Book Title: Prachin Jain Lekh Sangraha Part 1
Author(s): Jinvijay
Publisher: Atmanand Jain Sabha

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Page 24
________________ रथी एवी रीते कोतरी काढवामां आवी छे के जेथी ते कबाटना देखाव प्रदर्शित करे छे. आमा बौद्ध अगर जैन साधुओनो थोडो सामान रहेतो. तेमनां द्वार घणा न्हानां छे, तेथी साधुओने पेटे चाली जवू पडतुं. राणी गुफा जेवी अगत्यनी गुफामां पण द्वारनुं माप ३"-११+२' छे. घणी खरी गुफाओमां बारसाखो अंदरथी ढाळ पडती होय छे. ए गुफाओ एवी नीची छे के कोई माणस तेमां सुखेथी रही शके नहि. पण ते साधुओने माटे हती तेथी तेमने तो ते योग्य ज हती. ओरडानां भोयरां लगभग " ना पातळा पत्थरना आंतराथी जुदां पाडेलां छे. भोयरानी भीतो उपर बौद्ध दंतकथानां तथा जैन तीर्थंकरोना चित्रो-आकारों उपसेलां काढ्यां छे. ओटलाना स्तंभो घणा ज सरल छे अने ते उपरथी तथा नीचथी चोरस अने बच्चेथी अष्टकोणाकृति छ घणा कोतरेला स्तंभोन वर्णन खंडगिरि टेकरीनी जैनगुफावाला वृत्तान्तमा आपवामां आव्युं छे. स्तंभोनी कोरणी सीधी नथी पण काइक चांकीचुंकी छे. आ स्तंभोमाथी ब्रेकेट्स आगळ पडता आवे छे अने तेमना उपर " म्होटां स्तनवाळी अने पाछळ पडता मुखवाळी" स्त्रीओनी आकृतिओ छे. ब्रेकेट्स कोतरी काढेला छे अने तेमनी वचमां वाकुं छे. घणु खलं, ओटलानुं छापरुं परसाळना छापराथी नीचुं छे. ___ उपर कहेवामां आव्युं छे के आ गुहाओ कारीगरीनी उत्तमतानी भिन्नता दर्शावे छे. केटलीक गुहाओमां तो रही शकाय तेवु छ अने केटलीक तो 'कुतरानी बोड' करतां भाग्ये ज म्होटी छे. आ उपरथी केटलाक युरोपीय अने तेमनी साथे केटलाक हिंदी विद्वानो पण भूल करे छे के जे गुहाओ म्होटी छे ते हाल करेली छे. डॉक्टर हन्टर आ प्रमाणे कहे छे:--' आ हानी गुहाओ हजु सुधीमां हाथ "Aho Shrut Gyanam"

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