Book Title: Subodh Samachari
Author(s): Macchindracharya
Publisher: Devchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
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साविए कप्पइ असणाइ पडिगाहेत्तए, कप्पइ दुगाउ अडाणं भिक्खायरियाए अडित्तए, कप्पड़ बत्तीसं कवला आहारं आहारेत्तए, कप्पइ निविगइयघयतेल्लेहिं कारणे पायगायाई अब्भंगेउं, कप्पइ वाणायरियस्स संसहकप्पं, कप्पंति तिन्नि पाउरणाई पाउरित्तए, असहुरस चत्तारि पंच जाव समाही, दिया वा राओ वा आयावेउं कप्पड़, उद्देसाइ जइ साहणीहिं सह तो चोलपट्टसंजुयाणं, संजईहिं विणा सग्गोयरेणावि काउं कप्पति उद्देसाइविही, कप्पइ संजईगं उद्देसाइ पडिक्कमिउं वा सया उढियपरिहियाणं, एवं सव्वं जं जंमि कप्पे भणियं उवहयमणुवहयं वा कप्पमकप्पं वा जहादिद्वं गीयत्थेहिं तं तहेव कायव्वं संकारहिएहिं सव्वेहिं वायणायरियइच्छाए नो समईए, जओ तित्थयरेहि पउरदोसंति सुत्ते भणियं-उम्मायं व लभेज्जा रोगायकं च पाउणे दीहं । तित्थयरभासियाउ भरसइ सो संजमाओ वा ॥१॥ इहलोए फलमेयं परलोए फलं न देन्ति विज्जाउ । आसायणा सुयस्स उ कुवइ दीहं च संसारं ॥२॥ अन्नं च भत्तपाणग्गहणसमए आउत्तवाणयकाउस्सग्गकरणकालादारब्भ पुव्वुचो उबयाणुवयविही दट्टयो, न सामन्नण, विगइवावडहत्थाइ न दरिसणमेत्तेण, एवं भत्तं पाणं पुव्वुद्दिद्वाए विहीए अडित्ता इरियं पडिक्कमित्ता गमणागमणं आलोएत्ता पाराविय असुरसुरं अचवचवं अदुयमावलंबियं अपरिसाडि इच्चाइ विहिणा समुदिसंति,
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