Book Title: Agam 30 Mool 03 Uttaradhyayana Sutra Part 02 Uttarajjhayanani Terapanth
Author(s): Tulsi Acharya, Mahapragna Acharya
Publisher: Jain Vishva Bharati

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Page 504
________________ ઉત્તરક્યણાણિ ૧૦૩૩ પરિશિષ્ટ ૭: ટિપ્પણ-અનુક્રમ ટિ.સંખ્યા શબ્દ વગેરે पडिसंलीणे (१।१३) पडिसंधए (२७१) पणवीसभावणाहिं (३१।१७) पणामए (२२।२०, १९।७९) पणीयं (१६। सू०९) पण्णापरीसह (२।४०, ४१) पत्तिएण (१।४१) पत्तेगससीरा (३६।९४) पत्थं (१४।४८) पन्नवओ (७१३) पन्ने (१५।२) पबंधं (११७) पभावणे (२८१३१) पभीओ...अप्पणो (५।११) पभूयमन्नं (१२।३५) पमाएणं (११।३) पम्हा (३४/३) पयणुवाई (३४।३०) पयाहिणं (२०१७) परंदमे (७६) परकेणं (३४।१४) परगेहंसि वावडे (१७।१८) परज्झा (४।१३) परपासंड (१७।१७) परमं (२।२६) परमंतेहिं (१८६३१) परमट्ठपएहि (२१२२१) परमाहम्मिएसु (३१।१२) परलोगे (२२।१९) परिग्गह (१९।२९) परिग्गहारंभनियत्तदोसा (१४|४१) परिजूरई (१०।२१) परितावेण (२२३६) परिदाहेण (२१८) परिनाय (४७) परियागयं (५।२१) परिभोयंमि चउक्कं (२४।१२) परियट्टणा (२९।२२) परियायधम्म (२०११) ટિસિંખ્યા શબ્દ વગેરે १८ परिवाडीए न चिट्ठज्जा (१॥३२) ६ पvिढे (७६) 3१ परिहारविसुद्धीयं (२८।३२) २३,५५ पलिउंचंति (२७॥१३) पलियमसंखं (३४।४९) ७२,७४ पल्हत्थियं... (१११९) ६५ पवयणं (२९।२४) १८ पवाले (३६.७४) ४१ पसन्ना (१।४६) २२ पसीयंति (१।४६) १० पहं महालयं (१०।३२) ७ पहाणमग्गं (१४।३१) २५ पहाणवं (२०२१) १८ पागारं (९।१८) 3८ पाडिओ (१९५४) 3 पाढवं सरीरं (३।१३) २ पाणं (१२।११) १४ पाणी नो सुप्पसारए (२।२९) ५ पायच्छित्तं (३०।३१) १० पाली महापाली (१८२८) ८ पावकम्मेहि (४।२) २२ पावगं परिवज्जए (१।१२) उप पावसुयपसंगेसु (३१।१९) २० पाविओ (१९।५७) ४८ पावियाहिं दिट्ठीहिं (८७) २१ पास (४।२) २७ पासइ वज्झगं (२१।८) २१ पासंडा (२३।१९) २२ पासजाईपहे (६२) २० पासाएसु गिहेसु च (९७) उ७ पासे (६४, २३६१) १४ पिंडस्स पाणस्स (६।१४) ६७ पिंडोलए... (५।२२) १२ पिंडोग्गहपडिमासु (३१९) १७ पियायए (६६) ३२. पिहुंडं (२१।२) ७ पुच्छ भंते ! (२३।२२) २६ पुज्जसत्थे (१।४७) १३ पुढवीजीवा...(३६।७१-७७) Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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