Book Title: Gyansara
Author(s): Maniprabhsagar, Rita Kuhad, Surendra Bothra
Publisher: Prakrit Bharati Academy

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Page 243
________________ स्थानाद्ययोगिनस्तीर्थोच्छेदाद्यालम्बनादपि। सूत्रंदाने महादोष इत्याचार्याः प्रचक्षते // 4 // जो स्थान आदिक योग से है युक्त भी यदि ना पढ़े। नये तीर्थ का विच्छेद हो फिर कौन पथ पर हम बढ़े ? पर पूर्व के गीतार्थ आचार्यों ने सूत्रों में कहा। उन योग विरहित को पढ़ाने में महादूषण कहा // 8 // “तीर्थ का उच्छेद होगा” इत्यादि आलम्बन से भी स्थान आदि योग से रहित को सूत्रदान करने में महान् दोष है, ऐसा आचार्यों का कथन है। The sages of the past have proscribed the teachings of scriptures for those who have no faith in the place yogas. - Not even on the pretext that otherwise the . religious organisation will disintegrate. (216)

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