________________
****
वितदं वागरमाणाां उक्कोसिया चउदसपुर्वीणं संपया हुवा ॥ १३७ ॥ समणस्स जगव महावीरस्स तेरस सया दिनाणी इसेस पत्ताणं नक्को सिया उहिना णिसंपया हुबा ॥ १३८ ॥ समास्स ां जगवर्ज महावीरस्स सत्त सया केवलनाीणं संनिसवराणदंसणधराणं नक्कोसिया केवलनाणिसंपया हुवा ॥ १३५ ॥ समणस्स एणं जगव | महावीरस्स सत्त सया वेबी देवाणं देविड्डिपत्ताणं नक्कोसिया वेवियसंपया दुखा ॥ १४० ॥ समास्स णं जगव महावीरस्स पंच सया विजलमईणं अड्डाइजेसु दीवेसु दोसु समुद्देसु सन्नीणं पंचिंदियाणं पत्तगाणं मणोगए जावे जाणमाणाणं नक्को सिच्या विजलमईणं संपया हुवा ॥ १४१ ॥ समणस्स णं महावीरस्स चत्तारि सया वाईणं सदेवमासुराए अपराजियाणं नक्कोसिया वाइसंपया हुवा ॥ १४२ ॥ समणस्स एां जगव
भगव
परिसाए वाए महावीरस्स
***********
Jain Education International
For Private & Personal Use Only)
www.jainelibrary.org