Book Title: Subodh Samachari
Author(s): Macchindracharya
Publisher: Devchand Lalbhai Pustakoddhar Fund

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Page 58
________________ श्रीचन्द्रीया सामाचारी ॥ ७॥ उववाइयस्स रायपसेणइयरस जीवाभिगमस्स पन्नवणाए महापन्नवणाए नंदीए अणुओगदाराणं देविंदत्थयस्स तंदु- नंदीकर्षणम् लवेयालियरस चंदावेज्झयस्स गणिविज्जाए पारिसिमंडलस्स मंडलपवेसस विज्जाचरणविणिच्छयस्स झाणविभत्तीए मरणविभत्तीर आयविसोहीए मरणविसोहीए संलेहणासुयस्त वीयरागसुयस्स विहारकप्परत चरणविहीए । आउरपच्चक्खाणस्स महापच्चरखाणस्स०१, सम्योसपि एएसिं उद्देसो समुहेसो अणुन्नाऽणु ओगो पवत्तइ, जइ कालियरस उद्देसो समुद्दे सो अणुन्नाऽणुओगो पवत्तइ किं उत्तरज्झयगाणं दसाणं कप्परत ववहाररस इसिभासियाणं निसीहस्स महानिसीहस्स जंबुद्दीवपन्नत्तीए चंदपन्नत्तीए सूरपन्नत्तीए दीवसागरपन्नत्तीए खुड्डियाविमाणपविभत्तीए महलियाविमाणपविभत्तीए अंगचूलियाए वग्गचूलियाए विवाहचूलियाए अरुणोचवायस्स गरुलोवायरस धरणोववायस्स बेसमणोववायरस वेलंधरोववायरस देविंदोववायस्स उठाणसुयरस समुट्टाणसुयस्स नागपरियावलियाणं निरयावलियाणं " कप्पियाणं कप्पवडिंसयाणं पुफियाणं पुप्फलियाणं वन्हिदसाणं आसीविसभावणाणं दिट्टीविसभावणाणं चारणभावणाणं महासमणभावणाणं तेयगनिसग्गाणं०?, सव्धेसिपि एएसिं उद्देसो समुदेसो अणुन्नाऽणुओगो पवत्तइ, जइ अंगपविट्ठस्स उद्देसो समुद्देसो अणुन्नाऽणुओगो पवत्तइ किं आयारस्स सूयगडस्स ठाणरस समवायरस विवाहपन्न Jain Education international For Private & Personal use only www.jainelibrary.org

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