Book Title: Amar Vani
Author(s): Amarmuni
Publisher: Sanmati Gyan Pith Agra

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Page 13
________________ अवमानव और महामानव में क्या भेद है ? इसका उत्तर देते हुए आप एक कसौटी बताते हैं। अवमानव उक्ति प्रधान होता है, उसके पास बातें अधिक होती है और काम कम । महामानव क्रिया-प्रधान होता है, उसके पास काम अधिक है और बातें कम । महामानव-महानता की पगडंडी बताते हुए आप कहते हैं"महानता की पगडंडी फल - फूलों से लदे उद्यानों में से होकर नहीं जाती। वह तो जाती है-कांटों में से, झाड़, झंखाड़ों में से, चट्टानों और तूफानों में से । यह वह पगडंडी है, जहाँ मृत्यु, अपयश और भयंकर यातनाएँ क्षण - क्षण पर आह्वान करती रहती हैं। और, जब आप अपने लक्ष्य के निकट पहुँच भी जाएँ, हो सकता है, फिर भी काँटे ही मिलें। एक तत्त्ववेत्ता ने कहा है___"प्रत्येक महापुरुष पत्थर मारे जाने के लिए है। उसके भाग्य में यहीं बदा होता है।" साधारण पुरुष वातावरण से बनते हैं । परन्तु, महापुरुष वातावरण को बनाते हैं। समय और परिस्थितियाँ उनका निर्माण नहीं करती, परन्तु वे समय और परिस्थितियों का निर्माण करते हैं । महापुरुष की परिभाषा है- "युगनिर्माता।" __ जैन परम्परा में महामानव ऊपर से नहीं उतरते। मानव ही परिश्रम और साधना द्वारा महामानव बनता है । आत्मा ही अपने स्वरूप को प्रकट करके परमात्मा बन जाता है। उसी को प्रकट करते हुए आप कहते हैं- "मनुष्यता के स्वस्थ विकास की पूर्णकोटि ही भगवान् का परमपद है।" आपकी महामानव की परिभाषा कितनी गहन है "महामानव वह है, निष्काम जन-सेवा ही जिसके जीवन का प्राण है। जनता जनार्दन ही जिसका आराध्यदेव है। सेवक बन कर रहना ही जिसके जीवन की आधारशिला है। अहिंसा और [ १२ ] Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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