Book Title: Nandanvan Kalpataru 2005 00 SrNo 15
Author(s): Kirtitrai
Publisher: Jain Granth Prakashan Samiti

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Page 20
________________ Jain Education International समत्वदाय भाषोपदेशकाय शर्मदाय जनतासमताप्रदाय शान्तिप्रदाय भुविनिर्भयाय नमो वर्धमानाय महावीराय ॥४॥ कुशाग्रबुद्धिवराय सन्मतिप्रदाय विप्रादिशूद्रसमतादर्शकाय परिग्रहरहिताय जनताहिताय तीर्थप्रवर्तकाय सन्मार्गदाय नमो वर्धमानाय महावीराय ॥५॥ परपीडाहराय सत्याऽहिंसक कर्मकाय कल्याणदाय जगतीजनसौख्यदाय संसारवैरहाय मैत्रीकराय नमो वर्धमानाय महावीराय ॥६॥ जातिवर्णविरोधिपुरुषवराय साधारणादिजन शर्मसमीक्षकाय नमो वर्धमानाय महावीराय ॥७॥ आध्यात्मिकाय श्रावक संघदाय धर्मार्थशिक्षकवराय मधुचाचकाय ध्यानाय योगनियमादिकपालकाय नमो वर्धमानाय महावीराय ॥८॥ 10 For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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