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________________ ॥३॥ सवेवि णं एते समणस्स नगवर्ड महावीरस्स एक्कारसवि गणहरा ज्वालसंगिणो * चउद्दसपुश्विणो समत्तगणिपिमगधारगा रायगिदे नगरे मासिएणं लत्तेणं अपाणएणं * कालगया जाव सबस्कप्पहीणा ॥ थेरे 'इंदनूई,' थेरे ‘अजसुहम्मे' य सिझिगए महावीरे पना उल्लिवि थेरा परिनिबुया ॥ जे इमे अऊत्ताए समणा निग्गंथा विदरंति, एए । णं सवे 'अङसुहम्मस्स' अणगारस्स आवच्चिजा, अवसेसा गणदरा निरवच्चा वुनिन्ना । ॥४॥ समणे नगवं 'महावीरे' कासवगुत्ते णं । समणस्स णं जगवर्ड महावीरस्स कासवगुत्तस्स 'अङसुहम्मे' थेरे अंतेवासी अग्गिवेसायणगुत्ते ॥१॥ थेरस्स णं अजासुदम्मस्स अग्गिवेसायणगुत्तस्स 'अजजंबु'नामे थेरे अंतेवासी कासवगुत्तेणें ॥२॥ थेरस्सणं अजाजंबुणामस्स कासवगुत्तस्स 'अजाप्पनवे' थेरे अंतेवासी कच्चायणसगुत्ते । ॥३॥ थेरस्स णं अजप्पन्नवस्स कच्चायणसगुत्तस्स 'अऊसिंझनवे' थेरे अंतेवासी . १ इक्कारसवि. २ गोत्ते इत्यपिपाठः For Private & Personal Use Only
SR No.600160
Book TitleKalpasutra Moolpath
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBhimsinh Manek Shravak Mumbai
PublisherBhimsinh Manek Shravak Mumbai
Publication Year1927
Total Pages142
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size7 MB
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