Book Title: Agam 30 Mool 03 Uttaradhyayana Sutra Part 02 Uttarajjhayanani Terapanth
Author(s): Tulsi Acharya, Mahapragna Acharya
Publisher: Jain Vishva Bharati

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Page 425
________________ ઉત્તરઝયણાણિ ૫૪ પરિશિષ્ટ ૧ : પદાનુક્રમ उत्तिटुंते दिवायरे ११-२४ उवमा जस्स नत्थि उ उ६-६६ एए नरिंदवसभा १८-४६ उदएण सोहि बहिया विमग्गहा? १२-3८ उवरिमाउवरिमा चेव 3६-२१५ एए परीसहा सव्वे २-४६ उदए व्व तेल्लबिंदू २८-२२ उवरिमामज्झिमा तहा उ६-२१४ एए पाउकरे बुद्धे ૨૫-૩૨ उदग्गचारित्ततवो महेसी १.3-34 उवरिमाहेट्ठिमा चेव उ६-२१४ एए भद्दा उ पाणिणो ૨૨-૧૭ उदग्गे दुष्पहंसए ११-२० उवलेवो होइ भोगेसु २५-३८ एए य संगे समइक्कमित्ता उ२-१८ उदही अक्खओदए ११-30 उवले सिला य लोणूसे 38-93 एए विसेसमादाय ૧૮-૫૧ उदही सरिनामाणं 33-१८, २१, २3 उववज्जंति आसुरे काए ८-१४ एए सब्वे सुहेसिणो २२-१६ उदिण्णबलवाहणे १८-१ उववन्नो पउमगुम्माओ १३-१ एएसिं तु विवच्चासे 30-४ उद्दायणो पव्वइओ १८-४७ उववन्नो माणुसंमि लोगंमि -१ एएसिं वण्णओ चेव 38-८3,८१, उद्देसियं कीयगडं नियागं २०-४७ उववूह थिरीकरणे २८-३१ १०५, ११६, १२५, १३५, १४४, १५४, उद्देसेसु दसाइणं उ१-१७ उवसंतमोहणिज्जो -१ १६६, १७८, १८७, १८४, २०३, २४७ उद्धत्तुकामेण समूलजालं 3२-८ उवसंते अविहेडए स भिक्खू १५-१५ एएसिं संवरे चेव 33-२५ उद्धरित्ता समूलियं २३-४६ उवसंते जिइंदिए 3४-30, 3२ एएहिं चउहि ठाणेहि १८-२३ उद्धाइया तत्थ बहू कुमारा १२-१८ उवसंते मुणी चरे १२-५ एएहि ओमचरओ 3०-२४ उप्पज्जई भोत्तुं तहेव पाउं १७-२ उवसग्गाभिधारए २-२१ एएहि कारणेहिं उ६-२६६ उप्पायणे रक्खणसन्निओगे उ२-२८,४१, उवहसंति अणारिया १२-४ एओवमा कामगुणा विवागे 3२-२० ५४, ६७, ८०,८3 उवहिपच्चक्खाणेणं भंते ! जीवे २८ सू० उ4 एक्कारस अंगाई २८-33 उप्फालगदुट्ठवाई य 3४-२६ उवासगाणं पडिमासु 3१-११. एकेका णेगहा भवे उ8-१८१ उभओ अस्सिया भवे २८.६ उविच्च भोगा पुरिसं चयंति १3-3१ एक्को वि पावाइ विवज्जयंतो ૩૨-૫ उभओ केसिगोयमा २३-१४ उवेइ ठाणं विउलुत्तमं धुवं २०-५२ एक्को सयं पच्चणुहोइ दुक्खं १३-२३ उभओ नंदिघोसेणं ११...१७ उवेइ दुक्खोहपरंपराओ 32-33,४६, एक्को हु धम्मो नरदेव ! ताणं १४-४० उभओ निसण्णा सोहंति ૨૩-૧૮ ५८, ७२, ८५,८८ एग एव चरे लाढे ૨-૧૮ उभओ वि तत्थ विहरिंसु २3-6 उवेंति माणुसं जोणि 3-१८७-२० एगओ य पवत्तणं 3१-२ उभओ सीससंघाणं २३-१० उवेहमाणो उ परिव्वएज्जा २१-१५ एगओ विरई कुज्जा 3१-२ उभयस्संतरेण वा १-२५ उवेहे न हणे पाणे २-११ एगओ संवसित्ताणं १४-२६ उम्मत्तो व्व महि चरे? १८-५१ उसिणपरियावेणं २-८ एगं च अणुसासम्मी २७-१० उरं मे परिसिंचई २०-२८ उस्सिचणाए तवणाए 3०-५ एगं च पलिओवर्म ૩૬-૨૨૨ उरगो सुवण्णपासेव १४-४७ उसुयारित्ति मे सुयं १४-४८ एगं जिणेज्ज अप्पाणं उराला य तसा तहा 3६-१०७ उस्सप्पिणीण जे समया ३४-33 एग डसइ पुच्छंमि २७-४ उल्लंघणपल्लंघणे २४-२४ उस्सूलगसयग्घीओ ८-१८ एगंतमणावाए 3०-२८ उल्लंघणे य चंडे य १७-८ उस्सेहो जस्स जो होइ उ६-६४ एगंतमणुपस्सओ -१६ उल्लियो फालिओ गहिओ १५-६४ ऊणाइ घासमेसंतो 3०-२१ एगंतमहिट्ठिओ भयवं उल्लो सुक्को य दो छूढा २५-४० ऊणे वाससयाउए ७-१3 एगंतरत्ते रुइरंसि गंधे ૩૨-૫૨ उवइडे जो परेण सद्दहई २८-१८ ऊससियरोमकूवो २०-५८ एगंतरत्ते रुइरंसि फासे ३२-७८ उवउत्ते इरियं रिए २४-८ एगंतरते रुइरंसि भावे ३२-८१ उवउत्ते य भावओ २४-७ एए अहम्मे नि दुगुंछमाणो ४-१३ एगंतरते रुइरंसि रूवे 3२-२६ उवएसरुइ त्ति नायव्यो २८-१९ एए कंदंति भो ! खगा ८-१० एणंतरत्ते रुइरंसि सद्दे उ२-36 उवक्खडं भोयण माहणाणं १२-११ एए खरपुढवीए 38-99 एगंतरत्ते रुइरे रसम्मि ३२-६५ उवचिट्ठे गुरुं सया १-२० एए चेव उ भावे २८-१९ एग्तरमायाम उ६-२५३ उविट्ठओ सि सामण्णे २०-८ एएण कारणेणं 3६-२६२ एगंतसोक्खं समुवेइ मोक्खं ३२-२ उवदिया मे आयरिया २०-२२ एएण दुक्खोहपरंपरेण ३२-3४, ४७, एगं तु सागरोवमं उ8-१६१ उवणिज्जई जीवियमप्पमायं ૧૩-૨૬ ६०, ७3, ८६, ८८ एगं ते संजयं तयं ૨૨-૩૫ उवभोगे वीरिए तहा 33-१५ एए तिन्नि विसोहए २४-११ एणं विधइऽभिक्खणं २७-४ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org


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