं पजोसवियाणं इह खलु निग्गंथाण वा निग्गंधीणं - वा इमाइं असुहुमाई,जाइं उनमवेणं निग्गंथेण वा निग्गंथीए वा अनिकणं अनिकणं| ॥६४॥ Jain Educat onal For Private & Personal use only Is j ainelibrary.org Page #133 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जाणियवाई पासिअवाइं पडिलेहियवाई नवंति,तंजहा-पाणसुहुमं१,पणगसुहुमंश,बीअ* सुहुमं३,हरियसुहुमंध,पुप्फसुहुमंथ,अंमसुहुमंद,लेणसुहुमंसिणेहसुहुमं ॥४॥से किं तं पाणसुहुमे ? पाणसुहुमे पंचविदे पन्नत्ते, तंजदा-किएदे , नीले २, लोदिए,३, हालिद्दे ४, सुकिल्ले । अति कुंथु अणुधरी नाम, जा गिया अचलमाणा उनमबाणं निग्गंधाण वा निग्गंथीण वा नो चरकुफासं दवमागबइ, जा अहिया चलमाणा उनमनगणं निग्गंथाण वा निग्गंथीण वा चरकुफासं दवमागबर, जो उनमणं निग्गंथेणं वा निग्गंथीए वा अनिकणं अनिकणं जाणिवा पासियवा पडिलेहियवा दवइ ।सेतं पाणसुहुमे ॥से किं तं पणगसुहुमे?पणगसुहुमे पंचविदे परमत्ते, तंजदा-किएदे, नीले,लोदिए,दालिहे,सुकिल्ले।अधि पणगसुहुमे तद्दवसमाणवणे नामं परमते, जे बनमजेणं निग्गंथेणं वा । निग्गंथीए वा जाव पडिले दिवे नवासेतं पणगसुहुमे॥शासे किंतं बीअसुहुमे? बीयसुहुमे पंचविते परमते, तंजदा-किएदे जाव सुकिल्ले।अबिबीअसुटुमे कणियासमाणवस्मए १ जाव (क० म० क• कौ०; क० क०) HERMERRRRR8XXXXXXXXX Jan Education Internations For Private Personal Use Only Page #134 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प ॥६५॥ KSINEE***NIREESEXSEX****88888SEMRENT नामं पन्नत्ते, जे उजमनेणं निग्गंयेणं वा निग्गंथीए वा जाव पडिले दियवे नवासे तंबीअ- बारसो. *सुहुम॥३॥से किं तं हरियसुढुमे ? दरिदसुढुमे पंचविहे पम्मत्ते, तंजदा-किएदे जाव सुकिल्ले।। अखि दरिअसुहमे पुढवीसमाणवप्मए नामं परमत्ते,जे निग्गंथेणं वा निग्गंथीए वा अन्नीक*णं अनिकणं जाणियवे पासियवे पडिले दियवे नवासे तं दरिअसुटुमे॥४॥से किं तं पुष्फसुहुमे ? पुप्पसुटुमे पंचविहे परमत्ते,तंजहा-किएदे जाव सुकिल्ले। अनि पुप्फसुहुमे रुकसमा वरमे नाम पमत्ते,जे उनमणं निग्गंथेणं वा निग्गंथीए वा जाणियवे जाव पडिलेदियवे नवासे तं पुप्फसुहुमे॥५॥से किं तं अंमसुठुमे? असुठुमे पंचविहे परमत्ते, तंजहा-नदंसं-- मे, नक्कलियंके, पिपीलिअंमे, इलिमे, हल्लाइलिमे, जे निग्गंथेण वा निग्गंथीए वा जाव । पडिलेहियवे नवर।से तं अंम्सुहुमे ॥६॥से किं तं लेणसुटुमे ? लेणसुडुमे पंचविदे पामत्ते, तंजहा-नत्तिंगलेणे, निंगुलेणे, उखुए, तालमूलए, संबुक्कावट्टे नामं पंचमे, जे बनमत्थेण निग्गंथेण वा निग्गंथीए वा जाणियवे जाव पडिलेदियवे नवासे तं लेणसुठुमे।ासे किं तं ॥६५॥ For Private Personal use only Page #135 -------------------------------------------------------------------------- ________________ सिणेहसुढुमे ? सिणेहसुद्दमे पंचविहे पमत्ते, तंजहा-नस्सा, हिमए, महिया, करए, हरतणुए। जे उनमःणं निग्गंथेण वा निग्गंथीए वा अनिकणं अन्निकणं जाव पडिलेदियो नव।सेतं सिणेहसुद्धमे॥॥४॥वासावासं पजोसविए निरकू इबिजा गादावश्कुलं । नत्ताए वा पाणाए वा निरकमित्तए वा पविसित्तए वा, नो से कप्पर अणापुबित्ता आयरियं । वा उवज्कायं वा थेरं पवित्तिं गणिं गणदरंगणावअयं जंवा पुर काजं विदरइ, कप्पा से आपुनि आयरियं वा जाव जंवा पुरका विदरइ-श्वामिणं नंते! तुम्नेहिं अनगुमाए * समाणे गाहावश्कुल नत्ताए वा पाणाए वा निकमित्तए वा पविसित्तए वा, ते य से विय-* * रिजा, एवं से कप्पश्गादावश्कुल नत्ताए वा पाणाए वा निरकमित्तए वा पविसित्तए, ते य से , नो वियरिजा एवं से नो कप्पश्नत्ताए वा पाणाए वा निकमित्तए वा पविसित्ताए वा । से * किमाहु नंते? आयरिया पञ्चवायं जाणंति ॥४६॥ एवं विदारनूमि वा वियारनूमि वा अन्नं वा जंकिंचि पउँअणं, एवं गामाणुगाम दूजित्तए ॥ ४ ॥ वासावासं पजोस Jain Education Intematona For Private & Personal use only Page #136 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प० विए निरकू इबिजा अम्लयरिं विगई आदारित्तए, नो से कप्पश्अणापुनित्ता आयरियं बारसो. वा जाव गणावलेययं वा जंवा पुर केट्ट विदरश्,कप्पश्से आपुबित्ता आयरियं जाव आदारित्तए-'श्वामिणं नंते! तुनेदि अनगुमाए समाणे अन्नयरिं विगइंदारित्तए एवश्यं । वा एवयखुत्तो वा, ते य से वियरिजा, एवं से कप्पश् अस्मयरिं विगई आदारित्तए, ते य से नो वियरिजा,एवं से नो कप्पश् अमयरिं विगइंआदारित्तए, से किमाद्नंते? आयरिया पचवायं जाणंति॥४ावासावासं पजोसविए निरकु इबिजा अम्मयरिं ते चियं आनट्टित्तए, |तं चेव सवं नाणियवं ॥४ा वासावासं पङोसविए निरकु इबिजा अस्मयरं उरावं कल्लाणं सिवं धर्म मंगलं सस्सिरीयं महाणुनावं तवोकम्मंजवसंपजित्ता णं विदरित्तए, तं चेवं सवं| नाणियत्वं ॥५॥वासावासं पङोसविए निरकु इबिजा अपबिममारणंतियसंलेदणाजूसणाजुसिए नत्तपाणपडियाशकिए पाउँवगए कालं,अणवकंखमाणे विदरित्तए वा निकमि*त्तए वा पविसित्तए वा, असणं वा १ पाणं वा एखाश्मंवा ३ सामं वा आदारित्तए वा, १ काउं इति प्रत्यन्तरेः २ तेगिच्छं इत्यापि पाठः ॥६६॥ ForPrivate LPersonal use Only Page #137 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ****** | उच्चारं वा पासवणं वा परिधावित्तए, सज्जायं वा करित्तए, धम्मजागरियं वा जागरित्तए । नो से कप्पइ प्रणापुचित्ता, तं चैव सवं ॥५१॥ वासावासं पोसविए जिरवू इचिका वचं वा | पडिग्गदं वा कंबलं वा पाय पुंणं वा यरिं वा नवदिं प्रायवित्तए वा पया वित्तए वा । नो से कप्पइ एगंवा गं वा प्रपडिमवित्ता गादावइकुलं प्रत्ताए वा पाणाए वा निरकमित्त वा पविसित्तए, वा असणं वा १ पाणं वाश्खाइमं वा ३ साइमं वा४ च्प्रादा रित्तए, बदिया विदारभूमिं वा वियारभूमिं वा सज्जायं वा करित्तए, काउस्सग्गं वा ठाणं वा वाइत्तए । अि य इव के सिमसाग प्रदास सिदिए एगे वा खोगे वा, कप्पर से एवं वइत्तए- 'इमं ता को! तुमं मुदुत्तगं जाणे दि जाव ताव प्रदं गादावइकुलं जाव काजस्सग्गं वा ठगणं वा गइत्तए' से य से पडिसुजा, एवं से कप्पर गाढ़ावइ कुलं तं चैव सवं प्राणियवं । से य से नो पडिणिका, एवं से नो कप्पइ गादावइकुलं जाव काउस्सग्गं वा ठाणं वा गइत्तए | ॥५२॥वासावासं पोसवियाणं नो कप्पइ निग्गंथाण वा निग्गंथी वा प्रणनिग्गदिय . *********** Page #138 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प बारसो. ॥६ ॥ सिजासणियाणं इत्तए, अयाणमेयं,अणनिग्गदियसिजासणियस्स अणुच्चाकूश्यस्स अ छाबंधियस्स अमियासणियस्स अणातावियस्स असमियस्स अनिकणं अनिरकणं अपडिलेदणासीलस्स अपमजणासीलस्स तदा तहां संजमे उरारादए नव॥५३॥ अजणांदामेयं अनिग्गदियसिजासणियस्स जच्चाकुश्यस्स अहाबंधिस्स मियासणियस्स - यावियस्स समियस्स अग्निकणं अनिकणं पडिलेदणासीलस्स पमळणासीलस्स तहा तहा संजमे सुराहए नव॥५॥वासावासं पङोसवियाणं कप्पइ निग्गंथाण वा निग्गंथीण वा त नच्चारपासवणनूमी पडिले दित्तए, न तदा हेमंतगिम्दासु जहा णं वासासु, से किमाह नंते? वसासुणं उसम्म पाणा य तणा य बीया यपणगाय दरियाणि यनवंति। mयावासावासं पङोसवियाणं कप्पइ निग्गंथाण वा निग्गंथीण वा त मत्तगाइंगिएिदत्तए, तंजदा-जच्चारमत्तए, पासवणमत्तए, खेलमत्तए ॥५६॥ वासावासं पङोसवियाणं नो कप्पशनिग्गंथाण वा निग्गंथीण वा परं पङोसवणा गोलोमप्पमाणमित्तेवि केसे तं रयणि १ सहा णंः तहारूवाणं इति पाठांतरेः २ अणायाणातेयं (क. सु. क. कौ० क.ल.) ॥६ ॥ JainEducational For Private Personal Use Only SM2Sainelibrary.org Page #139 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 38E%ERRESTERERRRREERIERREENSENSE उवायणावित्तए। अजेणं खुरमुंडेण वा बुक्कसिरएण वा दोश्यत्वं सिया।पस्किया आरोवणा मासिए खुरमुंडे, अक्ष्मासिए कत्तरिमुंडे, बम्मासिए लोए, संवचरिए वा थेरकप्पे ॥५॥ वासावासं पजोसवियाणं नो कप्पक्ष निग्गंथाण वा निग्गंथीण वा परं पङोसवणा अदिगरणं वश्त्तए, जे णं निग्गंयो वा निग्गंथी वा परंपजोसवणा अदिगरणं वयश्, से णं 'अकप्पेणं अजो! वयसीति, वत्तवे सिया, जेणं निग्गंथो वा निग्गंथी वा परं पङोसवणा अदिगरणं वय, सेणं निहियवे सिया॥५॥वासावासं पङोसवियाणं इह खलु । निग्गंथाण वा निग्गंधीण वा अऊव करकडे कडए विग्गदे समुप्पजिबा, सेहे राणियं खामिजा, राणिएवि सेहं खामिझा (ग्रं० १२००) खमियत्वं खमावियत्वं उवसमियत्वं जवसमावियत्वं समुश्संपुत्रणाबद्दलणं होयत्वं । जो उवसमइ तस्स अनि आराहणा, जो न उवसम तस्स नचि आरादणा, तम्दा अप्पणा चेव उवसमियवं, से किमाहुते जवसमसारं खु सामम॥णावासावासं पजोसवियाणं कप्पइ निग्गंथाण वा निग्गंधीण वा त नवस्सया For Private Personal Use Only Page #140 -------------------------------------------------------------------------- ________________ कल्प ॥६॥ गिएिहत्तए, तंजहा-वेनधिया पडिखेदा साइजिया पमऊणा ॥६॥ वासावासं पङोसवियाणं निग्गंथाण वा निग्गंथीण वा कप्पश् अस्मयरिं दिसिं वा अणुदिसिं वा अवगिज्जिय जत्तपाणं गवेसित्तए।से किमानते? उस्सामं समणा नगवंतो वासासु तवसंपनत्ता नवंति, तवस्वी उब्बले किलंते मुविज वा पवडिङ वा, तमेव दिसं वा अणुदिसंवा समणा *नगवंतो पडिजागरंति॥६॥वासावासं पङोसवियाणं कप्पक्ष निग्गंथाण वा निग्गंधीण वा * * गिलाणदेलं जाव चत्तारि पंच जोयणाइंगंतुं पडिनियत्तए, अंतरावि से कप्पश्वचए,नो से , कप्पश्तं रयणिं तचेव उवायणावित्तए॥६॥श्च्चेयं संवचरिअं थेरकप्पं अहासुत्तं अहाकप्पं अहामग्गं अहातचं सम्मकाएण फासित्ता पालित्ता सोनित्ता तीरित्ता किट्टित्ता आरा|दित्ता आणाए अणुपालित्ता अबेगश्ा समणा निग्गंथा तेणेव नवग्गदणेणं सिमंति मुच्चंति परिनिवाइति सबउकाणमंतं करिति, अबेगा उच्चेणं नवग्गहणणं सिज्जंति जाव सबउकाणमंतं करिंति, अबेगश्या तच्चेणं नवग्गहणेणं जाव अंतं करिंति, सत्तघ्न ॥६ ॥ Join Education International For Private Personal Use Only Page #141 -------------------------------------------------------------------------- ________________ Jain Education ******* ***** वग्गणाई नाइकंमति ॥६३॥ तेां काखेणं तेणं समएणं समणे जगवं महावीरे रायगिदे नगरे गुण सिलए चेइए, बहूणं समणाणं बहूणं समणी बहूणं सावयाणं बहूणं साविया बहूणं देवाएं बहूणं देवीणं मज्जगए चेव एवमाइक, एवं जासइ, एवं परमवेइ, एवं परुवेइ, पोसवणाकप्पो नामं प्रज्जयां सा सदेच्यं सकारणं ससुत्तं सप्रबं सजयं सवागरणं जुको जुको उवदंसेइति बेमि ॥ ६४ ॥ पोसवणाकप्पो नाम दसासुत्र्प्रस्कंधस्स ममज्जयणं समत्तं ॥ ( ग्रं० १२१५ ) Printed by The New Laxmi Press, Gaya Building Mandvi Bombay. Published by Hirjee Ghellabhai Padmsi, for Shravak Bhimsi Manek, 107, Dhanji Street Bombay. 3. : *********** ১inelibrary.org Page #142 -------------------------------------------------------------------------- ________________ AAAAAAAPIRATIONAL // श्रीकल्पसूत्र मूलपाठ समाप्त // DAUNLODREAM Rs Main Estoniemens For Private Personal Use Only