Book Title: Subodh Samachari
Author(s): Macchindracharya
Publisher: Devchand Lalbhai Pustakoddhar Fund

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Page 66
________________ श्रीचन्द्रीया अणुत्तरोववाइयदसाणं एगो सुयखंधो तिन्नि वग्गा तिसु चेव दिवसेसु उदिस्संति, तत्थ पढमतइयवग्गेसु दस २||योगविधान सामाचारी अज्झयणा बीयवग्गे तेरस अज्झयणा, सेसं जहा धम्मकहाणं, वग्गेसु दिणा तिन्नि, सुयखंधे दिणा दो २, अंगे। दिणा दो २, एवं सव्वेऽवि दिणा सत्त ७॥ नवमं अंगं सम्मत्तं ॥ पण्हावागरणंगे एगो सुयक्खंधो दस अज्झयणा एगसरा दससु दिवसेसु उदिरसंति, आगाढजोगो, अन्नं च आउत्तभत्तपाणं, एगंतरेणायंबिलेण, अज्झयणेसु दिणा दस १०, सुयखंधे दो दिणा २, अंगे दो दिणा २, सचे चउद्दस दिणा, महासत्तिक्कयदिणा १४ ॥ पण्हावाग रणं दसमं अंगं सम्मत्तं ॥ विवागसुयंगे दो सुयक्खंधा, पढमदुहविवागसुयखंधे दस अज्झयणा दसहि दिवसेहि नवचंति, एगं दिणं सुयखंधे, एवं एक्कारस दिणा ११, एवं सुहविवागे बीए सुयखंधे दस अज्झयणा १०, एगं दिणं सुयखंधे, अंगे दोन्नि दिणा २, एवं सव्वेऽवि दिणा चउवीसं २४ ॥ सम्मनं एकारसमं अंगं ॥ भगवईए सत्तहत्तरी सव्वे काला॥ इयाणि उवंगा-आयारे उवाइयं उबंगं १ सूयगडे रायपसेणइयं २ ठाणे जीवाभिगमो ३ समवाए पन्नवणा| ४ भगवईए सूरपन्नत्ती ५ नायाणं जंबुद्दीवपन्नत्ती ६ उवासगदसाणं चंदपन्नत्ती ७ तिहिं तिहिं आयंबिलेहिं एक्वेक Jain Education Interational For Private & Personal use only www.jainelibrary.org

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